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    Home » एम्बुलेंस नहीं, संवेदना भी नहीं नवजात का शव डिब्बे में ले जाने को मजबूर हुआ पिता
    चाईबासा झारखंड

    एम्बुलेंस नहीं, संवेदना भी नहीं नवजात का शव डिब्बे में ले जाने को मजबूर हुआ पिता

    Aman OjhaBy Aman OjhaMarch 8, 2026No Comments2 Mins Read
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    राष्ट्र संवाद संवाददाता 

    सांसद बिद्युत बरण महतो का सरकार और स्वास्थ्य व्यवस्था पर तीखा प्रहार

    चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल में एम्बुलेंस नहीं मिलने के कारण एक गरीब पिता को अपने नवजात शिशु का शव कार्डबोर्ड के डिब्बे में घर ले जाने की घटना बेहद हृदयविदारक, अमानवीय और झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था की शर्मनाक सच्चाई को उजागर करती है।

    जमशेदपुर के सांसद श्री बिद्युत बरण महतो ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था की असंवेदनशीलता और लापरवाही का जिंदा उदाहरण है।

     

    सांसद श्री महतो ने कहा कि सरकार बड़े-बड़े दावे करती है कि गरीबों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि एक गरीब पिता को अपने नवजात बच्चे के शव को डिब्बे में भरकर घर ले जाने की मजबूरी झेलनी पड़ती है। इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक स्थिति क्या हो सकती है।

     

    उन्होंने कहा कि अस्पताल में मौजूद जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों ने जिस तरह की संवेदनहीनता दिखाई है, वह मानवता को शर्मसार करने वाली है। यदि समय पर एम्बुलेंस की व्यवस्था कर दी जाती, तो कम से कम उस पिता को इस अपमानजनक स्थिति से नहीं गुजरना पड़ता।

     

    सांसद श्री महतो ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि अस्पतालों में बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं है, तो सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था के सारे दावे खोखले साबित होते हैं।

    उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों और स्वास्थ्य कर्मियों को तुरंत निलंबित किया जाए और पीड़ित परिवार को सम्मानजनक आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।

     

    सांसद श्री महतो ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि इस मामले में दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती है, तो यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि गरीबों की पीड़ा इस सरकार के लिए कोई मायने नहीं रखती।

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