जमशेदपुर। ‘शिक्षकों का सम्मान, शिक्षा का उत्थान’ विषयक सेमिनार की तैयारियों के सिलसिले में गुरुवार को पीपुल्स एकेडमी और अपने बिष्टुपुर स्थित आवासीय कार्यालय में आयोजित बैठकों में जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने कहा कि इस सेमिनार का उद्देश्य सकारात्मक भाव से झारखंड में शिक्षा व्यवस्था की कमियों को सामने लाकर उनके समाधान की प्रक्रिया खोजना है।
शिक्षकों का सम्मान, शिक्षा का उत्थान: सेमिनार का उद्देश्य
पीपुल्स एकेडमी, बाराद्वारी में प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों की बैठक में उन्होंने कहा कि झारखंड की शिक्षा व्यवस्था में कई कमियां हैं। शिक्षकों की कमियों के साथ-साथ इंफ्रास्ट्रक्चर की भी कमी है। हम लोग सेमिनार में इस तथ्य को रेखांकित करते हुए इन कमियों को दूर करने की दिशा में पहल करेंगे, बात करेंगे। उन्होंने साफ किया कि सेमिनार में शिक्षा व्यवस्था की कमियों को लेकर न तो सरकार की निंदा की जाएगी और न ही शिक्षा विभाग की आलोचना की जाएगी अपितु सामूहिक तौर पर यह जानने का प्रयास किया जाएगा कि ये कमियां हैं तो क्यों हैं और ये दूर कैसे होंगी?
श्री राय ने कहा कि शिक्षा विभाग को जो धन सरकार देती है, उस धन का फलाफल क्या है? वह पैसा कहां जा रहा है? जहां जा रहा है, उससे शिक्षा व्यवस्था को लाभ हो रहा है या नहीं अथवा सब जस का तस ही रह जा रहा है? उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि सरकारी शिक्षकों से अन्य सरकारी काम करवाने का दस्तूर बनाया जा रहा है। उन्होंने दो टूक कहा कि कभी-कभार शिक्षकों से सरकारी काम करवाने में कोई बुराई नहीं लेकिन इसे दस्तूर बनाना निश्चित ही गलत है।
उधर, अपने बिष्टुपुर स्थित आवासीय कार्यालय पर महाविद्यालयों के प्राचार्यों के साथ बैठक में उन्होंने कहा कि 6 सितंबर के सेमिनार में हम लोग यह जानने का प्रयास करेंगे कि झारखंड की शिक्षा व्यवस्था की अद्यतन क्या स्थिति है? उन्होंने दोहराया कि इस सेमिनार का उद्देश्य सरकार या शिक्षा विभाग की निंदा करना कतई नहीं है। यह सेमिनार सकारात्मक मानसिकता के साथ आयोजित किया जा रहा है जिसमें शिक्षा जगत की समस्याओं को रेखांकित कर सरकार से उन्हें दूर करने के प्रयासों के बारे में बात की जाएगी।
सरयू राय ने कहा कि देश भर में नई शिक्षा नीति 2020 लागू हो गई है। हम लोग यह भी जानना चाहेंगे कि इस नई शिक्षा नीति को लागू करने से कोई लाभ हो भी रहा है या नहीं? यह जानना भी समीचीन होगा कि सरकारी विश्वविद्यालयों की कमियों को नई शिक्षा नीति दूर कर पा रही है या नहीं? नीतियां जमीन पर उतर रही हैं या हवा में ही सारी बातें हो रही हैं?
उन्होंने बताया कि सेमिनार में शिक्षकों का सम्मान भी किया जाएगा। श्री राय के अनुसार, हर शैक्षणिक संस्थान से आग्रह किया गया है कि वे अपने संस्थान से एक सबसे ज्यादा योग्य शिक्षक का नाम भेजें जिन्हें सेमिनार में सम्मानित किया जाएगा। इस लिहाज से, उस संस्थान का भी सम्मान होगा।
बिष्टुपुर की बैठक में घंटी आधारित (नीड बेस्ड) शिक्षकों की अवधारणा के संबंध में भी चर्चा हुई। चर्चा में यह बात भी सामने आई कि झारखंड के लगभग 80 प्रतिशत कॉलेजों के पास अपना फंड नहीं है। नई शिक्षा नीति 2020 के अब तक सही तरीके से लागू न होने, शिक्षकों-कर्मचारियों की कमी, प्रोफेसरों द्वारा शिक्षण कार्य छोड़ अन्य सभी कार्य करने, सरकारी कालेजों के पास बच्चों को परिचय पत्र देने तक के पैसे न होने, इंटरमीडिएट की पढ़ाई न होने के नुकसान, नई शिक्षा नीति 2020 के एक सिस्टम को समझते-समझते दूसरे सिस्टम के लागू हो जाने के नुकसान, स्टडी मैटेरियल का अभाव, पूरे झारखंड में एक सिलेबस का न होना और उसके कारण उत्पन्न समस्याओं, विषय का रीअलाइनमेंट होने से विसंगति का पैदा होना, सिर्फ विश्वविद्यालयों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम चलाए जाने के कारण हो रही दिक्कतों, चांसलर पोर्टल के बंद होने के कारण हो रही परेशानियों और अलग-अलग तिथियों में एडमिशन पोर्टल खुलने से होने वाली दिक्कतों के संबंध में सविस्तार चर्चा हुई। आयोजित बैठक का विषय प्रवेश नवनीत सिंह ने कराया।
इनसेट-1: पीएमश्री विद्यालय की चुनौतियां
पीएमश्री विद्यालय, बावनगोड़ा, जाकिरनगर, मानगो के प्रधानाध्यापक शाहिद इकबाल ने पीपुल्स एकेडमी में हुई बैठक में कहा कि उनके विद्यालय में विज्ञान की पढ़ाई बाधित हो रही है। शिक्षकों की संख्या बेहद कम है। शिक्षक पढ़ाई छोड़ हर किस्म के सरकारी काम कर रहे हैं क्योंकि उनसे कहा जा रहा है। ये कभी एसआईआर के काम में लगा दिये जाते हैं तो कभी किसी अन्य कार्य में। पीएमश्री विद्यालयों में शिक्षकों की कमी तो होनी ही नहीं चाहिए लेकिन यहां है। यहां अविलंब शिक्षकों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए ताकि विद्यालय में पठन-पाठन का कार्य सुचारू रुप से चल सके।
इनसेट-2: जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही
एक प्रधानाध्यापक ने बैठक में कहा कि अब विद्यालय पीएम के नाम पर खुल रहे हैं, सीएम के नाम पर खुल रहे हैं। होना तो ये चाहिए कि अब विद्यालय मुखिया के नाम पर खुलें, विधायक के नाम पर खुलें। ये कम से कम विद्यालय को देखने तो आएंगे।
पीपुल्स एकेडमी में आयोजित कार्यक्रम का संचालन वहां के प्रधानाध्यापक चंद्रदीप पांडेय तथा धन्यवाद ज्ञापन सुबोध श्रीवास्तव ने किया।
अधिक जानकारी के लिए शिक्षा मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट देखें।

