लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
झारखंड के धनबाद जिले में छाताबाद भू-धंसान की त्रासदी अब सियासी अखाड़े में तब्दील होती नजर आ रही है। प्रभावित ग्रामीणों के आशियाना बचाओ आंदोलन को लेकर जहां एक ओर प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज है, वहीं दूसरी ओर इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी ने माहौल को गरमा दिया है। ताजा मामला धनबाद के सांसद ढुलू महतो के एक कथित बयान से जुड़ा है, जिसने कांग्रेस खेमे में जबरदस्त आक्रोश पैदा कर दिया है।
छाताबाद क्षेत्र लंबे समय से भूमिगत आग और भू-धंसान की चपेट में है, जिससे हजारों परिवारों के सामने विस्थापन का संकट खड़ा हो गया है। बीसीसीएल प्रबंधन और जिला प्रशासन की ओर से पुनर्वास की प्रक्रिया धीमी गति से चलने के कारण ग्रामीणों में भारी नाराजगी व्याप्त है। इसी क्रम में 16 अगस्त को आयोजित धरना-प्रदर्शन में कांग्रेस के दिग्गज नेताओं की उपस्थिति ने इस आंदोलन को राजनीतिक धार दे दी। लेकिन धरना समाप्त होने के बाद सांसद ढुलू महतो की ओर से सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणी ने आग में घी डालने का काम किया।
ढुलू महतो के बयान ने भड़काई आग
बाघमारा। छाताबाद भू-धंसान मामले को लेकर चल रहे आशियाना बचाओ आंदोलन के बीच कांग्रेस और धनबाद सांसद ढुलू महतो के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है।
कांग्रेसियों के अनुसार, 16 अगस्त को छाताबाद में प्रभावित लोगों के धरने में मंत्री इरफान अंसारी, कांग्रेस प्रदेश प्रभारी के. राजू, बेरमो विधायक अनूप सिंह समेत कई कांग्रेस नेता शामिल हुए थे। आरोप है कि इसके बाद ढुलू महतो ने सोशल मीडिया समेत अन्य माध्यमों से धरने में शामिल कांग्रेस नेताओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की।
बयान के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सांसद से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। कांग्रेस कतरास नगर कमिटी प्रभारी अवध नारायण प्रसाद के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में वरिष्ठ नेता अशोक प्रकाश लाल समेत कई कार्यकर्ता मौजूद रहे। नेताओं ने चेतावनी दी कि माफी नहीं मांगी गई तो चरणबद्ध तरीके से विरोध जारी रखा जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं यह आर-पार की लड़ाई
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बाघमारा विधानसभा क्षेत्र में ढुलू महतो का दबदबा लंबे समय से रहा है, लेकिन हाल के दिनों में कांग्रेस की सक्रियता ने उनके सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। छाताबाद का मुद्दा स्थानीय बनाम बाहरी के साथ-साथ विस्थापन नीति पर भी केंद्रित है। कांग्रेस इस मुद्दे को भुनाकर ग्रामीण इलाकों में अपनी पैठ मजबूत करना चाहती है, जबकि सांसद ढुलू महतो अपने समर्थक आधार को एकजुट रखने के लिए आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं।
इस घटनाक्रम ने धनबाद जिले की राजनीति में नए समीकरणों के संकेत दे दिए हैं। कतरास थाना चौक पर हुए पुतला दहन में भारी संख्या में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी यह दर्शाती है कि कांग्रेस इस मुद्दे को आसानी से ठंडा नहीं पड़ने देना चाहती। आने वाले दिनों में अगर सांसद की ओर से माफी नहीं मांगी जाती है, तो जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड स्तर तक विरोध प्रदर्शन का सिलसिला तेज हो सकता है।
आगे की रणनीति पर मंथन जारी
कांग्रेस कतरास नगर कमिटी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यह विरोध सांकेतिक नहीं, बल्कि निर्णायक होगा। पार्टी के जिला नेतृत्व ने भी इस मुद्दे पर केंद्रीय नेतृत्व को अवगत करा दिया है। वहीं, सांसद खेमा फिलहाल चुप्पी साधे हुए है, लेकिन उनके समर्थक सोशल मीडिया पर जवाबी हमला बोल रहे हैं। इस टकराव का असर आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर पड़ना तय माना जा रहा है। स्थानीय जनता की नजर अब दोनों पक्षों के अगले कदम पर टिकी हुई है।

