6 घंटे चली रेड में भारी मात्रा में अवैध अंग्रेजी शराब बरामद, हिरासत में लिए गए तीनों कारोबारी छोड़े गए
राष्ट्र संवाद संवाददाता
चांडिल अनुमंडल के मिरुडीह गांव में अवैध बालू डिपो की आड़ में संचालित नकली अंग्रेजी शराब फैक्ट्री का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। जिला उत्पाद विभाग और चौका पुलिस की संयुक्त छापेमारी में भारी मात्रा में नकली शराब, बोतल, स्टिकर और निर्माण उपकरण जब्त किए गए।
हालांकि, पूरी कार्रवाई के बाद भी मुख्य आरोपियों पर शिकंजा कसने के बजाय मामला लीपापोती का शिकार होता नजर आ रहा है।
उत्पाद विभाग की रात 2:30 बजे से सुबह 8 बजे तक चली रेड
गुप्त सूचना के आधार पर की गई इस छापेमारी में करीब 6 घंटे तक कार्रवाई चली। टीम ने मौके से नामी ब्रांडों की नकली शराब बरामद की, जिनमें शामिल हैं:
मैकडॉवेल
आफ्टर डार्क
इंपीरियल ब्लू
बरामदगी का आंकड़ा:
750 एमएल – 900 बोतल
375 एमएल – 1800 बोतल
180 एमएल – 2448 बोतल
कुल 1790.64 लीटर अवैध शराब जब्त
इसके अलावा 30 खाली ड्रम और कई जार भी बरामद किए गए।
तीन कारोबारी हिरासत में, फिर ‘सेटिंग’ के बाद रिहा?
छापेमारी के दौरान तीन बालू कारोबारियों—प्रकाश गुप्ता साव, धीरज सिंह और अशोक दास—को हिरासत में लिया गया। ओर जिला कार्यालय के गए.बाद में पूछताछ के बाद छोड़ जाने की सूचना है, हिरासत में लिए गए , चर्चा है कि रात्रि 2 बजे ईचागढ़ चौका मार्ग में क्या कर रहे थे , कई अनसुलझे सवाल है जो विभाग के ऊपर सवालिया निशान लग रहे है.,
सूत्रों के अनुसार, इन्हें करीब 6 घंटे तक रखने के बाद “हाई लेवल डील” के तहत छोड़ दिया गया।
इस घटनाक्रम ने उत्पाद विभाग अधिकारी अखिलेश कुमार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों ने खोले कई राज
मौके पर सूत्रों की माने तो मौजूद ग्रामीणों ने अमन गुप्ता, बापी पांडा “टिंकू” और “आजाद” नामक युवकों सहित कई लोगों के नाम उजागर किए और अवैध कारोबार से जुड़ी अहम जानकारियां दीं।
सुबह होते-होते 20–25 लोगों की भीड़ मौके पर जुट गई और पुलिस-प्रशासन पर दबाव बनाने लगी।
विवादों में घिरे अधिकारी अखिलेश कुमार की अगुवाई
इस कार्रवाई का नेतृत्व उत्पाद विभाग के अधिकारी अखिलेश कुमार ने किया।
बताया जाता है कि इससे पहले भी नीमडीह में नकली शराब फैक्ट्री उद्भेदन मामले में गिरफ्तार आरोपी जिला उत्पाद कार्यालय हाजत से फरार हो गए थे, जिससे विभाग की किरकिरी हुई थी।
एक बार फिर गिरफ्तारी नहीं होना कई सवाल खड़े कर रहा है। बता दे विगत 5 वर्षों से अधिक कार्यकाल विवादों में रहने के बाद इन दिनों काफी चर्चा में है
कर्ताधर्ता कौन? फिर लीपापोती
सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी फैक्ट्री के पीछे असली संचालक कौन हैं?
पूरे मामले में किसी भी अधिकारी ने मौके पर बयान देने से परहेज किया।
जिला उत्पाद अधीक्षक ने फोन पर सिर्फ इतना कहा— “मामले की जांच की जाएगी।”

