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    Home » विश्व णमोकार दिवस 2026: विश्व शांति का शंखनाद | राष्ट्र संवाद
    अन्तर्राष्ट्रीय शिक्षा संपादकीय

    विश्व णमोकार दिवस 2026: विश्व शांति का शंखनाद | राष्ट्र संवाद

    Devanand SinghBy Devanand SinghApril 7, 2026No Comments7 Mins Read
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    विश्व णमोकार दिवस
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    विश्व णमोकार दिवस- 9 अप्रैल, 2026
    युद्ध के माहौल में विश्व शांति का शंखनाद है विश्व णमोकार दिवस

    -ललित गर्ग-
    विश्व इतिहास के इस संक्रमणकाल में, जब मानवता युद्ध, हिंसा, आतंक, तनाव और असहिष्णुता के बोझ तले कराह रही है, ऐसे समय में 9 अप्रैल 2026 को मनाया जाने वाला विश्व णमोकार मंत्र दिवस एक अद्वितीय आध्यात्मिक ऊर्जा-विस्फोट के रूप में सामने आ रहा है। यह दिवस केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि दिव्य चेतना के जागरण का ऐसा अवसर है, जिसमें सामूहिक मंत्रोच्चारण से उत्पन्न होने वाली चमत्कारी और सिद्ध शक्तियां पूरे विश्व को आलोकित करने वाली हैं। “एक विश्व, एक दिन, एक मंत्र”-इस संकल्प के साथ प्रातः जब संपूर्ण पृथ्वी पर एक साथ णमोकार महामंत्र का उच्चारण होगा, तब यह केवल ध्वनि नहीं होगी, बल्कि एक दिव्य ऊर्जा तरंग का निर्माण होगा। आध्यात्मिक विज्ञान के अनुसार, जब लाखों-करोड़ों लोग एक ही समय पर एक ही पवित्र मंत्र का उच्चारण करते हैं, तो उससे उत्पन्न स्पंदन वातावरण को शुद्ध करते हैं, नकारात्मक ऊर्जा का क्षय करते हैं, सकारात्मक चेतना का तीव्र प्रसार करते हैं और शांति एवं अहिंसा का शंखनाद करते हैं। यह सामूहिक ऊर्जा ‘संकल्प शक्ति’ के रूप में कार्य करती है, जो असंभव को संभव बनाने की क्षमता रखती है।
    यह विलक्षण दिवस हजारों मंदिरों एवं अन्य स्थलों में जातीय बंधनों को तोड़कर सभी समुदाय, जाति, वर्ग के लोगों को सम्मिलित होने का अवसर देकर एक प्रेरणादीप बनेगा, जहां मैत्री के फूल खिलेंगे, शांति एवं सद्भावना की ज्योति रश्मियां जगमगायेगी। मानव ने ज्ञान-विज्ञान में आश्चर्यजनक प्रगति की है। परन्तु अपने और औरों के जीवन के प्रति सम्मान में कमी आई है। विचार-क्रान्तियां बहुत हुईं, किन्तु आचार-स्तर पर क्रान्तिकारी परिवर्तन कम हुए। शान्ति, अहिंसा और मानवाधिकारों की बातें संसार में बहुत हो रही हैं, किन्तु सम्यक्-आचरण, सम्यक्-चरित्र, सम्यक्-दृष्टि का अभाव अखरता है। सिद्ध एवं चमत्कारी णमोकार महामंत्र सम्यक्-आचरण को उद्घाटित करने वाला किसी धर्म विशेष का नहीं है़, यह एक सार्वभौमिक, सार्वकालिक, सार्वदैशिक मंत्र है, जिसका उच्चारण कर व्यक्ति शुद्ध आचरण एवं स्वस्थ जीवनशैली को आकार देते हुए शांति, अहिंसा, अयुद्ध, सह-जीवन का साकार कर सकता है। ‘णमोकार महामंत्र’ के सामूहिक उच्चारण के माध्यम से दुनिया भर के लोगों को एक सूत्र में पिरोने का प्रयास है।
