‘राष्ट्र संवाद’ के 25 वर्ष: निष्पक्ष पत्रकारिता का गौरवशाली सफर
मुंबई (इंद्र यादव) पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, लेकिन इस स्तंभ को मज़बूती प्रदान करते हैं वे पत्रकार जो अपनी कलम को किसी सत्ता या प्रलोभन के आगे झुकने नहीं देते। जमशेदपुर की धरती से शुरू हुआ ‘राष्ट्र संवाद’ आज अपनी गौरवशाली यात्रा के 25 वर्ष पूरे कर चुका है। यह मील का पत्थर इस बात का प्रमाण है कि यदि इरादे नेक हों और सत्य के प्रति प्रतिबद्धता हो, तो सीमित संसाधनों में भी एक बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है।
एक विचार जो अभियान बन गया
‘राष्ट्र संवाद’ की शुरुआत महज़ एक समाचार पत्र के रूप में नहीं, बल्कि एक सामाजिक दायित्व के रूप में हुई थी। 32 पन्नों की एक मासिक ब्लैक एंड व्हाइट पत्रिका से शुरू हुआ यह सफर आज एक प्रतिष्ठित मीडिया समूह के रूप में हमारे सामने है। इस लंबी यात्रा के पीछे संपादक देवानंद सिंह जी की वह दूरदर्शी सोच है, जिसने हमेशा यह माना कि “पत्रकारिता अगर समझौतों की मोहताज हो जाए, तो वह जनहित नहीं कर सकती।”
निष्पक्षता: ‘राष्ट्र संवाद’ की असली शक्ति
जमशेदपुर जैसे औद्योगिक और राजनैतिक रूप से सक्रिय शहर में पत्रकारिता करना किसी चुनौती से कम नहीं है। यहाँ हर दिन नई घटनाएँ जन्म लेती हैं और समीकरण बदलते हैं। ऐसे में:
बिना किसी के पक्ष में झुके सच को सामने लाना।
सत्ता के गलियारों की सटीक टोह रखना।
आम जनता की समस्याओं को बिना डरे शासन तक पहुँचाना।
ये तमाम कार्य वही कर सकता है जिसमें ‘कलम का योद्धा’ बनने का साहस हो। देवानंद जी और उनकी टीम ने इसे बखूबी निभाया है।
सामाजिक चेतना का संवाहक
‘राष्ट्र संवाद’ ने केवल खबरें नहीं छापीं, बल्कि समाज की नब्ज को पहचाना है। जब समाज में निराशा का भाव होता है, तब निर्भीक पत्रकारिता ही जन-चेतना का संचार करती है। इस अखबार ने सिद्ध किया है कि पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य किसी को प्रसन्न करना नहीं, बल्कि समाज के सामने आईना रखना है।
“सरल कार्य तो हर कोई कर लेता है, लेकिन विपरीत परिस्थितियों में अपनी वैचारिक विरासत को बचाए रखना ही एक सच्चे पत्रकार की पहचान है।”
भविष्य की राह और अपेक्षाएँ
आज जब सूचनाओं की बाढ़ है और ‘फेक न्यूज’ का खतरा बढ़ा है, तब ‘राष्ट्र संवाद’ जैसे विश्वसनीय संस्थानों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। 25 वर्षों का यह अनुभव आने वाली पीढ़ी के पत्रकारों के लिए एक पाठशाला की तरह है। हम आशा करते हैं कि ‘राष्ट्र संवाद’ समूह इसी तरह निडरता के साथ लोकतंत्र के ढांचे को मज़बूत करता रहेगा और जन-सरोकारों को स्वर देता रहेगा।
राष्ट्र संवाद की पूरी टीम और देवानंद जी को इस रजत जयंती अवसर पर अनंत शुभकामनाएँ!

