राजकोषीय घाटे ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इसकी झलक सोमवार को पेश 2021-22 के आम बजट में भी देखने को मिली। बजट में पेश आंकड़े यह संकेत देने के लिए काफी हैं कि कोरोना की मार से बेहाल देश की आर्थिक सेहत अगले चार साल तक के लिए क्वारंटीन हो गई है।
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए बताया कि 2025-26 तक राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.5 फीसदी से नीचे लाने का प्रस्ताव है, जबकि सरकार ने 2020-21 के दौरान ही इस घाटे को 7.96 लाख करोड़ रुपये या जीडीपी के 3.5 फीसदी पर सीमित रखने का लक्ष्य रखा था। इससे जाहिर है कि महामारी के प्रसार पर अंकुश लगाने के लिए लगे लॉकडाउन से आर्थिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
वित्तमंत्री ने लोकसभा में बताया कि एक अप्रैल, 2021 से शुरू हो रहे नए वित्त वर्ष के दौरान राजकोषीय घाटा जीडीपी का 6.8 फीसदी रहने का अनुमान है। हालांकि, चालू वित्त वर्ष यानी 2020-21 में यह घाटा बढ़कर 9.5 फीसदी के उच्च स्तर पर पहुंच सकता है। इसका कारण कोविड-19 महामारी के बीच खर्च में बढ़ोतरी और राजस्व में कमी आना है। सरकार खर्च और प्राप्तियों के अंतर को पूरा करने के लिए बाजार से जो कर्ज लेती है, वह राजकोषीय घाटे का संकेतक है। 2019-20 में राजस्व प्राप्तियां कम रहने की वजह से राजकोषीय घाटा 4.6 फीसदी पर पहुंच गया था। वित्तमंत्री ने कहा कि सरकार की चालू वित्त वर्ष के बाकी दो महीनों में 80,000 करोड़ रुपये का कर्ज लेने की योजना है।
अर्थव्यवस्था में 7.7 फीसदी गिरावट
वित्तमंत्री ने बताया कि आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होने से चालू वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था में 7.7 फीसदी की गिरावट का अनुमान है।
50 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य सपना
मौजूदा आर्थिक विकास दर और राजकोषीय घाटे को देखते हुए 2024 तक देश को 50 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य सपने जैसा लग रहा है। हालांकि, यह लक्ष्य पाना संभव है, लेकिन इसके लिए सरकार को बड़े स्तर पर प्रयास करने होंगे। इसके लिए न केवल विकास दर को बढ़ाकर आठ फीसदी तक ले जाना होगा बल्कि इसे 2024 तक बरकरार भी रखना होगा। निवेश पर भी जोर देना होगा। महंगाई दर के साथ रुपये और डॉलर की विनिमय दर को काबू में रखना होगा। एक लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में देश को 55 साल लगे।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि कोरोना की वजह से हालात थोड़े मुश्किल हुए हैं, लेकिन सरकार का यह सपना जरूर पूरा होगा भले ही इसमें एक-दो साल देर हो जाए। कारोबारी हालात में सुधार को देखते हुए 2021-21 से आर्थिक वृद्धि दर में तेजी आएगी। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष भी 2021-22 के दौरान विकास दर 11.5 फीसदी रहने का अनुमान जता चुका है। अगर विकास दर की यही रफ्तार बनी रही तो सपना जरूर पूरा होगा।
विनिवेश…1.75 लाख करोड़ जुटाने का लक्ष्य, एलआईसी आईपीओ भी
सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और वित्तीय संस्थानों में हिस्सेदारी बेचकर 2021-22 में 1.75 लाख करोड़ जुटाने का लक्ष्य है। दो सरकारी बैंकों और एक बीमा कंपनी में भी हिस्सेदारी बेचने का इरादा है। वित्तमंत्री ने सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (पीएसई) नीति पेश करते हुए कहा, चार रणनीतिक क्षेत्रों को छोड़कर अन्य क्षेत्रों की सरकारी कंपनियों का विनिवेश किया जाएगा।
यह नीति रणनीतिक और गैर-रणनीतिक क्षेत्रों में विनिवेश की स्पष्ट रूपरेखा पेश करेगी। 2021-22 में आईडीबीआई बैंक, बीपीसीएल, शिपिंग कॉरपोरेशन, नीलांचल इस्पात निगम लि. और अन्य कंपनियों में हिस्सेदारी बेची जाएगी। सरकार एलआईसी के प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए विधायी संशोधन भी 2021-22 में लाएगी। नीति आयोग को रणनीतिक विनिवेश के लिए केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र कंपनियों की अगली सूची बनाने को कहा गया है। इसके अलावा, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों के स्वामित्व वाली जमीनों की बिक्री/पट्टेदारी के लिए एक विशेष इकाई (एसपीवी) बनाई जाएगी।
