बच्चे स्कूल से निकले, सुरक्षा व्यवस्था रास्ते में रह गई!
हादसा टला, लेकिन बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था बेनकाब
मृत्युंजय बर्मन,
राष्ट्र संवाद संवाददाता, सरायकेला
स्कूल की घंटी बजने तक बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी तय रहती है, लेकिन छुट्टी के बाद घर पहुंचने तक उनकी सुरक्षा कौन सुनिश्चित करता है? आदित्यपुर में शुक्रवार को सेंट्रल पब्लिक स्कूल के 13 बच्चों को लेकर जा रहा टेंपो पलटने की घटना ने स्कूली परिवहन व्यवस्था की गंभीर खामियां सामने ला दी हैं।
हादसे में कई बच्चे घायल हुए और दो को गंभीर चोटें आईं। घटना का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि एक ही ऑटो में चालक समेत 13 बच्चे सवार थे। सवाल है कि क्या वाहन की क्षमता, फिटनेस और सुरक्षा मानकों की कभी जांच हुई?
बच्चों ने चालक पर नशे में वाहन चलाने का आरोप लगाया है। पुलिस ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है। लेकिन आरोप की जांच जरूरी है, क्योंकि यदि चालक वास्तव में नशे में था तो यह केवल दुर्घटना नहीं, बल्कि बच्चों की जिंदगी के साथ गंभीर लापरवाही का मामला होगा।
सवाल स्कूल प्रबंधन से भी है। क्या स्कूल के पास बच्चों को लाने-ले जाने वाले वाहनों की सूची है? क्या चालकों का सत्यापन किया जाता है? क्या वाहन की क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने पर कोई निगरानी है?
ट्रैफिक पुलिस की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। स्कूल खुलने और छुट्टी होने के समय सड़कों पर विशेष निगरानी क्यों नहीं होनी चाहिए? वहीं अभिभावकों को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके बच्चे किस वाहन और किस चालक के साथ सफर कर रहे हैं।
बच्चों की सुरक्षा स्कूल, अभिभावक, वाहन चालक और प्रशासन, सभी की साझा जिम्मेदारी है। प्रशासन को अब जिले के स्कूली वाहनों का विशेष सुरक्षा ऑडिट कराना चाहिए। आज 13 बच्चे बच गए; कल किसी हादसे को रोकने के लिए क्या व्यवस्था अभी से जागेगी?

