*वन विभाग में गड़बड़ी की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर*
रांची: राज्य के वन विभाग में सरकारी और कैंपा फंड के इस्तेमाल में 1000 करोड़ से अधिक की कथित वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की गयी है। सेवानिवृत्त रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर आनंद कुमार ने एसएलपी दायर करते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने का आग्रह किया है। अदालत से सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और झारखंड एसीबी से प्रारंभिक जांच कराने तथा प्रधान महालेखाकार से विशेष ऑडिट कराने का अनुरोध किया गया है। प्रार्थी ने आरोप लगाया है कि सेवा अवधि और सेवा विस्तार समाप्त होने के बाद भी कुछ सेवानिवृत्त सहायक वन संरक्षक और रेंज फॉरेस्ट अधिकारियों से काम लिया गया।
*प्रस्तावित खर्च*
उनके नाम पर वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों का इस्तेमाल भी किए जाने का आरोप है। याचिका में कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में ऐसे वन क्षेत्रों के नाम पर भी राशि आवंटित की गई, जहां संबंधित अधिकारी पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके थे। उनके नाम पर लेटर ऑफ क्रेडिट जारी कर कैंपा, प्लान और नॉन-प्लान मद से राशि निकालने का आरोप लगाया गया है। आवेदन में फर्जी मस्टर रोल, माप पुस्तिका और खातों के जरिए राशि की निकासी की आशंका भी जताई गई है।
*चतरा के चार रेंज में अधिकारी नहीं, फिर भी खर्च का प्रस्ताव*
प्रधान मुख्य वन संरक्षक के 10 सितंबर के पत्र का भी हवाला दिया गया है। इसके अनुसार चतरा नॉर्थ वन प्रमंडल की राजपुर, कुंदा, चतरा अफॉरेस्टेशन और हंटरगंज अफॉरेस्टेशन रेंज में कोई रेंज फॉरेस्ट अफसर तैनात नहीं था और न ही किसी अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। इसके बावजूद इन रेंज में मजदूरों की मजदूरी और सामग्री पर खर्च का प्रस्ताव भेजा गया था।
