भारतीय खाद्य संस्कृति के महत्व पर बात करते हुए अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के महिला आयाम के द्वारा विचार गोष्ठी का आयोजन
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अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत झारखंड प्रांत के महिला आयाम के द्वारा आज सोनारी में उपाध्यक्ष श्रीमती कृष्णा सिन्हा जी के आवास पर एक बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में विचार गोष्ठी के अंतर्गत परिवार के बच्चों में भारतीय खाद्य संस्कृति के संस्कार डालने की बात की गई और साथ ही सबों को पाश्चात्य खाद्य संस्कृति के दुष्परिणामों से भी अवगत कराया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रचार-प्रसार टोली की सदस्य डॉली परिहार जी ने ग्राहक गीत गाकर किया । तत्पश्चात माँ भारती के चित्र पर अर्पित किया गया और दीप प्रज्वलन संपन्न हुआ। विषय प्रवेश किया पूर्वी सिंहभूम की उपाध्यक्ष श्रीमती कृष्णा सिन्हा जी ने। इन्होंने कहा कि हम महिलाओं को सबसे पहले हमारी जो मूल प्रवृति है सात्विक भोजन की , हम उस को अपने परिवार में अवश्य प्रयोग करें ।
स्वागत भाषण देते हुए महिला आयाम की प्रमुख श्रीमती सरिता सिंह जी ने कहा कि भारतीय खाद्य को अपनाना बुद्धिमानी है क्योंकि यह स्वास्थ्य संबधी कई गुणों से भरपूर है।
भारतीय खाद्य संस्कृति की विशेषता और उसके प्रयोग पर बल देते हुए डॉक्टर अनीता शर्मा जी ने कहा कि कोविड के दौरान सारे विश्व ने भारतीय खाद्य संस्कृति का अनुपालन किया है । इसकी गुणवत्ता वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्रमाणित है और भारतीय खाद्य पदार्थ भारत की जलवायु के भी अनुरूप – अनुकूल है।
सदस्य रूबी लाल जी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि बच्चों को जब हम भारतीय संस्कृति को स्वीकार करने के लिए प्रेरित करेंगे तो स्वाभाविक तौर पर भारतीय खाद्य संस्कृति भी अपना लेंगे।
समाजसेवी सुष्मिता जी ने कहा कि यदि हम बच्चों में सूर्य नमस्कार और योग मेडिटेशन की समझ डालेंगे तो उन्हें जिम जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और न ही मोटापे की समस्या होगी। विधि आयाम प्रमुख रवि प्रकाश जी ने कहा कि महिलाओं को स्वयं भी जागरूक होना पड़ेगा तभी परिवार के लोगों में भी भारत की भोजन परंपरा के प्रति रूझान बढ़ेगी। रीना जी ने कहा कि भारत की जो खाद्य वस्तुएं हैं वो सात्विक विचार को बढ़ाते हैं जबकि पाश्चात्य खाद्य पदार्थ मन और तन पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।
संचालन और धन्यवाद ज्ञापन किया प्रांत सचिव डॉक्टर कल्याणी कबीर ने।
कार्यक्रम में विधि आयाम प्रमुख रवि प्रकाश सिंह, समाजसेवी सुष्मिता, रीना जी की भी गरिमामयी उपस्थिति रही और इन्होंने भी अपने विचार साझा किया ।

