गुड़ाबांधा बालू खनन पर बड़ा सवाल: स्वीकृति से पहले लाखों सीएफटी बालू का भंडारण? खनन विभाग की चिट्ठी से उठे गंभीर सवाल
राष्ट्र संवाद संवाददाता
गुड़ाबांधा: पूर्वी सिंहभूम के गुड़ाबांधा अंचल अंतर्गत कोइमा गांव के पास स्वर्णरेखा नदी में बालू खनन को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। जिला खनन विभाग की एक आधिकारिक चिट्ठी के सामने आने के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या पट्टेधारी कंपनी गोदावरी कमोडिटीज लिमिटेड ने आवश्यक स्वीकृतियां और भूमि संबंधी प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही लाखों क्यूबिक फीट बालू का भंडारण कर लिया था। मामले को लेकर जिला खनन पदाधिकारी की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, गुड़ाबांधा अंचल के कड़ियामोहनपाल क्षेत्र में स्वर्णरेखा नदी के किनारे 34.7 हेक्टेयर एवं 46.3 हेक्टेयर क्षेत्र में कंपनी को बालू घाट का पट्टा आवंटित किया गया था। नियमानुसार पट्टा मिलने के बाद भूमि की जांच, स्टोरेज स्थल का निर्धारण तथा सूचना पट्ट लगाना अनिवार्य होता है। आरोप है कि इन प्रक्रियाओं के पूर्ण होने से पहले ही बड़े पैमाने पर बालू का भंडारण कर लिया गया।

सूत्रों के अनुसार, जिला खनन पदाधिकारी ने 8 जून को गुड़ाबांधा अंचलाधिकारी को पत्र भेजकर आकाशाछीडा मौजा के खाता संख्या-5, प्लॉट संख्या-131, रकबा-1.36 एकड़ भूमि के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। उल्लेखनीय है कि यह पत्र राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा राज्य में बालू खनन पर रोक लगाए जाने से महज दो दिन पहले जारी किया गया था। आरोप है कि पत्र भेजे जाने तक प्रस्तावित स्टोरेज स्थल पर भारी मात्रा में बालू पहले ही जमा किया जा चुका था।
ग्रामीणों का आरोप
स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि सीटीओ (Consent to Operate) मिलने के बाद प्रशासनिक प्रक्रिया के दौरान लगभग छह दिनों तक लगातार ट्रैक्टरों से नदी से बालू की ढुलाई की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि करीब चार लाख सीएफटी से अधिक बालू का खनन कर स्टॉक किया गया है। उनका यह भी कहना है कि आज तक भंडारण स्थल पर कोई सूचना पट्ट नहीं लगाया गया, जिससे आम लोगों को स्टॉक की मात्रा और उसकी वैधता की जानकारी नहीं मिल रही है।

सात बिंदुओं पर मांगी गई थी रिपोर्ट
खनन विभाग द्वारा अंचल कार्यालय से सात महत्वपूर्ण बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी गई थी, जिनमें भूमि की प्रकृति, कब्जा, भूमि विवाद, 50 मीटर के दायरे में सार्वजनिक स्थल, सड़क या धार्मिक स्थल की स्थिति, वन भूमि अथवा गैर-मजरुआ होने की जानकारी, संपर्क मार्ग की स्थिति तथा स्टोरेज यूनिट की स्वीकृति शामिल है। अंचल कार्यालय ने अपनी रिपोर्ट खनन विभाग को सौंप दी है।
एनजीटी की रोक के बीच उठे सवाल
राज्य में फिलहाल एनजीटी के आदेश के कारण बालू खनन पर रोक है। ऐसे में रोक लागू होने से ठीक पहले हुए कथित खनन और भंडारण को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। प्रमुख सवाल यह है कि जब भूमि की जांच और स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी, तब इतने बड़े पैमाने पर बालू का खनन और भंडारण कैसे हुआ। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि एनजीटी की रोक से पहले कितना बालू वैध चालान के माध्यम से उठाया गया और कितना स्टॉक में मौजूद है।
अधिकारियों का पक्ष
इस मामले में जिला खनन पदाधिकारी सतीश नायक ने कहा कि “सभी कार्य नियमानुसार किए जा रहे हैं।” वहीं गुड़ाबांधा थाना प्रभारी ने कहा कि “ठेका कंपनी द्वारा किसी भी प्रकार के कागजात थाना को उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।”
फिलहाल पूरे मामले में अंचल की रिपोर्ट और विभागीय जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह प्रक्रियागत त्रुटि थी या नियमों के उल्लंघन का मामला।

