नारी –एक अनुपम शक्ति
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नारी तेरी महिमा न्यारी,
ना तू कमजोर, ना तू बेचारी।
है तेरी कहानी बहुत न्यारी,
ना जाने दुनिया ने क्यों समझा तुझे बेचारी।
कभी परंपरा का मान बनती,
कभी नए युग की शान बन जाती।
कभी सती, कभी सीता, कभी द्रौपदी बन जाती,
ना जाने कितनी अग्नि-परीक्षाएँ हँसकर निभाती।
न जाने क्या दोष है तेरा,
हर बार क्यों तेरी ही बारी आती।
बिटिया बन बाबुल का आँगन सजाती,
पत्नी बन प्रेम की ज्योति जलाती।
माँ बन बच्चे का बचपन सँवारती,
अपने आँचल में पूरी दुनिया बसाती।
दर्द छुपाकर मुस्कान बिखेरती,
हर रिश्ते को प्रेम से निभाती।
कोई न समझ सका अब तक,
तेरे मन की गहराई सारी।
पुस्तकें मिलीं तो ज्ञान जगा दिया,
तलवार मिली तो अन्याय मिटा दिया।
कलम उठाई तो समाज सजा दिया,
प्रेम मिला तो हर दिल अपना बना दिया।
मकान मिला तो घर बना दिया,
सूने जीवन में दीप जला दिया।
त्याग, प्रेम और शक्ति की मूरत,
नारी ने संसार सजा दिया।
नारी तू शक्ति, नारी सम्मान,
तुझसे ही रोशन हर इंसान।
तू ही सृजन, तू ही जीवन,
तुझसे ही जग की पहचान।
कवि—
सोनम चौधरी

