*UCIL जादूगोड़ा अस्पताल में स्वास्थ्य संकट: दवा नहीं, डॉक्टर नहीं, व्यवस्था चरमराई – BJP के दबाव में प्रबंधन ने माने 9 वाद*
राष्ट्र संवाद संवाददाता
यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, UCIL के जादूगोड़ा अस्पताल की बदहाली अब बर्दाश्त के बाहर हो चुकी है। दवाओं की किल्लत, डॉक्टरों की भारी कमी और बदइंतजामी के कारण हजारों कर्मी, पूर्व कर्मी और आसपास के ग्रामीण मरीजों का इलाज अधर में लटका है।
इसी को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने 9 जुलाई को अस्पताल गेट पर बड़ा धरना-प्रदर्शन का अल्टीमेटम दे दिया था। भाजपा के कड़े रुख के बाद हरकत में आए UCIL प्रबंधन ने आनन-फानन में वार्ता बुलाई। लंबी मंथन के बाद प्रबंधन ने 9 प्रमुख मांगों पर लिखित सहमति दी, जिसके बाद भाजपा ने फिलहाल आंदोलन स्थगित कर दिया।
*मरीज पर्चा लेकर भटक रहे, फार्मेसी खाली*
वार्ता में भाजपा नेताओं ने अस्पताल की जर्जर स्थिति का कच्चा चिट्ठा रखा। नेताओं ने कहा कि गर्मी और मानसून में मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा बढ़ती है, लेकिन अस्पताल में हालात सबसे खराब हैं।
1. *दवा संकट*: जरूरी दवाएं समय पर उपलब्ध नहीं हैं। मरीज पर्चा लेकर घंटों फार्मेसी के चक्कर काटते हैं और खाली हाथ लौटते हैं।
2. *आउटसोर्सिंग पर सवाल*: बैठक में कई मरीजों और पूर्व कर्मियों ने सीधे शिकायत की कि आउटसोर्सिंग कंपनी द्वारा दवा की सप्लाई जानबूझकर लेट की जा रही है। रिटायर्ड कर्मियों को सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है। यूनियन भी लगातार इस कंपनी को ब्लैक लिस्ट करने की मांग कर रही है।
3. *डॉक्टरों का टोटा*: ओपीडी और इमरजेंसी में मरीजों की लंबी लाइन है, लेकिन ड्यूटी पर डॉक्टर नदारद हैं। एक-एक डॉक्टर पर सैकड़ों मरीजों का बोझ है।
*सिर्फ इलाज नहीं, पूरी व्यवस्था ध्वस्त*
भाजपा ने सिर्फ दवा-डॉक्टर का मुद्दा ही नहीं उठाया। अस्पताल परिसर की गंदगी, जलभराव, जांच मशीनों की कमी और एंबुलेंस न होना भी बैठक में प्रमुखता से उठा।
*प्रबंधन झुका, 9 बड़े वादों पर बनी सहमति*
उप-महाप्रबंधक कार्मिक एवं औद्योगिक संबंध राकेश कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रबंधन ने निम्न 9 बिंदुओं पर सहमति जताई:
1. *पखवाड़ा शिविर*: जादूगोड़ा आसपास के गांवों में हर 15 दिन में निःशुल्क ग्रामीण चिकित्सा शिविर लगेगा।
2. *मलेरिया पर वार*: सभी शिविरों में मलेरिया की विशेष जांच की व्यवस्था होगी।
3. *स्वच्छता पर जोर*: अस्पताल परिसर, नालियों और बाजार गेट पर नियमित ब्लीचिंग और फॉगिंग होगी।
4. *कचरा निस्तारण*: अस्पताल में गीला-सूखा कचरा अलग करने की वैज्ञानिक व्यवस्था लागू होगी।
5. *बेड बढ़ेंगे*: मरीजों का बढ़ता दबाव देखते हुए अस्पताल में नए बेड की तत्काल व्यवस्था की जाएगी।
6. *दवा स्टॉक दुरुस्त*: फार्मेसी का स्टॉक अपडेट कर दवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
7. *डॉक्टरों की भर्ती*: डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए नए डॉक्टरों की नियुक्ति/संविदा पर तत्काल विचार होगा।
8. *जांच व्यवस्था सुधार*: अल्ट्रासाउंड सहित अन्य जरूरी जांच मशीनों की कमी दूर की जाएगी।
9. *नई एंबुलेंस*: CSR मद से क्षेत्र के लिए एक नई एंबुलेंस उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भेजा जाएगा।
बैठक में डॉ. देबाशीष भट्टाचार्य और डॉ. एस.डी.एन. शर्मा भी उपस्थित थे।
*भाजपा का अल्टीमेटम: “वादाखिलाफी हुई तो उग्र आंदोलन”*
बैठक के बाद जिला अध्यक्ष सत्य तिवारी ने साफ कहा, “प्रबंधन ने सकारात्मकता दिखाई है इसलिए हमने धरना स्थगित किया है। लेकिन यह स्थगन है, समाप्ति नहीं।”
उन्होंने चेतावनी दी, “अगर तय समय में ये 9 वादे पूरे नहीं हुए तो भाजपा फिर से सड़क पर उतरेगी और बड़ा आंदोलन करेगी। इसकी सारी जिम्मेदारी UCIL प्रबंधन की होगी।”
उप जिला अध्यक्ष रोहित परमार ने भी कहा कि अब मरीजों को और धोखा बर्दाश्त नहीं होगा।
*विश्लेषण*: परमाणु ऊर्जा से जुड़े इस रणनीतिक उपक्रम के अस्पताल की यह हालत चिंताजनक है। अगर प्रबंधन अपने वादों पर खरा नहीं उतरा तो जादूगोड़ा में स्वास्थ्य को लेकर एक बड़ा जनआंदोलन तय है।

