
लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
विद्यालय में छात्राओं ने बिखेरे कला और लोक संस्कृति के रंग, इस विषय को केंद्र में रखते हुए बेगूसराय के राजकीयकृत श्रीदुर्गा प्लस टू विद्यालय मेघौल में एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शनिवार को आयोजित इस विशेष समारोह में छात्राओं ने अपनी अद्भुत कलात्मक प्रतिभा और लोक संस्कृति के प्रति अपने गहरे लगाव का शानदार प्रदर्शन किया। विद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल छात्राओं के आत्मविश्वास को बढ़ाया, बल्कि उन्हें अपनी जड़ों से जुड़ने का एक अनूठा अवसर भी प्रदान किया।
विद्यालय में छात्राओं ने बिखेरे कला और लोक संस्कृति के रंग
कार्यक्रम के दौरान आयोजित विभिन्न सांस्कृतिक एवं रचनात्मक गतिविधियों में मीनाक्षी, प्रियांशी, ज्योति, सरस्वती, मधु भारती, जूली भारती, मायूसी रानी, अर्चना एवं प्रियांशु राज की टीम ने लोक संगीत प्रतियोगिता में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई। इन छात्राओं ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया। इस दौरान माहौल पूरी तरह से पारंपरिक गीतों की धुन से सराबोर रहा।
विशेष रूप से, लोक संगीत प्रतियोगिता के मंच पर छठ गीतों के साथ-साथ मैथिली और बिहार के पारंपरिक लोक गीतों की धूम रही। संगीत शिक्षक उमेश कुमार शर्मा एवं घनश्याम महतो के कुशल निर्देशन में छात्राओं ने अपनी गायकी से यह सिद्ध कर दिया कि वे आधुनिकता के साथ-साथ अपनी लोक कला को भी बखूबी संजोए हुए हैं।
प्रतियोगिताओं का विवरण और विजेता
इस सांस्कृतिक उत्सव में कई प्रकार की रचनात्मक प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिनमें छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया:
- श्यामपट्ट पेंटिंग प्रतियोगिता: इस रचनात्मक प्रतियोगिता में मीनाक्षी कुमारी ने अपनी कलाकारी का प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया।
- रंगोली प्रतियोगिता: इस रंग-बिरंगी प्रतियोगिता में अस्मिता, अभिलाषा, राजनंदिनी, चांदनी एवं हसीना खातून की टीम ने अपनी बेहतरीन कला से प्रथम स्थान हासिल किया।
- मेरी लाडो मेरी लक्ष्मी प्रतियोगिता: इसमें भारती कुमारी, अंकिता, प्रियम, इक्षा, मीनाक्षी एवं मुस्कान की टीम ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया, जबकि अमिषा एवं श्वेता की टीम तीसरे स्थान पर रही।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक मधुसूदन पासवान ने छात्राओं की प्रतिभा की मुक्त कंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने जोर दिया कि रचनात्मकता और अपनी लोक संस्कृति से जुड़ाव ही भविष्य की नींव को मजबूत करता है। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित किया गया और भविष्य में भी ऐसी सक्रिय भागीदारी बनाए रखने का आग्रह किया गया। विद्यालय के शिक्षकों और अभिभावकों ने भी छात्राओं के उत्साह को देखकर गर्व महसूस किया और इस आयोजन को एक सफल प्रयास बताया।

