Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » रवीन्द्र नाथ महतो ने कहा: स्वतंत्रता केवल आजादी नहीं, समान अवसर और राष्ट्र-निर्माण की जिम्मेदारी भी
    Breaking News Headlines खबरें राज्य से चाईबासा जमशेदपुर झारखंड रांची राजनीति

    रवीन्द्र नाथ महतो ने कहा: स्वतंत्रता केवल आजादी नहीं, समान अवसर और राष्ट्र-निर्माण की जिम्मेदारी भी

    Devanand SinghBy Devanand SinghAugust 16, 2026No Comments2 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    रवीन्द्र नाथ महतो
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता

    रवीन्द्र नाथ महतो ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर झारखंड विधानसभा परिसर में ध्वजारोहण कर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर उन्होंने स्वतंत्रता के वास्तविक अर्थ और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा पर बल दिया।

    रवीन्द्र नाथ महतो का स्वतंत्रता दिवस संबोधन

    रांची। 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रवीन्द्र नाथ महतो ने विधानसभा परिसर में ध्वजारोहण कर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। अपने संबोधन में उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के वीरों को नमन करते हुए लोकतंत्र, संविधान, समानता और राष्ट्र-निर्माण के प्रति जिम्मेदारी निभाने पर जोर दिया।

    उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता केवल विदेशी शासन से मुक्ति नहीं, बल्कि सम्मान के साथ जीवन जीने और अपना भविष्य स्वयं तय करने की आकांक्षा थी। महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, नेताजी सुभाष चंद्र बोस सहित खुदीराम बोस, मातंगिनी हाजरा और सूर्य सेन के योगदान को याद करते हुए उन्होंने झारखंड के तिलका मांझी, सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो और बिरसा मुंडा के संघर्ष को भी नमन किया।

    लोकतंत्र और समानता पर जोर

    विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि संविधान की सर्वोच्चता, कानून का शासन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और असहमति के सम्मान का नाम है। उन्होंने कहा कि तेज आर्थिक विकास के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, महिला सशक्तीकरण और अवसरों की समानता सुनिश्चित करना जरूरी है।

    झारखंड के संदर्भ में उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों का लाभ स्थानीय समाज और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने तथा संथाल क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल, रोजगार और संस्कृति के संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने आह्वान किया कि सभी मिलकर अधिक समतामूलक, समावेशी और विकसित भारत के निर्माण का संकल्प लें। उन्होंने अपने संबोधन का समापन “जय हिंद, जय झारखंड, जोहार” के साथ किया।

    इस अवसर पर विधानसभा के अन्य गणमान्य सदस्य भी उपस्थित रहे। अधिक जानकारी के लिए झारखंड सरकार की आधिकारिक वेबसाइट देखें।

    झारखंड विधानसभा रवीन्द्र नाथ महतो राष्ट्र निर्माण स्वतंत्रता दिवस
    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleदिमागी नक्सली की राजनीति: देश को चाहिए गंभीर बहस, आरोपों का शोर नहीं
    Next Article दिमागी नक्सली की राजनीति: देश को चाहिए गंभीर बहस, आरोपों का शोर नहीं

    Related Posts

    दिमागी नक्सली की राजनीति: देश को चाहिए गंभीर बहस, आरोपों का शोर नहीं

    August 16, 2026

    दिमागी नक्सली की राजनीति: देश को चाहिए गंभीर बहस, आरोपों का शोर नहीं

    August 16, 2026

    अटल बिहारी वाजपेयी ‘अजातशत्रु’ थे, सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया: अमित शाह

    August 16, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    दिमागी नक्सली की राजनीति: देश को चाहिए गंभीर बहस, आरोपों का शोर नहीं

    रवीन्द्र नाथ महतो ने कहा: स्वतंत्रता केवल आजादी नहीं, समान अवसर और राष्ट्र-निर्माण की जिम्मेदारी भी

    दिमागी नक्सली की राजनीति: देश को चाहिए गंभीर बहस, आरोपों का शोर नहीं

    अटल बिहारी वाजपेयी ‘अजातशत्रु’ थे, सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया: अमित शाह

    मानसून सत्र: संसदीय मर्यादाओं का क्षरण और लोकतंत्र पर गंभीर प्रश्नचिह्न

    दिमागी नक्सली: राजनीतिक विमर्श में भाषा की मर्यादा पर गंभीर सवाल

    स्वतंत्रता दिवस पर रवीन्द्र नाथ महतो का आह्वान: समान अवसर और राष्ट्र-निर्माण की जिम्मेदारी

    मानसून सत्र: संसदीय मर्यादा का क्षरण और जनता के विश्वास पर चोट

    मानसून सत्र की विफलता: संसदीय मर्यादाओं का क्षरण कब तक?

    अमित शाह ने वाजपेयी को बताया ‘अजातशत्रु’, कहा- सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.