लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
रांची में शुक्रवार शाम को JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच के बैनर तले आयोजित पुतला दहन कार्यक्रम उस समय हिंसक झड़प में तब्दील हो गया जब झामुमो कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारी छात्रों से पुतला छीनने का प्रयास किया। अल्बर्ट एक्का चौक पर हुए इस पूरे घटनाक्रम ने राजधानी की राजनीति को गरमा दिया है।
JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच के पुतला दहन कार्यक्रम में कैसे भड़का विवाद
रांची। अल्बर्ट एक्का चौक पर शुक्रवार शाम JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच के पुतला दहन कार्यक्रम के दौरान हंगामा हो गया। मंच का आरोप है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान झामुमो कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और छात्रों से पुतला छीन लिया, जिसके बाद दोनों पक्षों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि कुछ देर के लिए यातायात पूरी तरह बाधित रहा और भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। छात्र नेताओं का दावा है कि वे शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे, तभी सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं ने जबरन कार्यक्रम को बाधित किया।
छात्र नेता रविंद्र पासवान ने लगाए गंभीर आरोप
रिफॉर्म्स मंच के नेता रविंद्र पासवान ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद सरकार के विरोध में राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर पुतला दहन का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। रांची में छात्र शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे, इसी दौरान झामुमो कार्यकर्ताओं के पहुंचने के बाद विवाद की स्थिति बनी। रविंद्र पासवान ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हाईकोर्ट के हालिया निर्णय ने लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य को अधर में लटका दिया है। सरकार की निष्क्रियता और JPSC-JSSC की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की कमी के खिलाफ यह प्रदर्शन आयोजित था। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं ने गुंडागर्दी की और लोकतांत्रिक अधिकार का हनन किया।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद राज्यव्यापी आंदोलन की रूपरेखा
झारखंड हाईकोर्ट द्वारा JPSC और JSSC की विभिन्न परीक्षाओं से संबंधित एक अहम फैसला सुनाए जाने के बाद से ही प्रदेश भर के अभ्यर्थियों में रोष व्याप्त है। JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच लंबे समय से परीक्षा प्रणाली में सुधार, रिजल्ट में पारदर्शिता और बैकलॉग वैकेंसी भरने की मांग कर रहा है। शुक्रवार का कार्यक्रम इसी कड़ी का हिस्सा था, जिसके तहत धनबाद, जमशेदपुर, बोकारो, हजारीबाग समेत सभी 24 जिलों में समानांतर रूप से पुतला दहन का आह्वान किया गया था। रांची का कार्यक्रम सबसे प्रमुख था क्योंकि यहां मंच के केंद्रीय नेतृत्व समेत सैकड़ों अभ्यर्थी जुटे थे।
प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
हंगामे के दौरान अल्बर्ट एक्का चौक पर कुछ देर अफरा-तफरी का माहौल रहा। मौके पर मौजूद पुलिस-प्रशासन ने हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया। हालांकि, मंच ने घटना को लेकर प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। छात्र नेताओं का कहना है कि जब झामुमो कार्यकर्ता पुतला छीनने आए तो पुलिस मूकदर्शक बनी रही। बाद में हल्का बल प्रयोग कर दोनों पक्षों को अलग किया गया। इस घटना के बाद कोतवाली थाना क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलने पर प्राथमिकी दर्ज कर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और आगे की रणनीति
वहीं, मामले में झामुमो की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विपक्षी दल भाजपा ने इस घटना को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने बयान जारी कर कहा कि छात्रों की आवाज दबाने के लिए सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं, कांग्रेस और राजद ने भी छात्रों पर हुए कथित हमले की निंदा की है। JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच ने ऐलान किया है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। मंच ने अगले सप्ताह राजभवन मार्च निकालने की चेतावनी दी है। इस पूरे प्रकरण ने झारखंड की छात्र राजनीति को एक नया मोड़ दे दिया है।
झारखंड में सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए JPSC और JSSC की परीक्षाएं जीवन-मरण का प्रश्न बनी हुई हैं। बार-बार पेपर लीक, रिजल्ट में गड़बड़ी और कोर्ट केस के चलते नियुक्तियां वर्षों लंबित रहती हैं। ऐसे में छात्रों का आक्रोश स्वाभाविक है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को जल्द से जल्द एक उच्च स्तरीय समिति गठित कर परीक्षा प्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन करना चाहिए ताकि युवाओं का विश्वास बहाल हो सके। झारखंड हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर हालिया फैसलों का अवलोकन किया जा सकता है।
- मुख्य मांग: JPSC-JSSC परीक्षाओं में पारदर्शिता और समयबद्ध परिणाम।
- घटना स्थल: अल्बर्ट एक्का चौक, रांची।
- मुख्य आरोप: झामुमो कार्यकर्ताओं द्वारा पुतला छीनना और मारपीट।
- प्रशासनिक कार्रवाई: स्थिति नियंत्रण, जांच का आश्वासन।

