मानगो नगर निगम चुनाव: ‘सुधा गुप्ता बनाम चार’ 44 की सीधी जंग शक्ति प्रदर्शन ने बदली तस्वीर, मुकाबला हुआ स्पष्ट
देवानंद सिंह
मानगो नगर निगम के मेयर चुनाव में अब राजनीतिक तस्वीर काफी हद तक साफ होती दिख रही है। हाल के दिनों में हुए शक्ति प्रदर्शन और रैलियों के बाद मुकाबला धीरे-धीरे “सुधा गुप्ता बनाम चार” के रूप में सिमटता नजर आ रहा है। जहां एक ओर प्रत्याशी सुधा गुप्ता संगठनात्मक मजबूती और व्यापक जनसमर्थन के साथ मुख्य दावेदार के रूप में उभर रही हैं, वहीं अन्य चार प्रत्याशी संयुक्त रूप से उन्हें चुनौती देने की स्थिति में दिखाई दे रहे हैं।
सुधा गुप्ता ने समर्थकों के साथ भव्य रैली निकालकर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। उनके साथ पार्टी कैडर, वार्ड स्तर के कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में महिला समर्थक मौजूद रहे। रैली में दिखी अनुशासित भीड़ और उत्साह ने यह संकेत दिया कि उनका संगठनात्मक आधार मजबूत है।
अन्य प्रत्याशियों की सक्रियता, पर केंद्र में सुधा
संध्या सिंह, कुमकुम श्रीवास्तव और जेवा खान ने भी रोड शो और जनसंपर्क के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। जेवा खान ने अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में सक्रियता दिखाई, जिससे चुनावी मुकाबला रोचक हुआ है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी बहस और जनचर्चा का केंद्र फिलहाल सुधा गुप्ता ही बनी हुई हैं।
‘44 बनाम 4’ की चर्चा और संगठनात्मक समीकरण
चुनाव के बीच भाजपा के अंदर “44 बनाम 4” की चर्चा भी सियासी गलियारों में गर्म है। इसे संगठन के भीतर असंतोष और गुटीय खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि वरिष्ठ नेताओं की सक्रियता और शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी ने इन अटकलों को काफी हद तक संतुलित करने का प्रयास किया है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, राज्य मंत्री संजय सेठ, भाजपा के राष्ट्रीय नेता अरुण सिंह और आदित्य साहू जैसे नेताओं की उपस्थिति ने कार्यकर्ताओं में उत्साह भरा है।
मुस्लिम और ब्रह्मर्षि वोट की भूमिका अहम
इस चुनाव में मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है। जेवा खान की सक्रियता से अल्पसंख्यक वोटों में हलचल जरूर है, लेकिन पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता के प्रभाव और व्यक्तिगत समीकरणों के कारण मुस्लिम मतदाताओं का एक वर्ग सुधा गुप्ता की ओर झुकता नजर आ रहा है।
वहीं ब्रह्मर्षि (भूमिहार) समाज का परंपरागत झुकाव भाजपा की ओर माना जाता रहा है। हालिया बैठकों में इस समाज के प्रतिनिधियों द्वारा सुधा गुप्ता को समर्थन देने की घोषणा ने उनकी स्थिति को और मजबूत किया है। सुधा गुप्ता की सादगी, सहज उपलब्धता और जमीनी संपर्क ने भी मतदाताओं को प्रभावित किया है।
प्रतिष्ठा की लड़ाई बना चुनाव
कुल मिलाकर मानगो नगर निगम चुनाव अब प्रतिष्ठा की लड़ाई का रूप ले चुका है। एक ओर संगठनात्मक रूप से मजबूत और जनसमर्थन जुटाती सुधा गुप्ता हैं, तो दूसरी ओर चार प्रत्याशियों की चुनौती और अंदरूनी समीकरणों की चर्चा। इन सबके बीच चुनाव बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है।
अब अंतिम निर्णय मतदाताओं के हाथ में है कि मानगो नगर निगम की सत्ता की चाबी किसे सौंपी जाएगी। फिलहाल चुनावी माहौल और जनरुझान को देखते हुए सुधा गुप्ता मजबूत स्थिति में नजर आ रही हैं।

