*करवा चौथ पर चांद की ‘नो एंट्री’, बादल बने प्रेम कहानी के विलेन!
*छलनी लिये सुहागिनों की प्रतीक्षा जारी, पतियों की नजर आसमान पर, चांद की एक झलक के लिए दिल हुआ जा रहा है छलनी*
मृत्युंजय बर्मन
राष्ट्र संवाद संवाददाता, सरायकेला
आज करवा चौथ है, लेकिन आसमान का सस्पेंस किसी फिल्मी क्लाइमेक्स से कम नहीं। सुहागिनों ने सोलह शृंगार कर लिया, पूजा की थाली सजा ली और छलनी भी तैयार है। बस इंतजार है उस चांद का, जिसके दर्शन के बाद ही व्रत खोलने की रस्म पूरी होगी। मगर बादल साहब बीच में विलेन बनकर खड़े हो गए हैं।
सुहागिनों की शिकायत है कि साल में एक दिन चांद को समय पर निकलने में आखिर परेशानी क्या है? उधर, पतियों की हालत भी कम दिलचस्प नहीं। दिनभर ऑफिस और बाजार के काम निपटाने वाले पति अब मौसम विभाग के अनौपचारिक विशेषज्ञ बन गए हैं। हर कुछ मिनट पर आसमान देखते हैं, फिर मोबाइल में मौसम का हाल खंगालते हैं। बादल हटते दिखें तो चेहरे पर उम्मीद, फिर चांद छिपे तो मायूसी! सुहागिनों के हाथ में छलनी और बादलों से ढंपे चांद से पुरुषों का दिल छलनी हुए जा रहा है।
कहावत है कि इश्क और मुश्क छिपाए नहीं छिपते, मगर आज चांद बादलों में छिपा बैठा है। करवा चौथ की इस रात में असली परीक्षा प्रेम की नहीं, धैर्य की है। अब देखना यह है कि चांद पहले दर्शन देता है या बादल अपनी जिद छोड़ते हैं। फिलहाल, सुहागिनों की प्रार्थना एक ही है: हे चांद देव, अब ज्यादा फिल्मी सस्पेंस मत बढ़ाइए!

