

जमशेदपुर की बेटी उत्कर्षा सिन्हा ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि छोटे शहरों के सपनों की उड़ान आसमान छू सकती है। उत्कर्षा सिन्हा फेलोशिप का गौरवपूर्ण समापन राष्ट्रपति भवन में महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के साथ हुआ। यह क्षण न सिर्फ उत्कर्षा के लिए, बल्कि पूरे जमशेदपुर के लिए गर्व का विषय है।
5000 आवेदकों में से 40 का चयन, उत्कर्षा ने बनाई जगह
देशभर से 5,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे। कठिन चयन प्रक्रिया के बाद मात्र 40 युवाओं को इस प्रतिष्ठित फेलोशिप के लिए चुना गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के विजन से प्रेरित इस कार्यक्रम का हिस्सा बनना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। उत्कर्षा का चयन उनकी मेहनत और लगन का प्रमाण है।
उत्कर्षा सिन्हा फेलोशिप: शिक्षा और संघर्ष की दास्तान
उत्कर्षा ने अपनी स्कूली शिक्षा केरला समाजम मॉडल स्कूल, जमशेदपुर से पूरी की। इसके बाद उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से राजनीति विज्ञान में स्नातक और एमिटी विश्वविद्यालय, नोएडा से लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। उनकी शैक्षणिक यात्रा जमशेदपुर से काशी और फिर नोएडा तक फैली रही।
दिग्गज नेताओं से संवाद का मिला दुर्लभ अवसर
फेलोशिप के दौरान उत्कर्षा ने महाराष्ट्र के नांदेड़ से राज्यसभा सांसद डॉ. अजीत माधवराव गोपछड़े के साथ कार्य किया। इस क्रम में उन्हें देश के शीर्ष नेतृत्व से रूबरू होने का मौका मिला। उन्हें विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, पीयूष गोयल, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और उपराष्ट्रपति सहित कई गणमान्य व्यक्तियों से संवाद करने का अवसर मिला। प्रतिभागियों ने समूहगत एवं व्यक्तिगत शोध पत्र भी तैयार किए।
“यह फेलोशिप मेरे लिए सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का संकल्प लेने का मंच था। राष्ट्रपति भवन में समापन एक सपने के सच होने जैसा है।” – उत्कर्षा सिन्हा
परिवार का साथ, पिता का विश्वास बना ताकत
उत्कर्षा अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता संजू आनंद के विश्वास और पूरे परिवार के सहयोग को देती हैं। उनके पिता सफल व्यवसायी हैं, जबकि मां उपासना सिन्हा प्रतिष्ठित कवयित्री हैं। वह अपनी दीदी आकांक्षा और जीजाजी विनीत को भी अपनी ताकत मानती हैं। इस पारिवारिक पृष्ठभूमि ने उन्हें हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
राष्ट्रसेवा ही है अंतिम लक्ष्य
उत्कर्षा का लक्ष्य राष्ट्रसेवा के माध्यम से समाज और देश के विकास में योगदान देना है। उनका मानना है कि यूपीएससी सिविल सेवा राष्ट्रसेवा का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन देश की सेवा के लिए केवल एक ही रास्ता जरूरी नहीं है। उनके अनुसार, युवाओं की सक्रिय भागीदारी और सकारात्मक सोच से विकसित भारत के संकल्प को मजबूती मिल सकती है।
उत्कर्षा की यह कहानी जमशेदपुर के हर युवा के लिए प्रेरणास्रोत है। अधिक जानकारी के लिए राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।

