लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
कार्यक्रम का आयोजन
जमशेदपुर। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के प्रायोजन व आस्था नव चेतना फाउंडेशन की ओर से गोलमुरी स्थित वेस्ट पंजाबी रिफ्यूजी मिडिल स्कूल में कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें समाजसेवी सरदार गोविंद सिंह व सुखबीर सिंह जॉली का अहम योगदान रहा।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर राष्ट्रीय स्मरण
इस मौके पर सरदार सुखबीर सिंह जॉली ने कहा कि डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के उपलक्ष में स्कूली बच्चों के बीच चित्रकला प्रतियोगिता, भाषण प्रतियोगिता, फिल्म प्रदर्शन, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता व भजन संध्या का आयोजन किया गया था। इस मौके पर अलग-अलग प्रतियोगिताओं के विजेता बच्चों को पुरस्कृत किया गया। उन्हें ट्रॉफी के साथ स्कूल ड्रेस, पाठ्य सामग्री दिए गए। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन, विचारों व राष्ट्र सेवा के प्रति उनके योगदान से नई पीढ़ी को परिचित कराना है। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर देशभर में राष्ट्रीय स्मरण कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे। केंद्र सरकार ने उन्हें राष्ट्र निर्माता, प्रखर शिक्षाविद और राष्ट्रीय एकता के प्रति समर्पित नेता के रूप में स्मरण किया है।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की विरासत
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (1901-1953) भारतीय राजनीति के प्रमुख स्तंभ थे। उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना की जो बाद में भारतीय जनता पार्टी का पूर्ववर्ती संगठन बना। एक प्रख्यात शिक्षाविद् के रूप में उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में कार्य किया। उनके द्वारा दिया गया नारा “एक देश में दो विधान, दो प्रधान, दो निशान नहीं चलेंगे” राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बना। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए ऐसे आयोजन महत्वपूर्ण हैं।
युवा पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम की अलख
इस प्रकार के आयोजनों से युवा पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत होती है। डॉ. मुखर्जी के आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं और उनके दिखाए मार्ग पर चलकर ही सशक्त भारत का निर्माण संभव है। कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने उनके योगदान को स्मरण करते हुए नई पीढ़ी को प्रेरित किया।
