लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर। एमएमडीआर संशोधन विधेयक के विरोध में कांग्रेस के प्रदर्शन पर भाजपा जमशेदपुर महानगर अध्यक्ष संजीव सिन्हा ने पलटवार करते हुए इसे मुद्दाविहीन राजनीति बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस संशोधन को लेकर भ्रम फैलाकर जनता को गुमराह कर रही है। केंद्र के अनुसार राज्यों को रॉयल्टी, ऑक्शन प्रीमियम, डीएमएफ और जीएसटी में उनका हिस्सा मिलता रहेगा।
एमएमडीआर संशोधन पर भाजपा का पलटवार
संजीव सिन्हा ने कहा कि संशोधन का उद्देश्य वैध व पारदर्शी खनन को बढ़ावा देना और खनिज संसाधनों का बेहतर उपयोग करना है। उन्होंने झारखंड में कई कोल, लौह अयस्क और बॉक्साइट खदानों के अब तक चालू नहीं होने को राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल बताया।
उन्होंने झामुमो-कांग्रेस सरकार पर अवैध खनन को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए कहा कि “झारखंड आंदोलन की खरीददार कांग्रेस कभी झारखंड का भला नहीं कर सकती।” उन्होंने कहा कि नियुक्ति परीक्षाओं में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए कांग्रेस एमएमडीआर को मुद्दा बना रही है।
खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता लाने का प्रयास
केंद्र सरकार द्वारा लाए गए खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2023 का मुख्य उद्देश्य खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है। इस संशोधन के तहत खनिज ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया को सरल बनाया गया है और राज्यों को अधिक राजस्व प्राप्ति सुनिश्चित की गई है। रॉयल्टी, ऑक्शन प्रीमियम, जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) और जीएसटी में राज्यों का हिस्सा यथावत रखा गया है।
झारखंड में खनन परियोजनाओं की स्थिति
झारखंड में कोयला, लौह अयस्क और बॉक्साइट के विशाल भंडार हैं, लेकिन कई खदानें लंबे समय से बंद पड़ी हैं। भाजपा का आरोप है कि राज्य सरकार की उदासीनता और जटिल प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण ये खदानें चालू नहीं हो पा रही हैं। इससे राज्य को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है और रोजगार के अवसर भी सृजित नहीं हो पा रहे हैं।
कांग्रेस का पक्ष और जनता की प्रतिक्रिया
कांग्रेस का कहना है कि एमएमडीआर संशोधन से राज्यों के अधिकार कम होंगे और निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाया जाएगा। पार्टी ने इस मुद्दे पर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। हालांकि, भाजपा का दावा है कि कांग्रेस अपने शासनकाल में हुए भ्रष्टाचार और विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए इस मुद्दे को तूल दे रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खनिज संसाधनों का वैज्ञानिक और पारदर्शी दोहन देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। खान मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर संशोधन से जुड़े विस्तृत प्रावधान उपलब्ध हैं।
भाजपा की रणनीति और आगामी चुनाव
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, भाजपा द्वारा एमएमडीआर संशोधन का पुरजोर समर्थन और कांग्रेस के विरोध को मुद्दाविहीन बताना आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों की रणनीति का हिस्सा है। झारखंड में खनन एक संवेदनशील मुद्दा है और आदिवासी बहुल इलाकों में इसका गहरा असर पड़ता है। संजीव सिन्हा का बयान सीधे तौर पर झामुमो-कांग्रेस गठबंधन की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है।
अवैध खनन पर अंकुश लगाने की जरूरत
झारखंड में अवैध खनन लंबे समय से एक बड़ी समस्या रही है। संशोधन विधेयक में अवैध खनन पर सख्त दंड का प्रावधान किया गया है। भाजपा का आरोप है कि वर्तमान राज्य सरकार अवैध खनन माफिया को संरक्षण दे रही है। इस आरोप का खंडन करते हुए सत्ताधारी गठबंधन का कहना है कि उन्होंने अवैध खनन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है।
जनता के बीच इस मुद्दे को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया है। कुछ नागरिकों का मानना है कि संशोधन से खनन क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा और रोजगार मिलेगा, जबकि अन्य को आशंका है कि इससे प्राकृतिक संसाधनों का दोहन तेज होगा और पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा।
अंत में, एमएमडीआर संशोधन पर राजनीतिक घमासान तेज होने के आसार हैं। दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ जनता के बीच जा रहे हैं। देखना होगा कि इस मुद्दे का असर झारखंड की राजनीति पर कितना पड़ता है।

