Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » यूसीआईएल में प्रशासनिक फैसलों पर उठे गंभीर सवाल, अंदरूनी हलकों में बढ़ी बेचैनी
    झारखंड सरायकेला-खरसावां

    यूसीआईएल में प्रशासनिक फैसलों पर उठे गंभीर सवाल, अंदरूनी हलकों में बढ़ी बेचैनी

    Aman OjhaBy Aman OjhaMay 4, 2026No Comments3 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    राकेश कुमार के कार्यशैली यूसिल के लिए हो रहा है घातक साबित

     

    राष्ट्र संवाद संवाददाता 

     

    झारखंड से लेकर देशभर में रणनीतिक महत्व रखने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई यूसीआईएल इन दिनों अपने ही प्रशासनिक फैसलों को लेकर सवालों के घेरे में आ गई है। डिपार्टमेंट ऑफ़ एटॉमिक एनर्जी के अधीन संचालित इस अहम उपक्रम में हाल के महीनों में लिए गए निर्णयों ने संगठन के भीतर असंतोष और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। सूत्रों और अंदरूनी चर्चाओं के अनुसार, सीएमडी डॉ . कंचम आनंदा राव के कार्यभार संभालने के बाद कई ऐसे फैसले सामने आए हैं, जिनसे प्रशासनिक पारदर्शिता, संतुलन और नीति अनुपालन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    तकनीकी पदों पर गैर तकनीकी तैनाती, नीति पर सवाल

    सबसे बड़ा मुद्दा खनन इंजीनियर राकेश कुमार की आईआर (कार्मिक एवं औद्योगिक संबंध) विभाग में तैनाती को लेकर उठ रहा है। जबकि यूसीआईएल पहले से ही रोहिल (राजस्थान), जादूगोड़ा विस्तार, तुम्मलापल्ले और गोगी जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं में तकनीकी विशेषज्ञों की कमी से जूझ रही है, ऐसे में एक अनुभवी खनन इंजीनियर को गैर-तकनीकी विभाग में भेजना कई सवाल खड़े कर रहा है।

    अंदरूनी अधिकारियों का साफ कहना है कि यह निर्णय कंपनी की एचआर नीति और विशेषज्ञता-आधारित तैनाती के सिद्धांतों के विपरीत नजर आता है। इसी तरह डॉ. पी. के. ताम्राकर को विभागाध्यक्ष ( सी आर एन्ड डी ) के साथ-साथ सीएमडी के तकनीकी सलाहकार की अतिरिक्त जिम्मेदारी देना भी चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। संगठन के अंदर यह सवाल उठ रहा है कि क्या एक ही अधिकारी को इतनी अहम दोहरी भूमिका देना जवाबदेही और पारदर्शिता के मानकों के अनुरूप है?

    उच्च पदों पर चयन प्रक्रिया भी घेरे में

    महाप्रबंधक (सिविल) आर. के. मिश्रा के आवेदन को निदेशक (तकनीकी) पद के लिए आगे बढ़ाए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं। कई वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि इस प्रक्रिया में पात्रता और मानकों की अनदेखी की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    सूत्रों के अनुसार, कार्यकाल के शुरुआती महीनों में बगजाता, नरवापहाड़, तुरामडीह, मोहुलडीह और रोहिल जैसी महत्वपूर्ण इकाइयों का दौरा सीमित रहा है। जबकि ये सभी यूनिट यूसीआईएल की रीढ़ मानी जाती हैं, ऐसे में शीर्ष नेतृत्व की फील्ड स्तर पर कम मौजूदगी को लेकर कर्मचारियों के बीच असंतोष बढ़ रहा है।कर्मचारियों और संयुक्त यूनियन का कहना है कि जमीनी स्तर की समस्याओं को समझे बिना लिए गए फैसले लंबे समय में परियोजनाओं को प्रभावित कर सकते हैं। यह भी सामने आ रहा है कि कई अहम प्रशासनिक फैसले सीमित स्तर पर लिए जा रहे हैं, जबकि महाप्रबंधकों और कार्यकारी निदेशकों जैसे अनुभवी अधिकारियों से पर्याप्त परामर्श नहीं किया जा रहा। इससे संगठन के भीतर समन्वय और विश्वास दोनों पर असर पड़ रहा है।

    इन सभी घटनाओं के बाद संगठन के अंदर से ही यह मांग उठने लगी है कि डिपार्टमेंट ऑफ़ एटॉमिक एनर्जी के सतर्कता तंत्र के तहत इन मामलों की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए। कर्मचारियों संयुक्त यूनियन और विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो इसका सीधा असर यूसीआईएल की रणनीतिक परियोजनाओं और देश के परमाणु ईंधन कार्यक्रम पर पड़ सकता है। यूसीआईएल जैसे संवेदनशील और रणनीतिक संस्थान में प्रशासनिक फैसलों पर उठते सवाल केवल आंतरिक मामला नहीं रह जाते  यह देश की ऊर्जा सुरक्षा से भी जुड़ा विषय बन जाता है। ऐसे में अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या शीर्ष स्तर पर इन संकेतों को गंभीरता से लिया जाएगा या हालात और बिगड़ेंगे।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous ArticleUser Report: Navigating Bonuses and Offers at Playluck Casino
    Next Article रिप्लांटेशन के नाम पर जंगल उजाड़ने का आरोप, जिंदल कंपनी पर वन सुरक्षा समिति का फूटा गुस्सा

    Related Posts

    खेती से लेकर पशुपालन तक, योजनाओं की रफ्तार बढ़ाने का निर्देश

    October 24, 2026

    सड़क निर्माण में गुणवत्ता से समझौता नहीं हो : कान्हु मुर्मू

    October 24, 2026

    *फल दुकान में घुसा पुट्टी लदा ट्रक, पेड़ से टकराकर रुका

    October 24, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    ड्रग माफिया का सपना चकनाचूर! नालासोपारा से तेलंगाना तक फैला नेटवर्क ध्वस्त, 70 किलो MD ड्रग्स जब्त!

    वोट चोरी का शोर और लोकतंत्र की असली चुनौती

    अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दिवस (25 अक्टूबर) पर विशेष

    एक व्हाट्सएप चैट,स्क्रीनशॉट हत्या का आरोप और सुप्रीम कोर्ट का फैसला! -हत्या के केस में फैसले ने बढ़ा

    सीबीआई की बड़ी कार्रवाई! मुंबई की कंपनी पर ₹212 करोड़ का बैंक फ्रॉड केस, डायरेक्टर्स के घरों पर छापे

    खेती से लेकर पशुपालन तक, योजनाओं की रफ्तार बढ़ाने का निर्देश

    सड़क निर्माण में गुणवत्ता से समझौता नहीं हो : कान्हु मुर्मू

    *फल दुकान में घुसा पुट्टी लदा ट्रक, पेड़ से टकराकर रुका

    मधुआबेड़ा में कोजागरी लक्ष्मी पूजा की तैयारियां पूरी

    जादूगोड़ा में पहली बार विजया मिलन समारोह, सभी पूजा समितियां सम्मानित

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.