लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता, राजेश कुमार
जन्माष्टमी मेला कवि सम्मेलन का आयोजन तारा बरियारपुर गांव में बड़े धूमधाम से किया गया, जहां कवियों की रचनाओं ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
जन्माष्टमी मेला कवि सम्मेलन की प्रमुख झलकियां
तारा बरियारपुर गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मेला के अवसर पर रविवार की संध्या भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
जिले के विभिन्न प्रखंडों से पहुंचे कवियों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं की प्रस्तुति देकर उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
खासकर हास्य कवियों की प्रस्तुतियों पर दर्शकों की तालियों की गूंज देर तक सुनाई देती रही।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कवि तृप्ति नारायण झा ने की, जबकि मंच संचालन शिक्षक रोहित कुमार ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।
इस अवसर पर आगत कवियों का चादर, पाग एवं माला पहनाकर सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए प्रखंड विकास पदाधिकारी मिथिलेश बिहारी वर्मा ने कहा कि कवि अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज को जागरूक करने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।
कविता समाज की भावनाओं को स्वर देने के साथ-साथ लोगों को सकारात्मक दिशा भी प्रदान करती है।
कवि सम्मेलन में मंसूरचक से आए हास्य कवि मिंटू कुमार झा ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुति से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।
उनकी कविता पर उपस्थित दर्शकों ने जमकर तालियां बजायी।
वहीं नागाधाम तारा बरियारपुर के महंत स्वामी धर्मदास जी महाराज ने देवासुर संग्राम की कथा का विस्तार से वर्णन कर उपस्थित लोगों को धार्मिक एवं आध्यात्मिक संदेश दिया।
कवि सम्मेलन में तारा गांव के रामकृष्ण, बरियारपुर पूर्वी के विपिन कुमार, आरसी नगर एरौत के साहित्यकार संजीव कुमार सिंह, कवि राहुल भारद्वाज, दिव्या चौहान, सौरभ वाचस्पति रेणु, मिर्जापुर रोसड़ा के विजय कुमार कुशवाहा, दीपक शर्मा, मंसूरचक के अमरेश कुमार एवं मिंटू कुमार झा, बैद्यनाथपुर के जगमोहन चौधरी, मेघौल के शिक्षक कृष्ण कुमार सिंह तथा हसनपुर के आदर्श कुमार उर्फ मुरारी समेत अन्य कवियों ने अपनी-अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम के अंत में एलएसडी इंटरनेशनल स्कूल मेघौल के निदेशक जयवर्धन वत्स ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
कवि सम्मेलन को लेकर मेला परिसर में देर तक उत्साहपूर्ण माहौल बना रहा और लोगों ने इस सांस्कृतिक आयोजन की जमकर सराहना की।
इस प्रकार जन्माष्टमी मेला कवि सम्मेलन ने स्थानीय संस्कृति और साहित्य को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऐसे आयोजन ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच प्रदान करते हैं और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करते हैं। अधिक जानकारी के लिए जन्माष्टमी पर विकिपीडिया पढ़ें।

