लेखक: ललित गर्गभारत के लोकतांत्रिक इतिहास में कुछ कालखंड केवल शासन परिवर्तन के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना के पुनर्जागरण के लिए याद किए जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते बारह वर्षों का दौर ऐसा ही एक कालखंड है, जिसे सही मायने में मोदी युग के बारह वर्ष के रूप में देखा जा सकता है। यह केवल एक प्रधानमंत्री के लंबे कार्यकाल की कहानी नहीं, बल्कि उस भारत की कहानी है जिसने स्वयं को नए आत्मविश्वास, नई ऊर्जा और नई वैश्विक पहचान के साथ स्वयं को स्थापित किया है। नरेंद्र मोदी ने लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद…
Author: Nikunj Gupta
लेखक: सोनी सिंहयह कहानी किसी राजवंश में जनमे नायक की नहीं है। यह कहानी है छोटानागपुर के पठार, घने जंगलों और लाल मिट्टी को अपने माथे पर तिलक की तरह लगाने वाले एक ऐसे व्यक्तित्व की, जिसने अभावों को अपनी शक्ति बनाया। चतरा शहर से सटे प्रकृति की छटाओं और वादियों से घिरा गाँव—सोनबीघा जहाँ सुबह पक्षियों की चहचहाहट और बैलों के गलों में बंधी घंटियों से होती थी। इसी गाँव के एक साधारण, खपरैल के मकान में रहने वाले शिक्षक के घर एक बालक का जन्म होता है—कालीचरण। पिता पेशे से शिक्षक थे, इसलिए घर में धन-दौलत भले ही…
लेखक: सोनी सिंहयह कहानी किसी राजवंश में जनमे नायक की नहीं है। यह कहानी है सोनबीघा का बेटा, छोटानागपुर के पठार, घने जंगलों और लाल मिट्टी को अपने माथे पर तिलक की तरह लगाने वाले एक ऐसे व्यक्तित्व की, जिसने अभावों को अपनी शक्ति बनाया।चतरा शहर से सटे प्रकृति की छटाओं और वादियों से घिरा गाँव—सोनबीघा जहाँ सुबह पक्षियों की चहचहाहट और बैलों के गलों में बंधी घंटियों से होती थी। इसी गाँव के एक साधारण, खपरैल के मकान में रहने वाले शिक्षक के घर एक बालक का जन्म होता है—कालीचरण। पिता पेशे से शिक्षक थे, इसलिए घर में धन-दौलत…
12 साल विश्वास के साथ भारत ने कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है, और इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज विशेष रूप से उजागर किया। इस लेख में हम सरकार की प्रमुख उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करेंगे। 12 साल विश्वास पर मोदी का आश्वासन मोदी बोले: 12 साल विश्वास, विकास और जनकल्याण को समर्पित रहे एजेंसीनई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर कहा कि यह कार्यकाल विश्वास, विकास और जनकल्याण को समर्पित रहा है। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ देशवासियों के आशीर्वाद और राष्ट्र प्रथम की भावना…
लेखक: देवानंद सिंहघटती जन्म दर भारत की जनसंख्या को लेकर लंबे समय से यह धारणा रही है कि देश की सबसे बड़ी चुनौती तेजी से बढ़ती आबादी है। संसाधनों पर बढ़ता दबाव, रोजगार की समस्या, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी जैसी समस्याओं के लिए अक्सर जनसंख्या वृद्धि को जिम्मेदार ठहराया जाता रहा है। लेकिन अब देश एक नए दौर में प्रवेश करता दिखाई दे रहा है। सरकारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) की रिपोर्ट के अनुसार भारत की कुल प्रजनन दर (टोटल फर्टिलिटी रेट-टीएफआर) घटकर 1.9 पर पहुंच गई है। यह पहली बार है जब यह दर रिप्लेसमेंट लेवल 2.1…
लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाताओवाला नाका में अवैध वाटर प्लांट की कार्रवाई ने शहर को हिलाकर रखा है। यह घटना फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के द्वारा की गई तेज़ छापेमारी का नतीजा है, जहाँ रोजाना 800 कैन पानी बेचा जाता था। इस लेख में हम इस घोटाले के सभी पहलुओं को विस्तृत रूप से देखेंगे। अवैध वाटर प्लांट की जांच के पीछे की कहानी मुंबई/इंद्र यादव/ठाणे, शहर के ओवाला नाका इलाके में स्वास्थ्य के साथ हो रहे एक बड़े खिलवाड़ का खुलासा हुआ है। यहाँ ब्लू रूफ क्लब के पास एक ऐसा केंद्र पकड़ा गया है, जहाँ बिना किसी सरकारी…
लेखक: प्रो. आरके जैन “अरिजीत”जब रोज़ी-रोटी कमाने निकले हाथजब रोज़ी-रोटी कमाने निकले हाथ आग की लपटों में खो जाएं, तब हादसे सिर्फ दुर्घटनाएं नहीं, व्यवस्था की नाकामी का आईना बन जाते हैं। विशाखापत्तनम स्टील प्लांट में 8 जून 2026 की वह शाम भी ऐसा ही दर्दनाक सच बनकर उभरी। स्टील मेल्टिंग शॉप-1 में लेडल फटने के बाद 1600 डिग्री तापमान की पिघली धातु मजदूरों पर बरसी तो केवल आठ श्रमिकों की जान नहीं गई, बल्कि सुरक्षित और मानवीय औद्योगिक विकास का दावा भी सवालों के घेरे में आ गया। आग ने उनके शरीर झुलसाए, लेकिन उससे कहीं गहरा घाव हमारी…
लेखक: ललित गर्गविश्व नेत्रदान दिवस (10 जून, 2026) पर विशेषः विश्व नेत्रदान दिवस मानव जीवन में आंखों का महत्व केवल देखने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे हमारी चेतना, संवेदना, ज्ञान और जीवन के सौंदर्य का द्वार हैं। आंखों के माध्यम से ही हम प्रकृति की विविधता, परिवार का स्नेह, समाज की गतिविधियों और संसार की अनंत संभावनाओं का अनुभव करते हैं। इसलिए दृष्टि का अभाव केवल शारीरिक अक्षमता नहीं, बल्कि जीवन के अनेक आयामों से वंचित हो जाने की पीड़ा है। ऐसे में नेत्रदान केवल एक चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसी अंधेरे जीवन में प्रकाश भरने वाला महान मानवीय…
Gen-z स्पेशल सुन सबकी कर मन की डाक्टर दीपक गोस्वामी मानवीय व्यवहार वैज्ञानिक आप देश के चर्चित लेखक, मोटिवेशनल स्पीकर,ट्रेनर,सामाजिक कार्यकर्ता है। *_चाकी चाकी सब कहे, कीली कहे न कोय। जो कीली से लाग रहे, बाल न बांका होय।।_* कीली क्या है? कबीर ने पाँच सौ साल पहले ट्वीट कर दिया था, पर हम आज तक रीट्वीट नहीं कर पाए। चाकी तो सबको दिखती है। ये जो संसार की मशीन है ना, इसके दो पाट दिन रात घिस-घिस कर रहे हैं। एक पाट सुख का, दूसरा दुख का। एक पाट तारीफ का, दूसरा गाली का। एक पाट प्रमोशन का, दूसरा…
लेखक: देवानंद सिंहदिल्ली में ममता बनर्जी की तन्हाई ने राजनीतिक विश्लेषकों को गंभीर सोच में डाल दिया है, यह दिखाता है कि ट्रम कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर गहरी बदलाव की लहर चल रही है।दिल्ली में ममता बनर्जी की तन्हाई का विश्लेषणपश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी का दिल्ली दौरा राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। चर्चा का केंद्र केवल उनकी चुनावी पराजय नहीं, बल्कि दिल्ली पहुंचने पर दिखाई पड़ा वह असामान्य राजनीतिक माहौल है, जिसे कई राजनीतिक पर्यवेक्षक टीएमसी के भीतर बढ़ती असंतुष्टि और संभावित नेतृत्व…