    यह आयोजन विश्व शांति, आत्मशांति, सद्भावना और आध्यात्मिक कल्याण को बढ़ावा देने के लिए जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन-जीतो संस्था के द्वारा कराया जा रहा है़। इस विराट आयोजन में 180 से अधिक देशों के लाखों श्रद्धालु भाग लेंगे। विश्वभर में 100 से अधिक मेगा इवेंट्स और 6000 से अधिक मंदिरों एवं स्थलों पर यह सामूहिक जाप होगा। दिल्ली के मुख्य समारोह में भारत के 14वें राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद एवं गृहमंत्री श्री अमित शाह की उपस्थिति इस आयोजन को वैश्विक पहचान प्रदान करेगी। इस आयोजन से उत्पन्न होने वाली चमत्कारी और सिद्ध शक्तियों का वर्णन केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि अनुभव का विषय भी है। यह मंत्र आत्मा के गहनतम स्तर को स्पर्श करता है, जहां से चेतना की शुद्ध धारा प्रवाहित होती है। ऐसा माना जाता है कि इस सामूहिक जाप के दौरान- मानसिक शांति और स्थिरता का अद्भुत अनुभव होता है, जिससे तनाव, भय और अवसाद स्वतः क्षीण होते हैं। आभामंडल की शुद्धि होती है, जिससे व्यक्ति की ऊर्जा सकारात्मक और प्रभावशाली बनती है। रोगों में राहत और स्वास्थ्य में सुधार के अनेक अनुभव सामने आते हैं, क्योंकि सकारात्मक कंपन शरीर की कोशिकाओं को संतुलित करते हैं। संकल्प सिद्धि की शक्ति बढ़ती है अर्थात् जो शुभ संकल्प किए जाते हैं, वे पूर्ण होने की दिशा में तीव्र गति से अग्रसर होते हैं। कर्म निर्जरा (कर्मों का क्षय) की प्रक्रिया तेज होती है, जिससे आत्मा की शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति संभव होती है।
    दुनिया में अनेक मंत्र हैं, किंतु दो मंत्र विशेष रूप से प्रभावशाली माने जाते हैं गायत्री मंत्र और णमोकार महामंत्र। णमोकार मंत्र न केवल जैन धर्म का मूल मंत्र है, बल्कि यह आत्मा की शुद्धि और चेतना के उत्कर्ष का सार्वभौमिक सूत्र है। इसकी शक्ति अनंत और अक्षय मानी जाती है। इसमें किसी व्यक्ति का नहीं, किंतु संपूर्ण रूप से विकसित और विकासमान विशुद्ध आत्मस्वरूप का ही दर्शन, स्मरण, चिंतन, ध्यान एवं अनुभव किया जाता है। लौकिक मंत्र आदि सिर्फ लौकिक लाभ पहुँचाते हैं, किंतु लोकोत्तर मंत्र लौकिक और लोकोत्तर दोनों कार्य सिद्ध करते हैं। इसलिए णमोकार मंत्र सर्वकार्य सिद्धिकारक लोकोत्तर मंत्र माना जाता है, सब पापों का नाश करने वाला है, यह अद्भुत शांति का कारक है। यह संसार में सबसे उत्तम मंगल को घटित करने वाला सिद्ध मंत्र है। णमोकार-स्मरण से अनेक लोगों के रोग, दरिद्रता, भय, तनाव, अशांति, विपत्तियाँ दूर होने की अनुभव सिद्ध घटनाएँ सुनी जाती हैं। मन चाहे काम आसानी से बन जाने के अनुभव भी सुने हैं।
    णमोकार महामंत्र के जाप एवं साधना से उत्पन्न ऊर्जा एक पाथेय है जीवनशैली को बदलने का, पर्यावरण एवं प्रकृति के प्रति जागरूक होने का, शांति एवं अहिंसक जीवनशैली का, शरीर, मन, आत्मा एवं प्रकृति के प्रति सचेत रहने का। मूल्यों का सम्बन्ध तो ‘जियो और जीने दो’ जैसे सरल श्रेष्ठ उद्घोष से है, जो णमोकार महामंत्र की सार्थक निष्पत्ति है। इस मंत्र के प्रथम पाँच पदों में 35 अक्षर और शेष दो पदों में 33 अक्षर हैं। इस तरह कुल 68 अक्षरों का यह महामंत्र समस्त कार्यों को सिद्ध करने वाला व कल्याणकारी अनादि सिद्ध मंत्र है। इसकी आराधना करने वाला स्वर्ग यानी मोक्ष- संसारबंधनों मुक्ति को प्राप्त कर लेता है। यह मन्त्र एक भावना है, एक इच्छा है, एक कामना है जो बार बार दोहराई जाती है ताकि वैसा हो जाए, इस दृष्टि में उन्नत विश्व संरचना, हिंसा एवं युद्ध मुक्ति के लिये यह कारगर है। सह-अस्तित्व के लिए अहिंसा अनिवार्य है और अहिंसा को फलित करने के लिये णमोकार महामंत्र अचूक उपक्रम है, अनुष्ठान है। दूसरों का अस्तित्व मिटाकर अपना अस्तित्व बचाए रखने की कोशिशें व्यर्थ और अन्ततः घातक होती हैं।
