Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » एसआईआर पर विपक्ष का आरोप संवेदनशील
    Breaking News Headlines उत्तर प्रदेश ओड़िशा खबरें राज्य से चाईबासा जमशेदपुर झारखंड पटना पश्चिम बंगाल बिहार बेगूसराय मुंगेर मुजफ्फरपुर राजनीति राष्ट्रीय संपादकीय समस्तीपुर

    एसआईआर पर विपक्ष का आरोप संवेदनशील

    News DeskBy News DeskJuly 26, 2025No Comments6 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    एसआईआर पर विपक्ष का आरोप संवेदनशील
    देवानंद सिंह
    बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों की सरगर्मी कई दिनों से जोरों पर है, लेकिन इस बार चुनावी तैयारियों के केंद्र में राजनीतिक दलों के घोषणापत्र या जातिगत समीकरण नहीं, बल्कि चुनाव आयोग द्वारा शुरू किया गया ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (एसआईआर) प्रक्रिया है, हालांकि, आयोग इसे मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने की एक नियमित प्रक्रिया बता रहा है, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि इसके ज़रिए नागरिकता की जांच ‘पिछले दरवाज़े’ से की जा रही है। यह आरोप संवेदनशील इसलिए भी है, क्योंकि यह सवाल भारतीय लोकतंत्र के सबसे मूलभूत स्तंभ मताधिकार और नागरिकता के अधिकार को छूता है।

     

    उल्लेखनीय है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 से 329 तक निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनावों की संकल्पना की गई है। इनमें अनुच्छेद 324 चुनाव आयोग की स्थापना और अधिकारों को निर्धारित करता है, जबकि अनुच्छेद 326 के तहत हर भारतवासी, जिसकी उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक है और जो अन्यथा अयोग्य नहीं है, उसे वोट देने का अधिकार प्राप्त है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 16 यह स्पष्ट करती है कि ग़ैर-नागरिक व्यक्ति मतदाता सूची में नाम दर्ज नहीं करवा सकता, जबकि धारा 19 कहती है कि मतदाता बनने के लिए व्यक्ति की उम्र 18 वर्ष होनी चाहिए और वह संबंधित निर्वाचन क्षेत्र का निवासी होना चाहिए।

     

    इसी आधार पर चुनाव आयोग का कहना है कि वह मतदाता सूची की ‘शुद्धता’ के लिए पात्रता की जांच कर रहा है और इस प्रक्रिया के तहत नागरिकता की जांच नहीं हो रही है। सुप्रीम कोर्ट में दाख़िल 88 पन्नों के हलफ़नामे में आयोग ने स्पष्ट किया कि एसआईआर की प्रक्रिया से किसी व्यक्ति की नागरिकता समाप्त नहीं मानी जाएगी, भले ही, उसे मतदाता सूची में पंजीकरण के लिए अयोग्य करार दिया जाए।

    बिहार में शुरू की गई इस प्रक्रिया के अंतर्गत लगभग आठ करोड़ लोगों को 25 जुलाई तक ‘गणना फॉर्म’ भरकर जमा करना है, और आयोग के अनुसार 1 अगस्त को जारी होने वाली ड्राफ़्ट सूची में उन्हीं लोगों के नाम होंगे, जिन्होंने यह फॉर्म भरा होगा, भले ही आवश्यक दस्तावेज़ संलग्न किए गए हों या नहीं।

    यहीं से विवाद की शुरुआत होती है। विपक्षी दलों का कहना है कि यह एक ‘परोक्ष नागरिकता जांच’ है, जो उन्हें एसआईआर और असम के अनुभव की याद दिलाती है। विपक्ष यह भी पूछ रहा है कि जब आधार, वोटर आईडी और राशन कार्ड आमतौर पर पहचान के दस्तावेज़ माने जाते हैं, तो इन्हें इस प्रक्रिया में मान्यता क्यों नहीं दी जा रही है?

