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    Home » UCIL में सरकारी बंगले को लेकर विवाद: पूर्व तकनीकी निदेशक मनोज कुमार पर नियम उल्लंघन के आरोप, नए निदेशक गेस्ट हाउस में रहने को मजबूर
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    UCIL में सरकारी बंगले को लेकर विवाद: पूर्व तकनीकी निदेशक मनोज कुमार पर नियम उल्लंघन के आरोप, नए निदेशक गेस्ट हाउस में रहने को मजबूर

    dhiraj KumarBy dhiraj KumarJuly 7, 2026No Comments3 Mins Read
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    UCIL में सरकारी बंगले को लेकर विवाद: पूर्व तकनीकी निदेशक मनोज कुमार पर नियम उल्लंघन के आरोप, नए निदेशक गेस्ट हाउस में रहने को मजबूर

    राष्ट्र संवाद संवाददाता

    यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) में तकनीकी निदेशक के सरकारी आवास को लेकर विवाद गहरा गया है। आरोप है कि तकनीकी निदेशक पद से हटाए जा चुके जीएम मनोज कुमार ने अब तक आवंटित सरकारी बंगला खाली नहीं किया है, जिसके कारण वर्तमान तकनीकी निदेशक को पदभार संभालने के बाद भी गेस्ट हाउस में रहना पड़ रहा है। इस पूरे मामले ने यूसीआईएल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

    क्या है मामला

    सूत्रों के अनुसार, मनोज कुमार को करीब आठ महीने पहले तकनीकी निदेशक के पद से हटाया गया था। आरोप है कि पदमुक्त होने के बावजूद उन्होंने अब तक सरकारी आवास खाली नहीं किया। सरकारी नियमों के अनुसार किसी अधिकारी के सेवानिवृत्त, स्थानांतरित या पदमुक्त होने के बाद निर्धारित अवधि के भीतर सरकारी आवास खाली करना अनिवार्य होता है।

    बताया जा रहा है कि बंगला खाली नहीं होने के कारण वर्तमान तकनीकी निदेशक को अभी तक गेस्ट हाउस में रहना पड़ रहा है। इससे संस्थान पर अतिरिक्त व्यय होने के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।

    मनोज कुमार पर लगे आरोप

    सूत्रों के मुताबिक, मनोज कुमार के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इनमें पूर्व सीएमडी द्वारा परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) को भेजी गई एक लिखित शिकायत का भी उल्लेख है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने एक महिला अधिकारी के साथ मिलकर तत्कालीन सीएमडी की छवि खराब करने और उन्हें पद से हटवाने की साजिश रची।

    इसके अलावा सरकारी पद के दुरुपयोग, आंतरिक गुटबाजी को बढ़ावा देने तथा सरकारी आवास समय पर खाली नहीं करने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा इन्हें सिद्ध घोषित किया गया है।

    नियमों का हवाला

    रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी आवास खाली नहीं करने की स्थिति में संबंधित नियमों के तहत बेदखली की कार्रवाई, दंडात्मक शुल्क तथा विभागीय कार्रवाई का प्रावधान है। वहीं वरिष्ठ अधिकारियों के पदमुक्त होने के बाद सरकारी संपत्तियों के समयबद्ध हस्तांतरण की भी व्यवस्था है।

    प्रबंधन की भूमिका पर उठे सवाल

    कर्मचारियों और यूनियन के एक वर्ग का कहना है कि यदि सामान्य कर्मचारियों से समय पर आवास खाली कराया जाता है तो वरिष्ठ अधिकारियों के मामले में भी समान नियम लागू होने चाहिए। उनका आरोप है कि इस मामले में दोहरे मापदंड अपनाए जा रहे हैं।

    वहीं प्रबंधन का कहना है कि मामला प्रक्रिया के तहत है और नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

    पीआरओ का पक्ष

    यूसीआईएल के जनसंपर्क पदाधिकारी (पीआरओ) स्टालिन हेंब्रम ने कहा कि “बंगला खाली कराने की प्रक्रिया जारी है।”

    जांच पर टिकी निगाहें

    बताया जा रहा है कि मामले से संबंधित शिकायत परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) तक पहुंची है। हालांकि विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में पूरे मामले में आगे की स्थिति विभागीय जांच और सक्षम प्राधिकार के निर्णय के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    UCIL में सरकारी बंगले को लेकर विवाद: पूर्व तकनीकी निदेशक मनोज कुमार पर नियम उल्लंघन के आरोप नए निदेशक गेस्ट हाउस में रहने को मजबूर
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