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    Home » अटल बिहारी वाजपेयी ‘अजातशत्रु’ थे, सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया: अमित शाह
    Headlines राजनीति राष्ट्रीय

    अटल बिहारी वाजपेयी ‘अजातशत्रु’ थे, सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया: अमित शाह

    Devanand SinghBy Devanand SinghAugust 16, 2026No Comments3 Mins Read
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    अटल बिहारी वाजपेयी
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    लेखक: भाषा

    अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के एक ऐसे महान व्यक्तित्व हैं जिनके सिद्धांतों और विचारधारा ने देश को नई दिशा दी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में उनकी प्रशंसा करते हुए उन्हें ‘अजातशत्रु’ बताया। अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन के बारे में अधिक जानने के लिए विकिपीडिया पर पढ़ें।

    अटल बिहारी वाजपेयी के सिद्धांतों पर अमित शाह का बयान

    जयपुर, 16 अगस्त (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को ‘अजातशत्रु’ बताते हुए रविवार को कहा कि उनका कोई दुश्मन नहीं था और उन्होंने (वाजपेयी) अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया।

    शाह ने कहा कि वाजपेयी विपक्ष में रहने के दौरान भी और सत्ता में रहते हुए भी अपनी विचारधारा को लेकर प्रतिबद्ध रहे।

    शाह ने चित्तौड़गढ़ के निम्बाहेड़ा में वाजपेयी की प्रतिमा का अनावरण करने के बाद एक जनसभा को संबोधित करते हुए यह बात कही।

    उन्होंने कहा, ‘‘अटल बिहारी वाजपेयी 40 साल तक विपक्ष में रहे, लेकिन उनकी विचारधारा हमेशा सर्वोपरि रही। उन्होंने अपना जीवन अपने सिद्धांतों के अनुसार जिया।’’

    शाह ने कहा कि वाजपेयी जेल गए, लाठियां खाईं और कांग्रेस के अत्याचार सहे, लेकिन अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया।

    उन्होंने कहा कि वाजपेयी जब प्रधानमंत्री बने तो वह देश के पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री थे और उन्होंने कई बड़े फैसले लिए।

    केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, ‘‘दुनिया के दबाव के बावजूद उन्होंने पोखरण परीक्षण के जरिए भारत को परमाणु शक्ति बनाया।’’

    उन्होंने कहा कि वाजपेयी ने हर गांव को सड़कों से जोड़ने के लिए भी काम किया।

    शाह ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री ने स्वर्ण चतुर्भुज परियोजना शुरू की, राष्ट्रीय राजमार्गों के नेटवर्क का विस्तार किया और अपने कार्यकाल में कई अन्य पहल कीं।

    उन्होंने वाजपेयी को जनजातीय विकास के लिए अलग मंत्रालय स्थापित करने का श्रेय भी दिया। शाह ने कहा कि इससे पहले जनजातीय समुदायों के कल्याण के लिए कोई अलग मंत्रालय नहीं था।

    शाह ने कहा, ‘‘अटल जी ने जो शुरुआत की थी, उसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूरा किया है।’’

    उन्होंने यह बात जनजातीय कल्याण के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार की ओर से उठाए गए कदमों के संदर्भ में कही।

    उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय से आने वाली द्रौपदी मुर्मू का भारत का राष्ट्रपति चुना जाना इस दिशा में हुई प्रगति का प्रमाण है।

    शाह ने कहा, ‘‘न तो उन्होंने (वाजपेयी) सत्ता में रहते हुए अपने सिद्धांत छोड़े और न ही विपक्ष में रहते हुए। इसलिए उन्हें ‘अजातशत्रु’ कहा जाता है-एक ऐसे महान व्यक्ति के रूप में, जिसका कोई दुश्मन नहीं था।’’

    वाजपेयी की विरासत और वर्तमान राजनीति

    अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत आज भी भारतीय राजनीति में मार्गदर्शक बनी हुई है। उनके द्वारा शुरू की गई स्वर्ण चतुर्भुज परियोजना और पोखरण परमाणु परीक्षण ने भारत को वैश्विक मंच पर मजबूती से स्थापित किया। अमित शाह के शब्दों में, वाजपेयी जी ने सिद्धांतों की राजनीति की जो मिसाल कायम की, वह वर्तमान नेतृत्व के लिए प्रेरणास्रोत है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने जनजातीय कल्याण के लिए अलग मंत्रालय की स्थापना और द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाकर उस विरासत को आगे बढ़ाया है। यह दर्शाता है कि सिद्धांतों पर आधारित राजनीति कैसे दीर्घकालिक परिवर्तन ला सकती है।

    अजातशत्रु अटल बिहारी वाजपेयी अमित शाह भारतीय राजनीति सिद्धांत
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