19499 करोड़ ही जुटा सकी है सरकार
2020-21 के बजट में निजीकरण और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में अल्पांश हिस्सेदारी की बिक्री से 2.10 लाख्र करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया था। सरकार चालू वित्त वर्ष में अब तक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों में अल्पांश हिस्सेदारी की बिक्री और शेयर पुनर्खरीद से 19,499 करोड़ ही जुटा सकी है।
पीएसबी को 20000 करोड़, बैड बैंक दिलाएगा एनपीए से राहत
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में 20,000 करोड़ रुपये डालने का प्रस्ताव है। इससे बैंकिंग क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी। इस रकम से बैंकों को पूंजी संबंधी नियामकीय शर्तें पूरी करने में आसानी होंगी। हालांकि, चालू वित्त वर्ष में सरकार ने इस उम्मीद में ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं किया था कि बैंक अपनी जरूरत के आधार पर बाजार से पूंजी जुटा लेंगे। 2019-20 में अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन देने के लिए बैंकों को 70,000 करोड़ रुपये दिए गए थे।
इसके अलावा, वित्तमंत्री ने बैड बैंक बनाने की घोषणा की है। इससे बैड लोन से जूझ रहे बैंकों को राहत मिलेगी। यह बैंक एक एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी (एआरसी) मॉडल पर आधारित होगा। यह कैसे काम करेगा, अभी साफ नहीं है। जानकारों का कहना है कि बैंक अपने फंसे कर्ज को छूट पर बैड बैंक को ट्रांसफर कर सकेंगे। उसके बाद बैड बैंक के विशेषज्ञ प्रोफेशनल तरीके से फंसे कर्ज की वसूली करेंगे। बैड बैंक का आइडिया नया नहीं है। 2018 में सरकार ने सरकारी बैंकों के लिए ‘प्रोजेक्ट सशक्त’ योजना की घोषणा की थी। इसके तहत सरकारी बैंकों के बैड लोन से निपटने के लिए पांच सूत्री बनाई गई थी।
जीएसटी…सुधार के कई कदम
पिछले कुछ महीनों में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के रिकॉर्ड संग्रह पर वित्तमंत्री ने खुशी जताई। कहा, जीएसटी के चार साल पूरे हो गए हैं। इस दौरान सरकार ने इस कर ढांचे को आसान बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें एसएमएस से शून्य रिटर्न दाखिल करना, छोटे करदाताओं के लिए मासिक भुगतान और तिमाही रिटर्न भरने की छूट, इलेक्ट्रॉनिक चालान प्रणाली, संशोधन योग्य जीएसटी रिटर्न आदि उपाय शामिल हैं।
जीएसटीएन प्रणाली का दायरा बढ़ाया गया है। कर चोरी करने वालों और फर्जी बिल बनाने वालों का पता लगाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद ली गई है, जिसके सुखद परिणाम मिले हैं। सीतारमण ने कहा, परिषद की चेयरमैन होने के नाते हम आश्वस्त करना चाहते हैं कि जीएसटी को और आसान बनाने के लिए आगे भी हर संभव कदम उठाकर खामियों को दूर करेंगे।
किसने क्या कहा
महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने कहा कि ‘अभूतपूर्व आर्थिक दबाव के बीच अर्थव्यवस्था को उबारने और देशवासियों की परेशानियां दूर करने के लिए सरकार की जिम्मेदारी थी कि वह पर्याप्त मात्रा में खर्च करे। बजट से मेरी अपेक्षा थी कि लक्षित वित्तीय घाटे के संदर्भ में हमें उदार होना चाहिए।’
वेदांता रिसॉर्सेज के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा कि ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को बेहद सुधारवादी बजट और दो सरकारी बैंकों व एक बीमा कंपनी के रणनीतिक विनिवेश सहित कई बड़े आइडिया के लिए बधाई।’
बायोकॉन की एग्जीक्यूटिव चेयरपर्सन किरण मजूमदार शॉ का कहना है कि ‘कुल मिलाकर यह बिना किसी नकारात्मक आश्चर्य के साथ एक पुन:आश्वस्त करने वाला बजट है, जिसने समग्र भावना को सक्रिय कर दिया है।’
आरपीजी एंटरप्राजेज के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने कहा कि ‘पुजारा और पंत की पारियों की साझेदारी-निरंतरता और तड़क-भड़क। आधारभूत ढांचे, व्यावसायिक कानून, कारोबारी सुगमता के साथ सार्वजनिक उपक्रमों की संपत्तियों से धन जुटाने, नए विनिवेश और बीमा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर फोकस करना होगा। भारत ने ऑस्ट्रेलिया में विजय पताका फहराया। अब भारत को नई विश्व व्यवस्था में ऊपर उठना होगा।’

