
सेवा भारती और तुलसी भवन ने 150 जरूरतमंद बच्चों संग मनाई स्नेहोत्सव दीपावली, बांटे दीये, मिठाई और पटाखे के माध्यम से सामाजिक सद्भाव और मानवता की एक अनूठी मिसाल कायम की गई है। जमशेदपुर के बागबेड़ा में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम का उद्देश्य उन घरों में रोशनी पहुंचाना था, जहाँ अभाव के कारण अंधेरा छाया रहता है।
सेवा भारती और तुलसी भवन ने 150 जरूरतमंद बच्चों संग मनाई स्नेहोत्सव दीपावली
राष्ट्र संवाद संवाददाता, जमशेदपुर। ‘चलो जलाएं दीप वहां, जहां अभी भी अंधेरा है’ के पावन संदेश के साथ सिंहभूम जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन (तुलसी भवन) ने सेवा भारती के सहयोग से बागबेड़ा स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में दीपावली स्नेहोत्सव मिलन समारोह का भव्य आयोजन किया। इस कार्यक्रम में समाज के वंचित वर्ग के बच्चों के साथ दीपावली की खुशियां साझा की गईं।
इस अवसर पर सेवा भारती के बाल संस्कार केंद्रों से आए लगभग 150 बच्चों के बीच दीया-बत्ती, शुद्ध तेल, स्वादिष्ट मिठाई और सुरक्षित पटाखों का वितरण किया गया। उपहार पाकर बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे। कार्यक्रम का वातावरण पूरी तरह से दीपावली के उल्लास और सकारात्मकता से सराबोर रहा।
सांस्कृतिक महत्व और राष्ट्र निर्माण
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता प्रकाश मेहता ने दीपावली के गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वंचित एवं जरूरतमंद समाज की सेवा करना ही राष्ट्र निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण और बुनियादी आधार है। उन्होंने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि ‘नर सेवा ही नारायण सेवा है’ और हमें अपने आसपास के जरूरतमंदों की मदद के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए।
तुलसी भवन के मानद महासचिव डॉ. प्रसेनजीत तिवारी की अध्यक्षता में आयोजित इस समारोह में कई प्रमुख साहित्यकारों और प्रबुद्धजनों ने भाग लिया। इनमें साहित्यकार यमुना तिवारी ‘व्यथित’, कैलाश नाथ शर्मा ‘गाजीपुरी’, डॉ. उदय प्रताप ‘हयात’ और सूरज सिंह राजपूत की उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। इन साहित्यकारों ने अपनी कविताओं और प्रेरक गीतों के माध्यम से बच्चों में उत्साह का संचार किया और उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
सामाजिक सहभागिता और भविष्य की दिशा
इस मिलन समारोह में सेवा भारती के अनेक समर्पित पदाधिकारी, शिक्षिकाएं एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सभी ने एक साथ मिलकर बच्चों के साथ दीप जलाए और मिठाई बांटी। यह आयोजन केवल एक रस्म नहीं थी, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का एक प्रयास था।
कार्यक्रम के अंत में सभी ने एकजुट होकर समाज के अंतिम पायदान पर खड़े बच्चों के उत्थान के लिए संकल्प लिया। इस तरह के आयोजनों से न केवल बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है, बल्कि समाज में भी एक सकारात्मक संदेश जाता है कि त्यौहार खुशियां बांटने का नाम है।
- आयोजन स्थल: सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, बागबेड़ा।
- सहयोग: सेवा भारती एवं तुलसी भवन।
- लाभार्थी: 150 बाल संस्कार केंद्र के बच्चे।
- मुख्य संदेश: नर सेवा ही नारायण सेवा।
इस दीपावली मिलन समारोह ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि समाज के प्रबुद्धजन और संस्थाएं हाथ मिलाएं, तो जरूरतमंद बच्चों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। डॉ. प्रसेनजीत तिवारी ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों को निरंतर जारी रखने का आश्वासन दिया। यह एक यादगार शाम थी जो सभी के दिलों में खुशियां छोड़ गई।

