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    ब्लैकलिस्टेड सप्लायर को 16 करोड़ का टेंडर, यूसील प्रबंधन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

    ब्लैकलिस्टेड सप्लायर को 16 करोड़ का टेंडर, यूसील प्रबंधन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप क्या दवा के खेल में कोई बड़ा खेल चल रहा है? ब्रांडेड दवा के नाम पर सब्सीट्यूट!
    News DeskBy News DeskJuly 26, 2025No Comments2 Mins Read
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    ब्लैकलिस्टेड सप्लायर को 16 करोड़ का टेंडर, यूसील प्रबंधन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

    क्या दवा के खेल में कोई बड़ा खेल चल रहा है?

    ब्रांडेड दवा के नाम पर सब्सीट्यूट!

    राष्ट्र संवाद मुख्य संवाददाता
    जादूगोड़ा : यूसील अस्पताल प्रबंधन द्वारा ब्रांडेड दवाओं की आपूर्ति के लिए जमशेदपुर की के.के. फार्मा को 2 वर्षों के लिए 16 करोड़ रुपये का टेंडर दिए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। 16 जुलाई से दवा काउंटर खुलने के बावजूद कर्मियों को जरूरी दवाएं नहीं मिल रही हैं, जिससे वे बेहद परेशान हैं।

     

     

    कई पूर्व कर्मियों का आरोप है कि ब्रांडेड दवाओं के नाम पर उन्हें सस्ते सब्सीट्यूट थमा दिए जा रहे हैं, जिससे दवा की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। इसके साथ ही टेंडर प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर आपत्तियां उठी हैं।

    आउटसोर्सिंग कंपनियों का दावा है कि के.के. फार्मा के मालिक कमल गुप्ता यूसील द्वारा पहले से ही ब्लैकलिस्टेड हैं और उनके खिलाफ नकली सैनिटाइजर और दवाओं से संबंधित मामले बर्मामाइंस और जुगसलाई थानों में दर्ज हैं।

    बर्मामाइंस थाना में 25 मार्च 2020 को दर्ज केस (कांड संख्या 25/2020) में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 120बी और 18C समेत कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। इसके बावजूद, यूसील प्रबंधन द्वारा इन्हें टेंडर देना नियमों और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।

     

    आउटसोर्सिंग कंपनियों का यह भी आरोप है कि टेंडर शर्तों की अनदेखी कर निजी लाभ के उद्देश्य से के.के. फार्मा को टेंडर दिया गया। सप्लाई में लापरवाही और गुणवत्ता की अनदेखी से कर्मियों में भारी रोष है, उन्हें रोज बिना दवा के लौटना पड़ रहा है।

    सूत्रों के अनुसार, यूसील अस्पताल के कुछ डॉक्टर शीघ्र सेवानिवृत्त होने वाले हैं, जिससे पूरे टेंडर मामले में मिलीभगत की आशंका और गहरी होती जा रही है।

    अब सवाल उठता है कि यूसील प्रबंधन इस गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है? आउटसोर्सिंग कंपनियों ने जल्द ही सीएमडी से मुलाकात कर इस पूरे मामले की शिकायत करने की बात कही है।

     


    *बड़ा सवाल*
    क्या दवा के खेल में कोई बड़ा खेल चल रहा है?
    भविष्य में जांच और कार्रवाई की मांग जोरों पर है।

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