हूलॉक गिब्बन (होलौ बंदर) के साथ तिनसुकिया के बारेकुरी निवासियों के आत्मीय संबंधों का वीडियो मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर किया साझा।
संवाददाता: मनीषा शर्मा, असम (गुवाहाटी)
उत्साहित हुए क्षेत्र के लोग; दीप्ति बोरा ने कहा—”मुख्यमंत्री के दिल में भी है होलौ के प्रति गहरा प्रेम”
तेजपुर से चंदन शर्मा ने बताया कि,
आदिम मानव के रूप में पहचाने जाने वाले हूलॉक गिब्बन (होलौ बंदर) का एक हृदयस्पर्शी और अद्भुत वीडियो मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा द्वारा अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर अपलोड किए जाने के बाद ऊपरी असम के एक गाँव के निवासियों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।
व्यावसायिक शहर तिनसुकिया से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित बारेकुरी क्षेत्र की एक महिला द्वारा पेड़ से चार होलौ बंदरों को बुलाकर केला खिलाने का वीडियो साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने लिखा—”यह दृश्य हमारी संस्कृति की गहरी सहृदयता और प्रकृति के साथ हमारे आत्मीय संबंधों को दर्शाता है।” मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा द्वारा गाँव वालों के होलौ बंदरों के प्रति इस अनूठे प्रेम की सराहना किए जाने से पूरा गाँव आनंदित है।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने प्रसिद्ध कार्यक्रम ‘मन की बात’ के माध्यम से बारेकुरी के निवासियों और वहाँ के हूलॉक गिब्बन के अनूठे संबंधों की खुलकर प्रशंसा की थी।
जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री द्वारा अपलोड किए गए वीडियो में बारेकुरी के ताराजान गाँव की दीप्ति बोरा नामक महिला होलौ बंदरों को प्यार से केले खिलाती नजर आ रही हैं। बारेकुरी के निवासियों को हूलॉक गिब्बन के प्रति अपने पालतू जीवों जैसा निस्वार्थ स्नेह और संरक्षण प्रदान करने के लिए पहले ही ‘असम गौरव पुरस्कार’ से सम्मानित किया जा चुका है।
वीडियो में नजर आ रहीं दीप्ति बोरा ने अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हुए कहा, “यह वीडियो इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि बारेकुरी के इन होलौ बंदरों से केवल यहाँ के निवासी ही नहीं, बल्कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा भी बेहद प्यार करते हैं।”
गौरतलब है कि तिनसुकिया जिले का बारेकुरी क्षेत्र दुर्लभ हूलॉक गिब्बन और इंसानों के बीच अद्भुत और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। वर्तमान में बारेकुरी हूलॉक गिब्बन के कारण एक प्रमुख ग्रामीण पर्यटन केंद्र के रूप में उभर रहा है। 21 गाँवों से बने वृहत्तर बारेकुरी क्षेत्र के पाँच परिवारों (समूहों) में कुल 22 हूलॉक गिब्बन निवास करते हैं। हाल के दिनों में यहाँ रोजाना देश-विदेश से पर्यटक, शोधकर्ता और डॉक्यूमेंट्री निर्माता बड़ी संख्या में पहुँच रहे हैं।
यहाँ के ग्रामीण होलौ बंदरों को अपने परिवार के सदस्य की तरह मानते हैं और उनके पसंदीदा फल जैसे केले और अन्य फलदार वृक्ष अपनी बाड़ियों में उगाते हैं। मुख्यमंत्री द्वारा साझा किए गए वीडियो में दिख रहीं दीप्ति बोरा की तरह बारेकुरी का प्रत्येक नागरिक एक समर्पित पर्यावरणविद की भांति सेवा कर रहा है। कई बार खुद खाने से पहले वे इन बंदरों को फल खिलाना अपना पहला कर्तव्य मानते हैं।
दीप्ति बोरा पेशे से एक आशा (ASHA) कार्यकर्ता हैं। शारीरिक रूप से अस्वस्थ होने के बावजूद वे होलौ बंदरों, वन्यजीवों और पर्यावरण संरक्षण के कार्यों में पूरी निष्ठा से जुटी हुई हैं। उन्होंने अपने घर के आँगन में व्यक्तिगत प्रयासों से एक हरा-भरा प्राकृतिक माहौल तैयार किया है। हालांकि, बारेकुरी के जागरूक नागरिकों का मानना है कि सरकार, पर्यटन विभाग और वन विभाग को इस क्षेत्र के विकास और संरक्षण के लिए जितनी तेजी से कदम उठाने चाहिए थे, उसमें कहीं न कहीं कुछ ढिलाई अवश्य बरती जा रही है।

