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    Home » आतंकवाद पर जवाबदेही, हिमालय पर साझी जिम्मेदारी
    Headlines अन्तर्राष्ट्रीय अपराध संपादकीय

    आतंकवाद पर जवाबदेही, हिमालय पर साझी जिम्मेदारी

    Devanand SinghBy Devanand SinghSeptember 26, 2026No Comments2 Mins Read
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    आतंकवाद पर जवाबदेही, हिमालय पर साझी जिम्मेदारी

    देवानंद सिंह
    संयुक्त राष्ट्र महासभा का मंच दुनिया के सामने अपनी बात रखने और वैश्विक चुनौतियों पर गंभीर संवाद का अवसर देता है। ऐसे में न्यूयॉर्क में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद और आतंकवाद को लेकर पूछे गए सवाल महत्वपूर्ण हैं। उपलब्ध वीडियो में पत्रकार के सवालों पर शहबाज शरीफ ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया और आगे बढ़ गए। यह घटना इसलिए चर्चा में आई क्योंकि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के मुद्दे पर अपनी स्थिति लगातार रखता रहा है।

    आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल बयानों से नहीं, बल्कि पारदर्शी कार्रवाई, जवाबदेही और ठोस कदमों से मजबूत होती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने किसी भी देश से यही अपेक्षा होती है कि वह आतंकवादी संगठनों और उनके नेटवर्क के खिलाफ कानून के अनुसार प्रभावी कार्रवाई करे। सवालों से बचना किसी भी गंभीर मुद्दे का समाधान नहीं हो सकता।
    इसी संयुक्त राष्ट्र महासभा में नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह का संबोधन एक अलग लेकिन उतना ही महत्वपूर्ण संदेश देता है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों को नेपाल तक सीमित समस्या न मानते हुए पूरे हिमालयी क्षेत्र के लिए चेतावनी बताया। उन्होंने भारत और चीन सहित उन देशों और संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया, जिन्होंने आपदा के बाद नेपाल की सहायता की।
    बालेन शाह का भारत, नेपाल और चीन के नेतृत्व में
    भारत, नेपाल और चीन के नेतृत्व में हिमालयी जलवायु लचीलापन तंत्र बनाने का प्रस्ताव इस बात की ओर संकेत करता है कि हिमालय की समस्याओं का समाधान सीमाओं के भीतर नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सहयोग से तलाशना होगा। हिंदू कुश-हिमालय क्षेत्र करोड़ों नहीं, बल्कि लगभग दो अरब लोगों के जल, कृषि, पर्यावरण और आजीविका से जुड़ा है।
    एक ही अंतरराष्ट्रीय मंच से सामने आई ये दोनों तस्वीरें हमें दो अलग-अलग तरह की वैश्विक जिम्मेदारियों की याद दिलाती हैं। आतंकवाद के मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है, जबकि जलवायु संकट के मामले में सहयोग और साझा जिम्मेदारी। दुनिया को ऐसे ही संवाद की जरूरत है जिसमें सवालों से बचने के बजाय जवाब दिए जाएं और संकटों का सामना मिलकर किया जाए।

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