यूसील ने ब्लैकलिस्टेड कंपनी को दिया 16 करोड़ का दवाई टेंडर, केके फार्मा पर गुणवत्ता और सप्लाई को लेकर सवाल तेज
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जादूगोड़ा। यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसील) प्रबंधन ने ब्लैकलिस्टेड और नकली दवाई बनाने के आरोपित कंपनी केके फार्मा को 16 करोड़ रुपये का ब्रांडेड दवाई का टेंडर दे दिया है। 16 जुलाई से काउंटर खुलने के बाद से ही कंपनी द्वारा सही तरीके से दवाइयाँ नहीं दी जा रही हैं और दवाइयों की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।

राष्ट्र संवाद में खबर प्रकाशित होने के बाद संयुक्त यूनियन के नेताओं ने नाराजगी जताई और कहा कि वे डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी एवं यूसील सीएमडी से मिलकर जांच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग करेंगे। यूनियन का आरोप है कि ब्रांडेड दवाओं के नाम पर नकली दवाई देने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
नेताओं ने दवा जांच कमेटी में यूनियन प्रतिनिधियों को शामिल करने की मांग की और सवाल उठाया कि पहले 5 करोड़ का जेनेरिक टेंडर और अब 16 करोड़ का ब्रांडेड दवाई का टेंडर आखिर कैसे दिया गया? उन्होंने बताया कि केके फार्मा के मालिक कमल गुप्ता पर जुगसलाई और बर्मा माइंस थाने में मामले दर्ज हैं।

यूसील कर्मियों और पूर्व कर्मचारियों में नाराजगी है। उनका कहना है कि दवाई सुचारू रूप से नहीं मिल रही, मरीज परेशान हैं और केके फार्मा को हटाने की मांग हो रही है।
वहीं कई डॉक्टरों ने भी कंपनी को टेंडर दिए जाने पर असंतोष जताया। सीएमओ डॉ. मानस कुमार रजक और डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।

यूनियन नेताओं ने प्रशासनिक अधिकारी ए.के. अंसारी, जो सात साल से एक ही पद पर हैं, को भी हटाने की मांग की और कहा कि उनके आने के बाद से यूसील अस्पताल की व्यवस्था बदहाल हो चुकी है।

