पानी की टंकी साफ करने गई 10 वर्षीय बच्ची के साथ हुआ हादसा
छौड़ाही। थाना क्षेत्र के शाहपुर पंचायत के वार्ड संख्या 8 में रविवार दोपहर पानी की टंकी साफ करने गई 10 वर्षीय बच्ची की सांप के डसने से मौत हो गई। मृतका की पहचान स्वर्गीय संतोष दास की पुत्री लाडो कुमारी के रूप में हुई है। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
घटना का पूरा विवरण
परिजनों के अनुसार लाडो रविवार दोपहर घर की छत पर रखी पानी की टंकी साफ करने गई थी। टंकी ईंट के सहारे रखी हुई थी। सफाई के दौरान टंकी के पास छिपे सांप ने बच्ची के पैर के अंगूठे में डस लिया। सांप के डसने के बाद बच्ची ने शोर मचाकर अपनी मां को घटना की जानकारी दी। इसके बाद आसपास के लोग भी मौके पर जुट गए।
झाड़-फूंक के चक्कर में बीता कीमती समय
बताया गया कि घटना के बाद परिजन बच्ची को तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय पहले झाड़-फूंक के लिए एक भगत के पास पहुंचे। वहां से लौटने के बाद परिजन बच्ची को इलाज के लिए रोसड़ा ले जाने लगे। हालांकि, अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उसकी मौत हो गई। लाडो चार भाई-बहनों में सबसे छोटी थी। उसके परिवार में तीन बहन और एक भाई हैं। छोटी उम्र में बच्ची की मौत से परिजनों के साथ-साथ आसपास के लोगों में भी शोक है।
ग्रामीणों की अपील: अंधविश्वास से बचें, अस्पताल जाएं
घटना के बाद ग्रामीणों ने लोगों से अपील की कि सांप अथवा किसी जहरीले जीव के काटने पर झाड़-फूंक में समय बर्बाद नहीं करें और पीड़ित को तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं। समय पर इलाज मिलने से बच सकती है जान।
चिकित्सक की सलाह: गोल्डन ऑवर का महत्व
छौड़ाही पीएचसी प्रभारी डॉ. कमलेश कुमार ने बताया कि सांप के काटने की स्थिति में पीड़ित को बिना समय गंवाए नजदीकी अस्पताल ले जाना चाहिए। अस्पताल में समय पर उचित उपचार मिलने से पीड़ित की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि झाड़-फूंक के कारण इलाज में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए। डॉ. कुमार ने बताया कि सांप के जहर का असर धीरे-धीरे शरीर में फैलता है और एंटी-वेनम इंजेक्शन ही इसका एकमात्र कारगर इलाज है, जो केवल सरकारी अस्पतालों और प्रमाणित स्वास्थ्य केंद्रों पर मुफ्त उपलब्ध होता है।
सांप काटने की स्थिति में क्या करें और क्या न करें
- क्या करें: पीड़ित को शांत रखें, प्रभावित अंग को स्थिर रखें और दिल के स्तर से नीचे रखें। तुरंत 108 एंबुलेंस या नजदीकी वाहन से सरकारी अस्पताल ले जाएं।
- क्या न करें: चीरा लगाना, मुंह से जहर चूसना, टूर्निकेट बांधना, झाड़-फूंक, टोना-टोटका या देसी दवाइयों का प्रयोग बिल्कुल न करें।
- पहचान: अगर संभव हो तो सांप की फोटो खींच लें या उसके रंग-रूप का ध्यान रखें, ताकि डॉक्टर को सही एंटी-वेनम चुनने में मदद मिले।
बिहार में सर्पदंश एक बड़ी चुनौती
बिहार में मानसून और उसके बाद के महीनों में सर्पदंश की घटनाएं तेजी से बढ़ती हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, बिहार सर्पदंश से होने वाली मौतों के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। ग्रामीण इलाकों में जागरूकता की कमी और स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंच में देरी मृत्यु दर को बढ़ा देती है। सरकार द्वारा हर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) पर एंटी-स्नेक वेनम (ASV) की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, लेकिन अंधविश्वास के कारण लोग समय पर नहीं पहुंच पाते।
जागरूकता ही बचाव का एकमात्र रास्ता
इस दुखद घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि पानी की टंकी साफ करने गई 10 वर्षीय बच्ची जैसी मासूम जिंदगियां केवल जागरूकता के अभाव में चली जाती हैं। स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और पंचायत स्तर पर सर्पदंश प्रबंधन को लेकर नियमित जागरूकता अभियान चलाने की सख्त जरूरत है। ग्रामीणों को यह समझना होगा कि ‘भगत’ या ‘ओझा’ के पास जाने में बर्बाद किया गया एक-एक मिनट पीड़ित के जीवन के लिए भारी पड़ता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी सर्पदंश को एक उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग मानता है और इसके लिए समुदाय आधारित शिक्षा पर जोर देता है। WHO सर्पदंश तथ्य पत्रक के अनुसार, समय पर एंटी-वेनम देने से मृत्यु और विकलांगता को रोका जा सकता है।
लाडो की मौत पूरे समाज के लिए एक सबक है। हमें वैज्ञानिक सोच अपनानी होगी और यह संदेश घर-घर तक पहुंचाना होगा: सांप काटे तो झाड़-फूंक नहीं, सीधे अस्पताल दौड़ें।

