*आजसू से हरेलाल आउट, ईचागढ़ की सियासी बिसात में नई चाल?*
*भाजपा में जाने की चर्चा पर अभी मुहर नहीं*
राष्ट्र संवाद संवाददाता
संजय शर्मा
चांडिल। ईचागढ़ की राजनीति में शनिवार को उस समय नया मोड़ आया, जब आजसू पार्टी के केंद्रीय महासचिव और 2019 व 2024 के विधानसभा प्रत्याशी हरेलाल महतो ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और केंद्रीय महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया। 26 सितंबर को केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश महतो को भेजे पत्र में उन्होंने इस्तीफे के लिए “वर्तमान परिस्थितियों” का हवाला दिया है। उनके साथ ईचागढ़, कुकड़ू, नीमडीह और चांडिल के प्रखंड अध्यक्षों समेत कई पदाधिकारियों के इस्तीफे की भी जानकारी सामने आई है।
हरेलाल के अगले राजनीतिक कदम पर अब निगाहें टिक गई हैं। भाजपा में शामिल होने की चर्चाएं तेज हैं, लेकिन उनके इस्तीफे में अगली राजनीतिक दिशा का कोई उल्लेख नहीं है। इसलिए भाजपा प्रवेश को फिलहाल अटकल के तौर पर ही देखा जा रहा है।
दो चुनाव, दो अनुभव। 2019 में हरेलाल ने आजसू प्रत्याशी के रूप में 38,836 वोट हासिल कर 19.74 प्रतिशत मत पाए और 18,710 मतों के अंतर से साविता महतो के बाद दूसरे स्थान पर रहे। 2024 में आजसू-भाजपा गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में उन्हें 51,029 वोट मिले, लेकिन साविता महतो ने 26,523 मतों के अंतर से जीत दर्ज की।
यहीं से अगले सवाल शुरू होते हैं। यदि हरेलाल भाजपा में जाते हैं तो उनकी भूमिका क्या होगी? क्या वे संगठनात्मक जिम्मेदारी संभालेंगे या ईचागढ़ की राजनीति में फिर चुनावी चेहरा बनेंगे? इन दोनों सवालों का जवाब फिलहाल किसी आधिकारिक घोषणा में नहीं है।
उधर आजसू ने भी संगठनात्मक स्तर पर प्रतिक्रिया शुरू कर दी है। रविवार को पार्टी ने सरायकेला-खरसावां जिला कमेटी समेत सभी संगठनात्मक इकाइयों को भंग कर नए सिरे से पुनर्गठन की घोषणा की। केंद्रीय सचिव सत्यनारायण महतो उर्फ माकड़ महतो ने कहा कि संगठन पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
ऐसे में हरेलाल का इस्तीफा केवल एक नेता के दल बदलने की संभावित कहानी नहीं, बल्कि ईचागढ़ में आजसू के संगठन, भाजपा के स्थानीय समीकरण और भविष्य की गठबंधन राजनीति, तीनों के लिए नई राजनीतिक पहेली जरूर बन गया है।

