राष्ट्र संवाद संवाददाता
*जादूगोड़ा*: राष्ट्र संवाद में 28 जून को प्रमुखता से प्रकाशित “जियाडा में नदी किनारे मिट्टी का अवैध खेल” शीर्षक खबर का बड़ा असर हुआ है। नदी किनारे निर्माण कार्य में हुई अनियमितता और सरकारी संपत्ति को पहुंचे नुकसान के मामले में प्रशासन हरकत में आ गया है। स्वर्ण रेखा बराज प्रमंडल के अधिकारियों ने ठेकेदार सोहन साव पर कड़ी कार्रवाई करते हुए तत्काल प्रभाव से काम बंद करा दिया है।
*क्या है पूरा मामला*
राष्ट्र संवाद ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया था कि जियाडा क्षेत्र के मौजा राखा कोपर में आवंटित प्लॉट संख्या 112 के पास स्वर्ण रेखा नदी किनारे नियमों को ताक पर रखकर निर्माण कार्य चल रहा है। ठेकेदार ने बिना माइनिंग विभाग की अनुमति के जेसीबी लगाकर नदी किनारे से बड़े पैमाने पर मिट्टी का अवैध उत्खनन कर दिया। इससे नदी का प्राकृतिक कटाव बढ़ गया और बराज की सुरक्षा दीवार को खतरा पैदा हो गया। प्रारंभिक आकलन में करीब लाखो का नुकसान हुआ हे।
*ठेकेदार ने किए ये नियम उल्लंघन*
1. *झारखंड माइनर मिनरल कन्सेशन रूल्स 2004 का उल्लंघन*: बिना परमिट मिट्टी का उत्खनन।
2. *पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986*: नदी के किनारे से 200 मीटर के दायरे में उत्खनन प्रतिबंधित है।
3. *बिहार सिंचाई अधिनियम 1997*: बराज और नहर की सुरक्षा सीमा में किसी भी तरह का निर्माण या खुदाई बिना विभागीय एनओसी के नहीं हो सकती।
4. *जियाडा आवंटन शर्तों का उल्लंघन*: आवंटित भूमि के बाहर निर्माण और मिट्टी का उपयोग व्यावसायिक कार्य में किया गया।
*खबर छपते ही हुई कार्रवाई*
राष्ट्र संवाद में खबर प्रकाशित होते ही स्वर्ण रेखा बराज प्रमंडल के अधिकारी सक्रिय हो गए। कार्यपालक अभियंता प्रीतेश होरो ने 30 जून को स्थल निरीक्षण कर तत्काल ठेकेदार सोहन साव को तलब किया। अधिकारियों ने सख्त निर्देश दिया कि 7 दिन के अंदर नुकसान की भरपाई की जाए और नदी किनारे मिट्टी का समुचित समतलीकरण किया जाए। काम पर रोक लगा दी गई है।
*कौन सी धाराएं लग सकती हैं*
विभागीय जांच के बाद ठेकेदार पर ये कानूनी धाराएं लग सकती हैं:
– *BNS की धारा 324*: लोक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, 5 साल तक की सजा और जुर्माना।
– *BNS की धारा 329*: लोक सेवक के आदेश की अवज्ञा, 6 महीने तक की सजा।
– *खान एवं खनिज अधिनियम 1957 की धारा 4/21*: अवैध उत्खनन, 5 लाख तक जुर्माना और 2 साल की सजा।
– *पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 15*: पर्यावरण को नुकसान, 5 साल तक की सजा और 1 लाख जुर्माना।
– *सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984*: नुकसान की वसूली और सजा दोनों।
नेता ने जताया आभार, की एफआईआर की मांग
स्थानीय भाजपा नेता मनोज प्रताप सिंह ने राष्ट्र संवाद का आभार जताते हुए कहा कि अखबार ने जनहित के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया, जिसका असर है कि प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए सिर्फ ठेकेदार नहीं, इसमें शामिल जियाडा और बराज प्रमंडल के अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। दोषियों पर एफआईआर दर्ज कर नुकसान की वसूली की जाए। उन्होंने पूरे आवंटन की जांच विजिलेंस से कराने की मांग की।
अब आगे क्या
कार्यपालक अभियंता प्रीतेश होरो ने बताया कि तकनीकी टीम से नुकसान का आकलन कराया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद जिला खनन पदाधिकारी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा। जब तक भरपाई नहीं होती, साइट सील रहेगी।

