राष्ट्र संवाद संवाददाता
जादूगोड़ा : ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध का असर अब बाजारों में भी दिखने लगा है। गैस सिलेंडर के दाम में प्रति सिलेंडर 60 रुपये की बढ़ोतरी के बाद अब थोक विक्रेताओं द्वारा आवश्यक खाद्य सामग्रियों के दाम भी बढ़ाए जाने लगे हैं। इसे लेकर मुनाफाखोरी और कालाबाजारी के आरोप लग रहे हैं।
जानकारी के अनुसार रिफाइंड खाद्य तेल के दाम में करीब 10 रुपये प्रति लीटर और सरसों तेल में लगभग 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है। वहीं चावल के दाम में भी करीब 50 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आई है। मसालों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, जिसमें मिर्च के दाम लगभग 40 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं।
बताया जा रहा है कि पहले 12 लीटर रिफाइंड तेल की पेटी 1310 रुपये में मिलती थी, जो अब बढ़कर 1450 रुपये हो गई है। वहीं पैकेट के वजन में भी कमी की शिकायत सामने आ रही है, जिससे उपभोक्ता परेशान हैं।
खुदरा विक्रेताओं का आरोप है कि कुछ थोक विक्रेता गोदामों में बड़ी मात्रा में माल स्टॉक कर कृत्रिम अभाव पैदा कर रहे हैं, ताकि बाद में ऊंचे दाम पर सामान बेचा जा सके। घाटशिला अनुमंडल और जमशेदपुर क्षेत्र में भी कई जगहों पर अतिरिक्त गोदाम लेकर खाद्य सामग्री जमा करने की बात सामने आ रही है।
लगातार बढ़ती महंगाई से खासकर मजदूर और मध्यम वर्गीय परिवार प्रभावित हो रहे हैं। गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने के बाद अब खाद्य सामग्रियों की कीमत बढ़ने से लोगों का घरेलू बजट बिगड़ने लगा है।
इस मामले में खुदरा विक्रेता संघ ने जिला उपायुक्त और जिला प्रशासन से मांग की है कि कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए स्टॉक सीमा तय की जाए, नियमित जांच-पड़ताल हो और छापेमारी अभियान चलाया जाए, ताकि बाजार में कृत्रिम महंगाई पर लगाम लग सके।

