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    Home » मेरी पहचान :डॉक्टर कल्याणी कबीर
    साहित्य

    मेरी पहचान :डॉक्टर कल्याणी कबीर

    Devanand SinghBy Devanand SinghMarch 14, 2019No Comments2 Mins Read
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    हिन्दी भाषा की कलम थामे उम्दा साहित्य का सृजन करने में लगी प्रसिद्धसाहित्यकार ,रामधारी सिंह दिनकर के पद चिन्हों पर चलने वाली कवित्री शिक्षाविद , समाज सेविका के साथ साथ सोशल मीडिया के माध्यम से हिंदी कविता की अलख जगाने वाली डॉक्टर कल्याणी कबीर |
    यह जानकर आपको आश्चर्य होगा की कबीर की कविताओं को पढ़ने के बाद आप महसूस करेगें कि कविता में दर्द है , प्यार है , संघर्ष है, चुनौती है ,रूमानियत के साथ इंसानियत है गिली धूप काव्य संग्रह में कई साहित्यकारों ने यह विचार व्यक्त करते हुए कहा है कि कबीर की कविताओं में दिल की गहराइयां तक पहुंच पाने की क्षमता है यही कारण है की पत्रकार और पाठक के साथ इनका एक अपना सा रिश्ता बन जाता है
    प्रस्तुत है गीली धूप काव्य संग्रह की एक कविता
    मेरी पहचान
    डॉक्टर कल्याणी कबीर
    मेरी चूड़ी मेरी बिंदी मेरी पहचान है साहिब
    रहे आंचल सदा सर पर यही अरमान है साहिब
    ना कह जंजीर तू इसको, ये है चांदी की एक डोरी,
    मेरे पायल की रुनझुन पे, मुझे गुमान है साहिब
    हमी से जन्म लेते हैं जमीन पे रिश्तों के सरगम,
    मेरी ममता के आंचल में शिशु का गान है साहिब
    मिटा पाना नहीं आसा विदा करके भी यादों को
    अपने बाबुल की बगिया कि हम ऐसी शान है साहिब
    सभी सर को झुकाते हैं सभी माता बुलाते हैं
    वहीं दुर्गा, वही काली की हम संतान हैं साहिब
    मेरे हाथों में है चाबी तुम्हारे दिल के ताले की,
    तुम्हारी नींद भी हम हैं ,तुम्हारी जान है साहिब

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