25 बरस का सफर-कोरबा बना ऊर्जा राजधानी, 8 हजार मेगावाट बिजली से रोशन हो रहा देश
छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूरे
राष्ट्र संवाद ब्यूरो कमाल अहमद
कोरबा:- छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूरे हो गए हैं। इस अवधि के दौरान कोरबा में बिजली और कोयला उत्पादन के क्षेत्र में रिकार्ड प्रगति हुई है। जिले में सरकारी और निजी क्षेत्र के बिजली प्लांट की बदौलत देश दुनिया के मानचित्र में कोरबा जिले की एक अलग पहचान बनी है। कोरबा में आज राज्य पावर कंपनी के अलावा सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बिजली प्लांटो से लगभग 8 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। कोयला उत्पादन में भी कोरबा जिले की अपनी विशेष पहचान बनी है।
एक नवंबर 2000 को मध्यप्रदेश से अलग होकर जब छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ तब इस नवोदित प्रदेश के लिए आगे का सफर काफी चुनौतियों से भरा था। अपने 25 वर्षों के सफर में प्रदेश ने विभिन्न क्षेत्रों में विकास का कीर्तिमान बनाया है। कोरबा जिले में होने वाले बिजली व कोयला उत्पादन के चलते भी प्रदेश ने विकास की ऊंचाइयों को और छुआ है। जब छत्तीसगढ़ का गठन हुआ तब राज्य बिजली कंपनी के प्लांटों की उत्पादन क्षमता लगभग 1780 मेगावाट थी, जो अब बढ़कर 2840 मेगावाट हो गई है।
बीते 25 वर्षों के दौरान कोरबा में पावर कंपनी के एक नए बिजली प्लांट और विस्तार यूनिट की स्थापना हुई। वर्ष 2008 में डीएसपीएम की 500 मेगावाट प्लांट की स्थापना हुई और वर्ष 2013 में एचटीटीपी के 500 मेगावाट विस्तार प्लांट की भी स्थापना हुई। इसी तरह 2016 में जांजगीर के मड़वा में एक हजार मेगावाट के एक अन्य संयंत्र की स्थापना से कंपनी की बिजली उत्पादन क्षमता और भी बढ़ गई।
*कोरबा के कोयले से पूरी हो रही देश की ऊर्जा ज़रूरतें, कई राज्य हो रहे रोशन*
जिले में पावर सेक्टर के साथ ही कोल सेक्टर में भी काफी प्रगति हुई है। कोयला क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के दौरान लगभग 25 वर्ष पहले एसईसीएल के कोयला खदानों की उत्पादन क्षमता लगभग 60 मिलियन टन थी।
इसमें से कोरबा जिले में स्थित एसईसीएल की खदानों से ही लगभग 40 मिलियन टन कोयले का उत्खनन होता था। लेकिन वर्तमान में कोरबा क्षेत्र, कुसमुंडा, दीपका और गेवरा की खदानों की उत्पादन क्षमता बढ़कर 160 मिलियन टन से अधिक हो गई है। यहां के खदानों से निकलने वाले कोयले से ही

