59 साल का सफर: गौरव की तस्वीरों के साथ जमीनी हकीकत पर भी चर्चा जरूरी, 60वें वर्ष में प्रवेश कर रही UCIL से 7 बड़े सवाल
राष्ट्र संवाद जादूगोड़ा
जादूगोड़ा। यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL) 4 अक्टूबर 1967 को अस्तित्व में आई थी। 4 अक्टूबर 2026 को कंपनी स्थापना के 59 वर्ष पूरे कर 60वें वर्ष में प्रवेश करने जा रही है। जादूगोड़ा के जंगलों और पहाड़ों के बीच शुरू हुई यूरेनियम खनन की यह यात्रा केवल एक कंपनी की कहानी नहीं, बल्कि देश के आत्मनिर्भर परमाणु कार्यक्रम की बुनियाद है।
इस मौके पर कंपनी के पुराने नेतृत्व, विस्तार और तकनीकी विकास को लेकर कई विशेष आलेख और पुरानी तस्वीरें सामने आ रही हैं। यह स्वागतयोग्य है, लेकिन 59 वर्षों के इस सफर का मूल्यांकन केवल पुराने दौर की उपलब्धियों से नहीं, बल्कि आज की जमीनी स्थिति, आधिकारिक आंकड़ों और स्थानीय जनता के अनुभव से भी होना चाहिए।
1967 से 2026 तक: जादूगोड़ा से देश तक का सफर
1967 में जादूगोड़ा में पहली खदान शुरू होने के बाद UCIL ने भाटिन, नरवापहाड़, बागजाता, तुरामडीह, मोहलडीह तक अपना विस्तार किया। कंपनी ने देश को यूरेनियम की पहली खेप से लेकर आज की नई मिल तक का सफर तय किया है। इस लंबे दौर में रामेंद्र गुप्ता, दिवाकर आचार्य, सी.के. असनानी समेत कई चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशकों और स्थानीय प्रबंधन ने कंपनी का नेतृत्व किया।

उन दौरों में भी कंपनी के सामने चुनौतियां कम नहीं थीं – जमीन अधिग्रहण, विस्थापन, रोजगार, सुरक्षा मानक और औद्योगिक संबंध। इसके बावजूद खनन और प्रसंस्करण गतिविधियां आगे बढ़ती रहीं और नई परियोजनाओं पर काम होता रहा।
आज जब उन कार्यकालों को याद किया जा रहा है, तो स्थानीय बुद्धिजीवियों और श्रमिक संगठनों का कहना है कि उपलब्धियों को केवल प्रशंसात्मक शब्दों और पुरानी तस्वीरों में याद करना पर्याप्त नहीं है। हर कार्यकाल के वास्तविक उत्पादन आंकड़े, लक्ष्य बनाम उपलब्धि, मुनाफा-घाटा और परियोजनाओं की प्रगति को भी सामने रखा जाना चाहिए। और इसके लिए दस्तावेज मौजूद हैं। UCIL स्वयं अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर वर्ष 2006-07 से लेकर 2024-25 तक की वार्षिक रिपोर्ट, मार्च 2026 तक की पर्यावरणीय अनुपालन रिपोर्ट और ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक करता है।
आज का सबसे बड़ा सवाल: औद्योगिक संबंध कितने स्थिर हैं?
