आदित्यपुर नगर निगम चुनाव: टिकट विवाद से झामुमो-भाजपा में अंदरूनी कलह
राष्ट्र संवाद संवाददाता
सरायकेला-खरसावां जिला के आदित्यपुर नगर निगम में मेयर पद का चुनाव अब सीधी लड़ाई से ज्यादा अंदरूनी बगावत की जंग बनता नजर आ रहा है. झारखंड मुक्ति मोर्चा और भारतीय जनता पार्टी, दोनों ही दलों में टिकट को लेकर उठा असंतोष अब खुलकर सतह पर आ गया है.
झामुमो से बगावत कर सरायकेला विधानसभा के प्रत्याशी रहे गणेश महाली की पत्नी और पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष शकुंतला महाली ने नामांकन के बाद अचानक पाला बदलते हुए अपना नाम वापस ले लिया. उन्होंने इसे पार्टी हित में लिया गया फैसला बताया. लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे रणनीतिक दबाव और अंदरखाने की सुलह का परिणाम माना जा रहा है.
उधर भाजपा खेमे में भी कम हलचल नहीं रही. पार्टी समर्थित प्रत्याशी प्रभासिनी कालुंडिया ने भी नामांकन वापस लेकर सियासी तापमान बढ़ा दिया. प्रभासिनी ने पार्टी आलाकमान पर दबाव का आरोप लगाते हुए कदम पीछे खींचा. गौरतलब है कि प्रभासिनी कालुंडिया को निवर्तमान मेयर विनोद कुमार श्रीवास्तव का करीबी माना जाता है और वह लगातार तीन बार वार्ड 35 से पार्षद चुनी जाती रही हैं.
इस बार मेयर सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने पर भाजपा नेतृत्व ने उन्हें अधिकृत उम्मीदवार बनाया था. लेकिन नामांकन के बाद पार्टी के भीतर असंतोष फूट पड़ा. भाजपा से जुड़े कई नेता निर्दलीय मैदान में उतर गए. इनमें संजय सरदार, विनोती हांसदा और पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन की करीबी मानी जाने वाली सावित्री लेंयांगी शामिल हैं.
अब भाजपा समर्थित चेहरे के रूप में संजय सरदार मैदान में हैं, जबकि विनोती हांसदा और सावित्री लेंयांगी डटी हुई हैं. ऐसे में मुकाबला सिर्फ दलों के बीच नहीं, बल्कि अपनों के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है.
कुल मिलाकर आदित्यपुर नगर निगम का चुनाव इस बार विकास के मुद्दों से ज्यादा सियासी समीकरण, बगावत और भीतरघात की कहानी लिखता नजर आ रहा है. चुनावी नतीजे यह तय करेंगे कि बगावत किसके लिए फायदे का सौदा साबित होती है और किसके लिए भारी पड़ती है.

