लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
जना स्मॉल फाइनेंस बैंक पर गंभीर आरोप
जमशेदपुर: साकची स्थित जना स्मॉल फाइनेंस बैंक में गुरुवार को उस समय हंगामा हो गया, जब एक महिला के परिजन बैंक पहुंच गए। परिजनों ने आरोप लगाया कि बैंक से लिए गए 55 हजार रुपये के लोन की एक महीने की किस्त जमा नहीं करने पर बैंक कर्मियों ने महिला को उसके घर से उठाकर बैंक में बंधक बना लिया।
महिला की पहचान सुलेखा गोप के रूप में हुई है। वह शंकोसाई की रहने वाली बताई जा रही है। परिजनों के अनुसार, सुलेखा ने जना स्मॉल फाइनेंस बैंक से 55 हजार रुपये का लोन लिया था। किसी कारणवश वह एक महीने की किस्त जमा नहीं कर सकी। आरोप है कि इसके बाद बैंक के कुछ कर्मचारी उसके घर पहुंचे और महिला को अपने साथ बैंक ले आए।
महिला को बंधक बनाए जाने की जानकारी मिलने पर उसके परिजन साकची स्थित बैंक पहुंचे और जमकर हंगामा किया। परिजनों ने बैंक प्रबंधन से महिला को तुरंत छोड़ने की मांग की।
मामले को लेकर बैंक के कर्मियों और अधिकारियों से जानकारी लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने घटना के संबंध में कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया। घटना के बाद बैंक में कुछ देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। मामले में महिला के परिजनों की ओर से आगे क्या कार्रवाई की जाती है, यह स्पष्ट नहीं हो सका है।
आरबीआई के दिशानिर्देश और वसूली नियम
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशानिर्देशों के अनुसार, बैंक या वित्तीय संस्थान ऋण वसूली के लिए किसी भी ग्राहक के साथ जबरदस्ती, धमकी या शारीरिक बल का प्रयोग नहीं कर सकते। कर्ज वसूली एजेंटों को ग्राहक के घर या कार्यस्थल पर सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही संपर्क करने की अनुमति है, और उन्हें ग्राहक की गरिमा का सम्मान करना अनिवार्य है। किसी भी ग्राहक को बंधक बनाना या जबरन बैंक लाना गैरकानूनी है और इसके लिए बैंक प्रबंधन पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
पुलिस की भूमिका और संभावित कार्रवाई
इस तरह के मामलों में पीड़ित पक्ष पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकता है। भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 340 (गलत तरीके से रोकना), 342 (गलत तरीके से बंधक बनाना), 506 (आपराधिक धमकी) और 365 (अपहरण) जैसी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। साथ ही, बैंकिंग लोकपाल योजना के तहत भी शिकायत की जा सकती है। स्थानीय पुलिस ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन परिजनों की शिकायत पर जांच शुरू होने की संभावना है।
जना स्मॉल फाइनेंस बैंक का पक्ष
घटना के संबंध में जना स्मॉल फाइनेंस बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर ग्राहक शिकायत निवारण तंत्र की जानकारी उपलब्ध है। विशेषज्ञों का मानना है कि बैंक को इस घटना की आंतरिक जांच कराकर दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
स्मॉल फाइनेंस बैंकों में ग्राहक सुरक्षा
स्मॉल फाइनेंस बैंक वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए स्थापित किए गए हैं, लेकिन ग्राहक सुरक्षा के मानकों का पालन करना उतना ही आवश्यक है। आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि वसूली प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और कानून के दायरे में होनी चाहिए। ग्राहकों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए और किसी भी प्रकार के उत्पीड़न की स्थिति में तुरंत शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
उपभोक्ता अधिकारों के प्रति जागरूकता
इस घटना ने एक बार फिर ऋण वसूली के नाम पर होने वाले उत्पीड़न को उजागर किया है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत ग्राहकों को अनुचित व्यापार प्रथाओं के खिलाफ लड़ने का अधिकार है। बैंकिंग लोकपाल और उपभोक्ता फोरम जैसे मंच त्वरित न्याय प्रदान कर सकते हैं। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे ऋण समझौते की शर्तों को ध्यान से पढ़ें और वसूली एजेंटों के दुर्व्यवहार को रिकॉर्ड करें।

