रोहतक, 29 अप्रैल ! प्रख्यात समाजसेवी, जनचिंतक एवं सामाजिक सरोकारों के सशक्त प्रहरी धर्मबीर नांदल का 23 अप्रैल को 77 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे पिछले लगभग एक दशक से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से संघर्षरत थे, किंतु विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने सामाजिक दायित्वों का निर्वहन निरंतर किया। उनके निधन से हरियाणा सहित उत्तर भारत के सामाजिक जीवन में एक गहरी शून्यता उत्पन्न हो गई है।धर्मबीर नांदल का जन्म 19 दिसम्बर 1948 को रोहतक जिले के गांव बोहर के एक समृद्ध एवं प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। उनके पिता श्री दीवान सिंह समाज में अत्यंत सम्मानित व्यक्ति थे ! उनके दादा चौधरी राजमल उत्तर भारत के एक विख्यात व्यक्तित्व थे और किसान मसीहा दीनबंधु चौधरी छोटूराम के निकट सहयोगी रहे। परिवार की इसी गौरवशाली परंपरा ने धर्मबीर नांदल के व्यक्तित्व को जनसेवा के मूल्यों से ओत-प्रोत किया।
युवावस्था से ही वे सामाजिक एवं राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे। वे युवा जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद पर रहे और युवाओं को संगठित कर राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रेरित किया। उनका पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के साथ अत्यंत निकट संबंध रहा, जिससे उनके राजनीतिक एवं सामाजिक दृष्टिकोण को व्यापक आयाम मिले।
धर्मबीर नांदल नगर भारती के संस्थापक अध्यक्ष रहे। इस संस्था के माध्यम से उन्होंने शहरी समाज के मुद्दों, नागरिक सुविधाओं और जनजागरूकता से संबंधित विषयों पर प्रभावी कार्य किया और जनहित की आवाज को सशक्त रूप से उठाया।इसके साथ ही वे नेशनल टेक्सटाइल बोर्ड के नामित निदेशक के रूप में भी जुड़े रहे, जहां उन्होंने औद्योगिक विकास, नीति-निर्माण और सामाजिक सरोकारों के बीच संतुलन स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सरोज नांदल पत्रकारिता एवं जनसंचार की सेवानिवृत्त प्रोफेसर हैं, जिन्होंने शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। यह परिवार सदैव सामाजिक चेतना, शिक्षा और जनसेवा के मूल्यों का प्रतीक रहा है।
धर्मबीर नांदल का संपूर्ण जीवन सादगी, ईमानदारी और समाज के प्रति समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण रहा। वे हर वर्ग के लोगों के लिए सहज उपलब्ध रहते थे और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सदैव तत्पर रहते थे। उनका व्यक्तित्व प्रेरणादायी था और उनका जीवन समाज सेवा की एक मिसाल के रूप में सदैव स्मरण किया जाएगा।
दिवंगत आत्मा की शांति हेतु प्रार्थना सभा 4 मई को प्रातः 11 बजे नांदल भवन, गांव बोहर (रोहतक) में आयोजित की जाएगी, जिसमें परिजन, मित्रगण, सामाजिक एवं विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित होकर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
उनके निधन पर विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक एवं शैक्षणिक संगठनों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।

