केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि महत्वाकांक्षी गगनयान अभियान का मानवरहित ट्रायल इसी साल दिसंबर में किया जाएगा। कोरोना महामारी के चलते तय टाइमलाइन से पिछडे़ इस मिशन का जिक्र वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में किया।वित्त मंत्री ने अंतरिक्ष अभियानों के लिए अंतरिक्ष विभाग पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 4469 करोड़ रुपये ज्यादा का आवंटन कर साफ कर दिया कि यह क्षेत्र सरकार के कोर बिंदुओं में शुमार रहेगा। गगनयान अभियान का पहला मानवरहित परीक्षण साल 2020 में किया जाना था। साल 2022 में सरकार इस अभियान के जरिये किसी भारतीय को अपने दम पर अंतरिक्ष में भेजना चाहती है।इसके लिए चार भारतीय अंतरिक्ष यात्रिों का प्रशिक्षण रूस में चल रहा है। कोरोना के कारण तय समय से पिछड़ने के चलते 2022 का लक्ष्य पिछड़ता दिख रहा था। लेकिन वित्त मंत्री के इसी साल अभियान रवाना करने की घोषणा के बाद अब 2022 का लक्ष्य करीब दिखने लगा है।अंतरिक्ष विभाग को वित्त वर्ष 2021-22 के लिए कुल 13,949 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसमें भी 8228 करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च के मद में दिए गए हैं, जिसे नई तकनीकों को आजमाने के लिए लिहाज से बेहद अहम कहा जा सकता है।पिछले साल इस विभाग को 13479.47 करोड़ रुपये मिले थे, लेकिन बाद में कोरोना महामारी के चलते इसे संशोधित कर 9500 करोड़ रुपये कर दिया गया था। वित्त वर्ष 2019-20 में 13,017.61 करोड़ रुपये का आवंटन हुआ था।
एनएसआईएल को भी मिले 700 करोड़ रुपये
अंतरिक्ष बजट में अंतरिक्ष विभाग के नवगठित कामर्शियल विंग न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) को भी 700 करोड़ रुपये का आवंटन मिला है। वित्तमंत्री ने बजट भाषण में एनएसएआई के इसी महीने 28 फरवरी को पीएसएलवी सी-51 लांच करने की घोषणा की, जो अपने साथ ब्राजील की सैटेलाइट के साथ ही कुछ छोटी घरेलू सैटेलाइट भी लेकर जाएगा।
4449 करोड़ रुपये ज्यादा का आवंटन हुआ अंतरिक्ष विभाग को
वित्त वर्ष 2021-22 के लिए अंतरिक्ष विभाग को मिले है 13949 करोड़
2020-21 के लिए दिए गए थे 13470 करोड़
2019-20 के लिए मिले थे 13017 करोड़

