Author: Nikunj Gupta

प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता और झारखंड के सुप्रसिद्ध वरीय अधिवक्ता राजेश कुमार शुक्ल ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के 134वें ‘मन की बात’ संस्करण को पूरी तरह प्रेरणादायक बताया है। उन्होंने कहा है कि यह कार्यक्रम Viksit Bharat Resolution (विकसित भारत संकल्प) को सिद्धि तक पहुंचाने में सहायक होगा। श्री शुक्ल ने जमशेदपुर में सैकड़ों सहयोगी अधिवक्ताओं और शिक्षाविदों के साथ इस मासिक रेडियो कार्यक्रम को सुनने के बाद अपनी प्रतिक्रिया दी। प्रेरणादायक ‘मन की बात’: युवाओं और समाज के लिए नई दिशा राजेश शुक्ल ने जोर देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ में सकारात्मक परिवर्तन…

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जमशेदपुर। सिखों के पांचवें गुरु और शहीदों के सरताज गुरु अर्जन देव जी के 401 वीं शहादत को समर्पित छबील सोनारी राम मंदिर चौक में सोनारी गुरुद्वारा संस्थापक सदस्य कमेटी के तत्वावधान में लगाई गई।स्थानीय सिख एवं उनके परिवार के सदस्यों ने यहां अपनी सेवाएं दी जिनकायोगदान गुरुद्वारा साहिब निर्माण में रहा। आम राहगीरों के बीच ठंडे शर्बत और चना प्रसाद का वितरण किया।यहां गुरु के प्रति नतमस्तक होने एवं सिखों के साथ सद्भावना दिखाने पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस नेता बन्ना गुप्ता, समाजवादी चिंतक अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू पहुंचे और संगत की सेवा की। संगत के सम्मानित सदस्यगन के साथ…

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नारी –एक अनुपम शक्ति———————————नारी तेरी महिमा न्यारी,ना तू कमजोर, ना तू बेचारी।है तेरी कहानी बहुत न्यारी,ना जाने दुनिया ने क्यों समझा तुझे बेचारी।कभी परंपरा का मान बनती,कभी नए युग की शान बन जाती।कभी सती, कभी सीता, कभी द्रौपदी बन जाती,ना जाने कितनी अग्नि-परीक्षाएँ हँसकर निभाती।न जाने क्या दोष है तेरा,हर बार क्यों तेरी ही बारी आती।बिटिया बन बाबुल का आँगन सजाती,पत्नी बन प्रेम की ज्योति जलाती।माँ बन बच्चे का बचपन सँवारती,अपने आँचल में पूरी दुनिया बसाती।दर्द छुपाकर मुस्कान बिखेरती,हर रिश्ते को प्रेम से निभाती।कोई न समझ सका अब तक,तेरे मन की गहराई सारी।पुस्तकें मिलीं तो ज्ञान जगा दिया,तलवार मिली तो…

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लेखक: इंद्र यादव”ज़िंदगी आपको सब कुछ देकर भी, किसी एक चीज के लिए फकीर बना देती है…!” यह बात सिर्फ सुनने में अच्छी नहीं लगती, बल्कि यह हमारी आज की ज़िंदगी का सबसे बड़ा सच है।आज हमारे पास रहने के लिए अच्छे घर हैं, घूमने के लिए गाड़ियां हैं, हाथ में महंगे फोन हैं और बैंक में पैसा भी है। यानी बाहर से देखने पर लगता है कि हमारे पास ‘सब कुछ’ है। लेकिन अगर थोड़ा अंदर झांककर देखें, तो हर इंसान अंदर से किसी न किसी चीज़ के लिए तरस रहा है। कोई चैन की नींद के लिए तरस…

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लेखक: डाक्टर दीपक गोस्वामीहिंदी पत्रकारिता आज एक कठिन मोड़ पर खड़ी है। छोटे-मंझोले पत्र-पत्रिकाओं के सामने पाठकों की कमी सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। यह संकट केवल आर्थिक नहीं, सामाजिक भी है। इसे समझने के लिए हमें तथ्यों को देखना होगा। यह वही आँकड़े हैं जो सरकारी दस्तावेजों में दर्ज हैं।पंजीकृत प्रकाशनों की स्थितिसमाचारपत्रों के पंजीयक की रिपोर्ट ‘प्रेस इन इंडिया 2020-21’ के अनुसार 31 मार्च 2021 तक देश में कुल पंजीकृत प्रकाशन 1,44,520 थे। इनमें हिंदी के 55,349 प्रकाशन थे। पर वार्षिक विवरण केवल 32,938 प्रकाशनों ने ही दाखिल किया। यानी 1,11,582 प्रकाशनों की वर्तमान स्थिति स्पष्ट नहीं…