पुराने दौर में भी आंदोलन हुए, लेकिन वर्तमान समय में भी औद्योगिक संबंधों को लेकर सवाल खत्म नहीं हुए हैं। इसका प्रमाण खुद UCIL के दस्तावेजों में मिलता है।
सितंबर 2022 की हड़ताल: कंपनी की सभी इकाइयों – जादूगोड़ा, भाटिन, नरवापहाड़, तुरामडीह, बागजाता और मोहलडीह में एक साथ हड़ताल हुई थी। स्थिति ऐसी बनी कि प्रबंधन को आवश्यक सेवाओं – पंपिंग, वेंटिलेशन, सुरक्षा के लिए अलग से ड्यूटी लिस्ट जारी करनी पड़ी और सभी यूनियनों से लिखित अपील कर सामान्य स्थिति बहाल करने को कहना पड़ा।
जनवरी 2026 – नरवापहाड़ गेट जाम: नरवापहाड़ परियोजना में विस्थापितों ने पुराने समझौते के तहत रोजगार और अन्य मांगों को लेकर माइंस के मुख्य गेट को जाम कर दिया, जिससे कई घंटों तक उत्पादन और परिवहन प्रभावित रहा।
मई 2026 – बागजाता आंदोलन: बागजाता यूरेनियम माइंस में ठेका मजदूरों और स्थानीय युवाओं ने मांगों को लेकर आंदोलन किया। बाद में प्रबंधन के साथ वार्ता के बाद आंदोलन स्थगित हुआ।
इसलिए सवाल किसी एक अधिकारी के पक्ष या विपक्ष का नहीं है। सवाल व्यवस्था का है। 60वें वर्ष में प्रवेश कर रही एक रणनीतिक कंपनी अपने औद्योगिक संबंधों को कितना स्थिर, भरोसेमंद और संवाद-आधारित बना पा रही है, यह सबसे बड़ा पैमाना है।

कॉलोनी और अस्पताल – कंपनी की असली पहचान
UCIL केवल खदान और मिल नहीं है। जादूगोड़ा, नरवापहाड़ और तुरामडीह में बसी कंपनी की कॉलोनियां, जादूगोड़ा का परमाणु ऊर्जा केंद्रीय अस्पताल, स्कूल और दूसरी नागरिक सुविधाएं भी कंपनी की पहचान का हिस्सा हैं।
आज जमीनी हकीकत यह है कि स्थानीय कर्मचारियों और सेवानिवृत्त लोगों के बीच कॉलोनी की सड़कों में गड्ढे, क्वार्टरों की जर्जर स्थिति, पेयजल आपूर्ति, साफ-सफाई और अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को लेकर लगातार चर्चा होती है। दूसरी ओर कंपनी की वेबसाइट पर ही जादूगोड़ा प्लांट की सड़कों के निर्माण एवं मरम्मत, सिविल मेंटेनेंस, इलेक्ट्रिकल मेंटेनेंस और अन्य रखरखाव कार्यों के लिए हर महीने नई निविदाएं प्रकाशित हो रही हैं। इससे स्पष्ट है कि बुनियादी ढांचे का रखरखाव आज भी कंपनी के नियमित और चुनौतीपूर्ण कार्यों में शामिल है। पहले सब बेहतर था या आज सब बेहतर है, इस निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले इन निविदाओं और जमीनी स्थिति को साथ-साथ देखना जरूरी है।
60वें वर्ष में UCIL को देने होंगे 7 जवाब
गौरवशाली इतिहास का सबसे सही सम्मान यही होगा कि वर्तमान की कमियों पर भी ईमानदारी से बात हो। 59 वर्षों का जश्न तभी सार्थक होगा जब 60वें वर्ष के लिए स्पष्ट रोडमैप सामने आए।
इसलिए जादूगोड़ा की जनता की ओर से 7 सीधे सवाल हैं, जिनके जवाब किसी प्रचारात्मक आलेख से नहीं, बल्कि वार्षिक रिपोर्ट, उत्पादन आंकड़ों और आधिकारिक दस्तावेजों से मिलने चाहिए –
1. उत्पादन का सच: आज कंपनी का वास्तविक उत्पादन कितना है और लक्ष्य के मुकाबले उपलब्धि कितनी है?
2. हड़ताल का असर: पिछले 3 वर्षों में औद्योगिक विवादों और हड़तालों से कितने मैन-डेज और कितना उत्पादन प्रभावित हुआ?
3. श्रमिकों का भविष्य: स्थायी कर्मचारियों के अलावा हजारों ठेका मजदूरों की वेतन, सुरक्षा और स्थायित्व की समस्याओं का कितना समाधान हुआ?
4. विस्थापितों का हिसाब: विस्थापन से जुड़े रोजगार और मुआवजे के कितने मामले आज भी लंबित हैं और उनके निपटारे की समय-सीमा क्या है?
5. कॉलोनी-अस्पताल: कॉलोनी और अस्पताल की सुविधाओं को सुधारने के लिए अगले एक साल का ठोस बजट और योजना क्या है?
6. पर्यावरण: पर्यावरणीय अनुपालन और विकिरण सुरक्षा को लेकर मार्च 2026 तक की रिपोर्ट के बाद जमीनी सुधार क्या हुए हैं?
7. जादूगोड़ा के लिए क्या नया: 60वें वर्ष में प्रवेश करते हुए जादूगोड़ा के युवाओं, व्यवसायियों और स्थानीय समाज के लिए कंपनी की नई योजना क्या है?
याद रहे, 59 वर्षों का इतिहास सिर्फ पुराने चेहरों की तस्वीरों से नहीं लिखा जाता। इतिहास उत्पादन से बनता है, कर्मचारियों के विश्वास से बनता है, स्थानीय जनता के भरोसे से बनता है और सबसे बढ़कर, आज कंपनी जमीन पर कैसी दिखती है, उससे बनता है। 60वें वर्ष में UCIL को सिर्फ अपनी उपलब्धियों का जश्न नहीं, बल्कि वर्तमान चुनौतियों का जवाब भी देना होगा।