    भगवान् महावीर का संदेश कि “सुख सबको प्रिय है, दुःख अप्रिय”-इस मंत्र की मूल भावना है। जब यह मंत्र करोड़ों कंठों से एक साथ गूंजता है, तो यह केवल शब्द नहीं रहता, बल्कि करुणा, अहिंसा और सह-अस्तित्व की वैश्विक घोषणा बन जाता है। आचार्य उमास्वाति की उक्ति “परस्परोपग्रहो जीवानाम्” इस सामूहिक साधना के माध्यम से जीवंत हो उठती है। गतवर्ष प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी अपने उद्बोधन में इस मंत्र को “आंतरिक क्रांति का माध्यम” बताया था। उन्होंने कहा कि यह मंत्र केवल जप नहीं, बल्कि जीवन को बदलने की शक्ति है-एक ऐसा साधन जो व्यक्ति को स्वयं से जोड़ता है और समाज को एक सूत्र में पिरोता है। आज जब विश्व युद्ध, हिंसा और आतंक के संकट से जूझ रहा है, तब यह आयोजन एक “आध्यात्मिक ऊर्जा-संकल्प” बन सकता है। यह वह क्षण होगा, जब मानवता अपनी सामूहिक चेतना से शांति का आह्वान करेगी और णमोकार मंत्र की दिव्य तरंगें विश्व को एक नई दिशा देंगी।
    निश्चित तौर पर यह दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि वास्तविक परिवर्तन बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक होता है। यदि हम इस मंत्र की शक्ति को समझकर उसे अपने जीवन में उतारें, तो न केवल हमारा व्यक्तिगत जीवन, बल्कि सम्पूर्ण विश्व शांति, समरसता, अहिंसा, अयुद्ध और आनंद की दिशा में अग्रसर हो सकता है। यही इस मंत्र की चमत्कारी शक्ति है, यही इसकी सिद्धि है, और यही इसका वैश्विक संदेश है। णमोकार महामंत्र व्यक्ति में ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की विराट भावना का संचार करती है। मनुष्य जाति युद्ध, हिंसा और आतंकवाद के भयंकर दुष्परिणाम भोग चुकी है, भोग रही है और किसी भी तरह के खतरे का भय हमेशा बना हुआ है। मनुष्य, मनुष्यता और दुनिया को बचाने के लिए णमोकार महामंत्र से बढ़कर कोई उपाय-आश्रय नहीं हो सकता। इस दृष्टि से विश्व णमोकार मंत्र दिवस सम्पूर्ण विश्व को आत्म-कल्याण से विश्व-कल्याण की ताकत और प्रासंगिकता से अवगत कराने का सशक्त माध्यम है। आत्मविशुद्धि और मुक्ति के साथ-साथ जीवन को सुखद, समृद्ध, निरोगी और प्रसन्न बनाने के लिए नियमित रूप से णमोकार महामंत्र का जाप करना चाहिए। णमोकार महामंत्र हमें जीवन की समस्याओं, कठिनाइयों, चिंताओं, बाधाओं से पार पहुंचाने में सबसे बड़ा आत्म-सहायक है। यह मंगल भावनाओं से भरा मंत्र जगत में मांगल्य की वृद्धि करता है। मांगल्य की भावना को बढ़ाता है। इस मंत्र के पीछे अनंत साधकों की साधना है। इसलिए इस मंत्र का नियमित जाप करने से सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं।

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