लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
जादूगोड़ा। घाटशिला अनुमंडल में अवैध लॉटरी पर प्रतिबंध के बावजूद मोबाइल और व्हाट्सऐप के माध्यम से ऑनलाइन लॉटरी संचालित किए जाने के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि चाकुलिया समेत आसपास के क्षेत्रों में व्हाट्सऐप ग्रुप और मोबाइल के जरिए नंबर व रेट भेजकर लॉटरी का खेल चलाया जा रहा है।
ऑनलाइन लॉटरी के आरोप और जांच की मांग
स्थानीय स्तर पर राजेश सिंह को इस कथित नेटवर्क से जोड़कर आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए।
नेताओं ने कार्रवाई की मांग की
अवैध लॉटरी और नशे के कारोबार को लेकर भाजपा नेता ऋषि सारंगी तथा जिला परिषद सदस्य टिंकू सिंह उर्फ करण सिंह ने प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। नेताओं का कहना है कि ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है तथा युवाओं पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
उन्होंने पुलिस-प्रशासन से ऑनलाइन माध्यमों की निगरानी बढ़ाने, संदिग्ध गतिविधियों की जांच करने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
नशे के कारोबार पर भी चिंता
जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने क्षेत्र में कथित रूप से बढ़ रहे नशे के कारोबार पर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि लॉटरी और नशे जैसी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पुलिस को जमीनी स्तर के साथ-साथ डिजिटल माध्यमों पर भी निगरानी बढ़ानी चाहिए।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि पुलिस पूरे मामले की जांच कर ऑनलाइन लॉटरी से जुड़े नेटवर्क का पता लगाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करे। अब देखना होगा कि प्रशासन इन शिकायतों पर क्या कदम उठाता है।
कानूनी पहलू और प्रशासनिक चुनौतियां
भारत में लॉटरी का संचालन भारत सरकार के लॉटरी (विनियमन) अधिनियम, 1998 द्वारा शासित होता है। इस अधिनियम के तहत राज्य सरकारों को लॉटरी आयोजित करने का अधिकार है, लेकिन ऑनलाइन माध्यमों से अनधिकृत लॉटरी चलाना गैरकानूनी है। झारखंड राज्य में भी लॉटरी पर प्रतिबंध लागू है, फिर भी डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग जारी है।
पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती व्हाट्सऐप जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म पर नजर रखना है। साइबर सेल को तकनीकी सहायता के साथ-साथ कानूनी अधिकार भी चाहिए ताकि वे संदिग्ध ग्रुप्स की पहचान कर सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल साक्ष्य एकत्र करने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स का गठन जरूरी है।
समाज पर प्रभाव और आगे की राह
ऑनलाइन लॉटरी की लत युवाओं और कम आय वाले परिवारों को कर्ज के जाल में फंसा रही है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जागरूकता अभियान के साथ-साथ काउंसलिंग सेंटर स्थापित किए जाने चाहिए। प्रशासन को चाहिए कि वह न केवल दोषियों पर कार्रवाई करे, बल्कि पीड़ितों के पुनर्वास की भी व्यवस्था करे।
आने वाले दिनों में अगर पुलिस-प्रशासन त्वरित कार्रवाई करता है तो इस अवैध नेटवर्क का भंडाफोड़ हो सकता है। जनता की निगाहें अब प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

