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    Home » सांझा साहित्य मंच की काव्य गोष्ठी में बिखरे भावों के विविध रंग, कवियों ने माँ को किया नमन
    राष्ट्रीय शिक्षा

    सांझा साहित्य मंच की काव्य गोष्ठी में बिखरे भावों के विविध रंग, कवियों ने माँ को किया नमन

    Devanand SinghBy Devanand SinghMay 10, 2026No Comments2 Mins Read
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    काव्य गोष्ठी
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    सांझा साहित्य मंच की काव्य गोष्ठी में बिखरे भावों के विविध रंग, कवियों ने माँ को किया नमन

    राष्ट्र संवाद संवाददाता
    करनाल, 10 मई 2026। सांझा साहित्य मंच की मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन रविवार को सेक्टर-12 स्थित हुडा कार्यालय परिसर में हुडा वर्कर यूनियन कार्यालय में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुरुक्षेत्र से आए साहित्यकार ओमबीर काजल ने की, जबकि संचालन कृष्ण कुमार निर्माण ने किया। मुख्य अतिथि अंग्रेज सिंह तथा विशिष्ट अतिथि दलीप खरैरा रहे।

    गोष्ठी में सामाजिक, धार्मिक और समसामयिक विषयों के साथ मातृत्व दिवस पर विशेष काव्य पाठ हुआ। कृष्ण कुमार निर्माण ने दोहों के माध्यम से कहा, “माँ ममता का रूप है, माँ है सकल जहान, माँ कल्पवृक्ष की छाया, माँ होती भगवान।” विभिन्न कवियों और शायरों ने माँ की महिमा, जीवन के संघर्ष, प्रेम और सामाजिक सरोकारों पर प्रभावशाली रचनाएँ प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

    कार्यक्रम में सतविंद्र कुमार राणा, प्रवीण जन्नत, लाभ सिंह आर्य, गुरमुख सिंह वड़ैच, सुदेश कुमारी, डॉ. श्याम प्रीत, प्रीति सिंह, धर्मेंद्र अरोड़ा ‘मुसाफिर’, दिलबाग अकेला, नरेश लाभ, सुषमा चोपड़ा, वैभव काजल, गुलाब फक्कर और सुरेंद्र कल्याण सहित अनेक साहित्यकारों ने अपनी रचनाएँ सुनाईं।

    गोष्ठी के दौरान उपस्थित साहित्यकारों ने नगरपालिका एवं फायर कर्मियों की हड़ताल का समर्थन करते हुए सरकार से वार्ता के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की। साथ ही देश में प्रेम, सहनशीलता और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने का संदेश दिया। कार्यक्रम में अविराज सिंह, शिवम कृष्ण, समर्पिता कृष्ण और अन्य साहित्य प्रेमी भी उपस्थित रहे।

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