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लेखक: देवानंद सिंहदेश की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल NEET और करोड़ों छात्रों के भविष्य का फैसला करने वाली CBSE की परीक्षा व्यवस्था आज कठघरे में खड़ी है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्वीकार किया है कि NTA की परीक्षा प्रणाली में कमियां थीं और CBSE के ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) में भी खामियां रह गई थीं। लेकिन सवाल यह है कि जब लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर था, तब ये कमियां पहले क्यों नहीं दिखीं?सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और सरकारी जवाबदेहीसुप्रीम कोर्ट ने बिल्कुल सही पूछा कि अगर अब सरकार को सिस्टम की खामियां दिखाई दे…

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“लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजबूत करने के लिए पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता है।”लेखक: देवानंद सिंहहर वर्ष पत्रकारिता दिवस हमें केवल एक तिथि का स्मरण नहीं कराता, बल्कि उस जिम्मेदारी की याद दिलाता है जो लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के कंधों पर टिकी है। पत्रकारिता का मूल उद्देश्य सत्ता, व्यवस्था और समाज के बीच एक पारदर्शी सेतु बनना है। लेकिन आज जब पत्रकारिता दिवस मनाया जा रहा है, तब यह सवाल भी उतना ही प्रासंगिक है कि क्या पत्रकारिता अपने मूल धर्म पर कायम है या फिर बाजार, सत्ता और स्वार्थ के दबावों में…

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लेखक: ललित गर्गभारत केवल एक राष्ट्र नहीं, बल्कि भाषाओं, बोलियों, संस्कृतियों और परंपराओं का विराट संगम है। यहां भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि पहचान, संस्कृति, संवेदना और सामाजिक चेतना का आधार भी है। ऐसे बहुभाषी देश में शिक्षा व्यवस्था को किस भाषा में संचालित किया जाए और बच्चों को कौन-कौन सी भाषाएं पढ़ाई जाएं, यह प्रश्न लंबे समय से बहस और राजनीति का विषय रहा है। इसी संदर्भ में “त्रिभाषा फार्मूला” भारतीय शिक्षा व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण अवधारणा के रूप में सामने आया। आज नई शिक्षा नीति-2020 और सीबीएसई के ताजा निर्णय ने इसे नए स्वरूप में पुनः…

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लेखक: संजय राठी30 मई भारत में हिंदी पत्रकारिता दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन हिंदी पत्रकारिता के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है। वर्ष 1826 में पंडित जुगल किशोर शुक्ल द्वारा प्रकाशित ‘उदन्त मार्तण्ड’ ने हिंदी पत्रकारिता की नींव रखी थी। तब से लेकर आज तक हिंदी पत्रकारिता ने देश की आज़ादी, लोकतंत्र की मजबूती, सामाजिक चेतना और जनजागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।हिंदी पत्रकारिता दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि पत्रकारिता के मूल्यों, दायित्वों और वर्तमान चुनौतियों पर गंभीर चिंतन का दिन भी है। आज मीडिया तकनीकी क्रांति, बाज़ारवाद और सामाजिक बदलावों के दौर से गुजर…

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लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाताकोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी ने बकरीद के अवसर पर नदिया जिले स्थित मायापुर इस्कॉन के वैश्विक मुख्यालय पहुंचकर गो-पूजा की और विशेष संदेश देने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री बनने के बाद यह उनकी पहली मायापुर यात्रा बताई जा रही है।शुवेंदु अधिकारी ने गौ सेवा, आध्यात्म और सांस्कृतिक विरासत पर दिया जोरजानकारी के अनुसार, शुवेंदु अधिकारी गुरुवार सुबह पारंपरिक सफेद धोती-कुर्ता पहनकर नंगे पैर इस्कॉन गोशाला पहुंचे। यहां उन्होंने गायों को फल, मिठाई और हरा चारा खिलाया तथा “गोपी-जन गो सेवा” कार्यक्रम के तहत गो-आरती में हिस्सा लिया। इसके बाद उन्होंने यज्ञ में आहुति दी…

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