
स्वर्गीय निर्भय सिंह के निधन पर सूर्य मंदिर का दीपोत्सव कार्यक्रम रद्द कर दिया गया है, जिसने पूरे जमशेदपुर क्षेत्र में शोक की लहर पैदा कर दी है। सूर्य मंदिर समिति ने यह अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय लिया है कि उनके आकस्मिक निधन के पश्चात किसी भी प्रकार के उत्सव का आयोजन करना उचित नहीं है। समिति के मुख्य संरक्षक एवं पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के दिशा-निर्देशों का पूरी निष्ठा के साथ पालन करते हुए यह निर्णय लिया गया है।
स्वर्गीय निर्भय सिंह के निधन पर सूर्य मंदिर का दीपोत्सव कार्यक्रम रद्द करने के पीछे के कारण
राष्ट्र संवाद संवाददाता द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह फैसला बहुत ही भावुक और संवेदनशील स्थिति में लिया गया है। सूर्य मंदिर समिति का मानना है कि ऐसे समय में जब समाज का एक प्रतिष्ठित व्यक्ति हमारे बीच नहीं रहा, तो मंदिर परिसर में होने वाला भव्य दीपोत्सव कार्यक्रम स्थगित करना ही मानवीय धर्म है। स्वर्गीय निर्भय सिंह के प्रति गहरा सम्मान प्रकट करते हुए समिति के सभी पदाधिकारियों ने इस शोक की घड़ी में एक जुटता दिखाई है।
परंपराओं का पालन और श्रद्धांजलि
यद्यपि दीपोत्सव का भव्य कार्यक्रम रद्द किया गया है, फिर भी मंदिर की मर्यादा और परंपराओं को बनाए रखने के लिए समिति ने एक मध्यम मार्ग चुना है। मंदिर के पुजारियों द्वारा भगवान के द्वार पर प्रतीकात्मक रूप से दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। यह सुनिश्चित किया गया है कि धर्म का अनुष्ठान बिना किसी उत्सव के माहौल के पूरी शालीनता से संपन्न हो।
- शोक की लहर: जमशेदपुर के स्थानीय निवासियों ने भी इस निर्णय की सराहना की है।
- रघुवर दास का नेतृत्व: पूर्व मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में समिति अपने सभी कार्यों का संचालन करती है।
- श्रद्धांजलि: मंदिर समिति ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की है।
मंदिर प्रबंधन का यह स्पष्ट संदेश है कि समुदाय की भावनाएं और संस्कार किसी भी उत्सव से अधिक महत्वपूर्ण हैं। इस संकट की घड़ी में समिति ने जनता से अपील की है कि वे शांति बनाए रखें। मंदिर के भीतर और आसपास किसी भी प्रकार की नारेबाजी या उत्सव संबंधी क्रियाकलाप पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिए गए हैं।
स्थानीय स्तर पर स्वर्गीय निर्भय सिंह के योगदान को याद करते हुए समिति के सदस्यों ने बताया कि वे न केवल एक नेक इंसान थे, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी हमेशा बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। उनके जाने से क्षेत्र में एक ऐसा शून्य उत्पन्न हुआ है जिसे भर पाना अत्यंत कठिन है।
समिति की बैठक में यह भी चर्चा की गई कि भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करते समय विशेष सावधानियां बरती जाएंगी। वर्तमान में, सारा ध्यान केवल दिवंगत आत्मा के सम्मान और उनकी स्मृति को समर्पित है। भगवान सूर्य के चरणों में प्रार्थना की गई है कि वे उनके परिवार को इस अपार दुख को सहने की शक्ति प्रदान करें।
अंततः, इस निर्णय के माध्यम से सूर्य मंदिर समिति ने समाज के सामने एक उदाहरण पेश किया है कि किस प्रकार संकट के समय में एक संगठित संस्था को जिम्मेदारी का परिचय देना चाहिए। जमशेदपुर के सभी निवासियों से अनुरोध है कि वे इस कठिन समय में मंदिर समिति के निर्णय का पूर्ण समर्थन करें।

