लेखक: महेन्द्र तिवारी
बढ़ाता है। नींद प्रभावित होती है और कार्यक्षमता कम हो जाती है। मजदूर वर्ग और गरीब परिवारों पर इसका प्रभाव सबसे अधिक पड़ता है क्योंकि उनके पास गर्मी से बचने के पर्याप्त साधन नहीं होते।
भारत में हीटवेव अब केवल मौसमी घटना नहीं रह गई है बल्कि यह राष्ट्रीय चुनौती बनती जा रही है। तेजी से बदलते मौसम संकेत दे रहे हैं कि आने वाले वर्षों में हमें और कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए केवल सरकारी उपाय पर्याप्त नहीं होंगे बल्कि समाज के हर वर्ग को पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और ऊर्जा बचत के प्रति गंभीर होना होगा। पेड़ लगाना, जल स्रोतों को बचाना, प्रदूषण कम करना और टिकाऊ जीवनशैली अपनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है।
यह भी सच है कि प्रकृति बार बार चेतावनी देती है लेकिन मानव समाज अक्सर उसे नजरअंदाज कर देता है। आज उत्तर भारत की झुलसती धरती और 45 डिग्री से ऊपर पहुंचता तापमान इसी चेतावनी का संकेत है। यदि अभी भी पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी नहीं दिखाई गई तो आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन और कठिन हो सकता है। हीटवेव केवल मौसम की खबर नहीं बल्कि भविष्य का गंभीर संदेश है जिसे समझना और उस पर कार्य करना अब अनिवार्य हो गया है।

