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    Home » अरुणाचल में घुसा चीन, बसा लिया गांव, बनाये 101 घर
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    अरुणाचल में घुसा चीन, बसा लिया गांव, बनाये 101 घर

    Devanand SinghBy Devanand SinghJanuary 19, 2021No Comments3 Mins Read
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    नई दिल्ली. एलएसी विवाद के बीच चीन विस्तारवाद की अपनी नीति से बाज़ नहीं आ रहा है. ऐसा इसलिए, क्योंकि भारत के उत्तर पूर्वी राज्य अरुणाचल प्रदेश में चीन ने गांव बना लिया है. वहां करीब 101 घर भी बन चुके हैं. यह खुलासा ताजा सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए हुआ है.

    Planet Labs Inc. के हवाले से अंग्रेजी न्यूज चैनल NDTV ने यह जानकारी दी है.

    1 नवंबर, 2020 की इन तस्वीरों को कई एक्सपर्ट्स को दिखाया गया तो उन्होंने अंग्रेजी चैनल से वहां निर्माण की पुष्टि की. बताया कि भारतीय जमीन पर लगभग साढ़े चार किलोमीटर के दायरे में इसे बनाया गया है और यह भारत के लिए बड़ी चिंता का विषय हो सकता है.

    यह गांव तसारी चू नदी के किनारे बसा है और ऊपरी सुबनसिरी जिले के तहत आता है. यह क्षेत्र भी लंबे समय से भारत और चीन के बीच सैन्य विवाद का विषय रहा है.

    ताजा फोटो (1 नवंबर, 2020) में जो निर्माण नजर आ रहा है, वह साल भर पहले (26 अगस्त, 2019) नहीं था. न ही वहां उस तरह की कोई गतिविधि नजर आई. ऐसे में माना जा रहा है कि यह गांव पिछले साल ही वहां बसा है. चैनल ने जब इन तस्वीरों को लेकर विदेश मंत्रालय से सवाल दागे तो बताया गया- भारत से सटे सरहदी इलाकों के पास चीन निर्माण कार्य कर रहा हैज्ऐसी रिपोर्ट्स हमनें हाल में देखीं. चीन इस तरह का निर्माण पिछले कुछ सालों में करता रहा है.

    हालांकि, मंत्रालय की ओर से यह भी कहा गया, कुछ समय से भारत की तरफ से भी बॉर्डर वाले इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर संबंधी विकास कार्य किया जा रहा है और सैन्य तैनाती भी की जा रही है. इसकी प्रमुख वजह दोनों मुल्कों के बीच पनपा तनाव है.

    इस गांव का निर्माण हिमालय की पूर्वी रेंज में हुआ है. हैरत की बात है कि चीन ने ऐसा तब किया है, जब भारत से एलएसी पर सीमा विवाद को लेकर दोनों मुल्कों के बीच तनातनी फिलहाल जारी है. भारत और चीन के बीच दशक की सबसे खूनी झड़प हजारों किमी दूर हिमालय के पश्चिमी हिस्से लद्दाख में हुई थी.

    बता दें कि जून में पिछले साल गलवान घाटी में भारत और चीन के जवानों के बीच खूनी संघर्ष हुआ था, जिसमें भारतीय सेना के 20 फौजी शहीद हो गए थे. हालांकि, चीन की पीपल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) को भी नुकसान हुआ था, मगर चीन ने इस बाबत चीजें सार्वजनिक नहीं की थीं कि उसके कितने जवान मारे गए.

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