लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
जिले के कुकडू प्रखंड अंतर्गत पांडरा गांव में वज्रपात ने दो परिवारों की खुशियां छीन लीं। करीब दो बजे आकाशीय बिजली की चपेट में आने से दो महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसर गया।
पांडरा गांव में वज्रपात: घटना का विवरण
मृतकों की पहचान पांडरा गांव निवासी 46 वर्षीय सोना मनी महतो, पति आशीर्वाद महतो तथा 27 वर्षीय मुक्ता महतो, पति पुईतु महतो के रूप में की गई है। बताया जाता है कि दोनों महिलाएं बारिश के दौरान खेत अथवा घर के आसपास मौजूद थीं। इसी बीच तेज गर्जना के साथ अचानक वज्रपात हुआ और दोनों महिलाएं इसकी चपेट में आ गईं। आकाशीय बिजली की चपेट में आने से दोनों गंभीर रूप से झुलस गईं और उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई।
ग्रामीणों में अफरातफरी, प्रशासन ने शुरू की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही गांव में अफरातफरी मच गई। ग्रामीण मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक दोनों महिलाओं की मौत हो चुकी थी। सूचना मिलने पर स्थानीय प्रशासन की टीम भी गांव पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए सरायकेला सदर अस्पताल भेज दिया गया है।
वज्रपात से बचाव के लिए प्रशासन की अपील
थाना प्रभारी कौशल कुमार ने कहा, “वज्रपात के दौरान खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों के आसपास खड़े होने से बचना चाहिए।” प्रशासन ने भी लोगों से खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है।
वज्रपात सुरक्षा दिशानिर्देश
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के अनुसार, वज्रपात के दौरान निम्नलिखित सावधानियां बरतनी चाहिए:
- खुले मैदान, ऊंचे पेड़ और बिजली के खंभों से दूर रहें।
- धातु की वस्तुओं और पानी के स्रोतों से दूर रहें।
- मजबूत छत वाले भवन में शरण लें।
- यदि बाहर फंसे हों, तो पैरों को जोड़कर उकड़ूं बैठ जाएं और कान बंद कर लें।
अधिक जानकारी के लिए NDMA की आधिकारिक वेबसाइट देखें।
पीड़ित परिवारों को मुआवजा और सहायता
राज्य सरकार की ओर से वज्रपात पीड़ितों के परिजनों को 4 लाख रुपये का मुआवजा देने का प्रावधान है। स्थानीय प्रशासन ने पीड़ित परिवारों को तत्काल सहायता पहुंचाने का आश्वासन दिया है। सरायकेला-खरसावां जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन विभाग को रिपोर्ट भेज दी है।
मौसम पूर्वानुमान और चेतावनी प्रणाली
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी चेतावनी के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों तक जानकारी समय पर नहीं पहुंच पाती। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्राम पंचायत स्तर पर अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने से ऐसी घटनाओं में कमी आ सकती है।
वज्रपात के वैज्ञानिक कारण और बचाव के उपाय
वज्रपात एक प्राकृतिक घटना है जिसमें बादलों में विद्युत आवेश का निर्माण होता है और यह पृथ्वी की ओर प्रवाहित होता है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के अनुसार, भारत में प्रतिवर्ष 2,000 से अधिक लोग वज्रपात के कारण अपनी जान गंवाते हैं। झारखंड जैसे राज्यों में मानसून के दौरान यह खतरा बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लाइटनिंग अरेस्टर और अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित किए जाने चाहिए। इसके अलावा, लोगों को मौसम ऐप्स और सरकारी अलर्ट सेवाओं से जुड़े रहने की सलाह दी जाती है।
- मौसम खराब होने पर तुरंत पक्के मकान में शरण लें।
- पेड़, बिजली के खंभे, टावर और धातु की संरचनाओं से दूर रहें।
- पानी के स्रोतों जैसे तालाब, नदी, कुएं से दूर रहें।
- मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग न करें।
- यदि कोई सुरक्षित स्थान न हो, तो पैरों को जोड़कर, सिर को घुटनों के बीच रखकर उकड़ूं बैठ जाएं।
- समूह में न खड़े हों, व्यक्तियों के बीच कम से कम 15 फीट की दूरी बनाए रखें।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन करके वज्रपात से होने वाली जनहानि को काफी हद तक कम किया जा सकता है। राज्य सरकारों को भी ग्राम पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है।