     

    चुनाव आयोग ने हलफ़नामे में यह दलील दी है कि आधार कार्ड न तो नागरिकता का प्रमाण है और न ही उसे मतदाता बनने की पात्रता साबित करने के लिए पर्याप्त माना जा सकता है। आयोग ने यह भी कहा कि कई उच्च न्यायालयों ने भी आधार को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना है। आधार अधिनियम, 2016 की धारा 9 यह स्पष्ट करती है कि आधार केवल पहचान का साधन है, नागरिकता या अधिवास (डोमिसाइल) का नहीं।

    यही स्थिति राशन कार्ड और वोटर आईडी की भी है, जिन्हें व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन जिनमें नागरिकता या स्थानीयता की पुष्टि के लिए वैधानिक बल नहीं होता। आयोग का तर्क है कि यदि इन दस्तावेज़ों के आधार पर ही मतदाता सूची तैयार कर दी जाए, तो फर्ज़ी मतदाता, प्रवासी वोटर, या गैर-नागरिकों के शामिल होने का ख़तरा बढ़ सकता है, हालांकि यह तर्क कानूनी दृष्टिकोण से सही हो सकता है, लेकिन व्यवहार में इससे आम नागरिकों में भ्रम, भय और प्रशासनिक दुश्वारियां बढ़ रही हैं।

     

    यह बहस तब और दिलचस्प हो जाती है, जब हम यह समझने की कोशिश करते हैं कि मताधिकार और नागरिकता कैसे परस्पर जुड़े हुए हैं, लेकिन एक जैसे नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप नायर बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (2006) मामले में स्पष्ट किया था कि मताधिकार मौलिक अधिकार नहीं, बल्कि एक संवैधानिक अधिकार है, और इसे पाने के लिए नागरिक को कुछ शर्तें पूरी करनी पड़ती हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि संवैधानिक अधिकार वही होता है, जो कुछ शर्तों के पूरा होने पर मिलता है। यदि, आप वे शर्तें पूरी नहीं करते, जैसे दस्तावेज़ नहीं जमा करना या क्षेत्रीय निवास प्रमाण नहीं देना तो मताधिकार से वंचित हो सकते हैं। इसका यह मतलब नहीं है कि आपकी नागरिकता समाप्त हो गई। दूसरे शब्दों में, हर भारतीय नागरिक मतदाता नहीं होता, लेकिन हर मतदाता को भारतीय नागरिक होना जरूरी है। यह अंतर भले ही तकनीकी लगे, लेकिन लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और समावेशिता को तय करने में इसकी अहम भूमिका है।
    यहां पर सबसे महत्वपूर्ण सवाल उठता है कि क्या चुनाव आयोग को यह अधिकार है कि वह नागरिकता की पुष्टि करने वाले दस्तावेज़ मांग सके? चुनाव आयोग के अनुसार, यह इसीलिए, क्योंकि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत उसका कर्तव्य है कि वह सुनिश्चित करे कि मतदाता सूची में केवल योग्य और कानूनी मतदाता ही शामिल हों। इस प्रक्रिया में यदि दस्तावेज़ मांगने की आवश्यकता होती है, तो यह वैधानिक दायित्व के अंतर्गत आता है।

     

    विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत होता है न कि चुनाव आयोग के किसी फॉर्म या प्रक्रिया से। आयोग केवल यह देखता है कि संबंधित व्यक्ति उस निर्वाचन क्षेत्र में पात्र मतदाता है या नहीं। इन तकनीकी और संवैधानिक बहसों के बीच, असली चिंता यह है कि क्या इस तरह की प्रक्रियाएं, जानबूझकर या अनजाने में, कमजोर वर्गों, आदिवासियों, मुसलमानों, प्रवासी मजदूरों या गरीब तबके को मताधिकार से वंचित करने का ज़रिया बन सकती हैं?

    यदि, यह प्रक्रिया अत्यधिक दस्तावेज़-आधारित, जटिल और अस्पष्ट हो जाती है, तो यह उन लोगों के लिए एक और ‘ब्यूरोक्रेटिक भूलभुलैया’ बन सकती है, जिनके पास स्थायी पते, वैध दस्तावेज़ या कानूनी समझ नहीं है। यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट ने आधार, वोटर आईडी और राशन कार्ड जैसे सामान्य दस्तावेज़ों को भी प्रक्रिया में स्वीकार करने की सलाह दी, ताकि कोई भी पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रह जाए।

    कुल मिलाकर, बिहार में हो रही एसआईआर प्रक्रिया ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि लोकतंत्र में वोट देना एक अधिकार है या एक परीक्षा? चुनाव आयोग की यह जिम्मेदारी है कि वह मतदाता सूची को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखे, लेकिन यह भी जरूरी है कि यह प्रक्रिया इतनी पारदर्शी और संवेदनशील हो कि किसी भी नागरिक को यह अनुभव न हो कि उसकी पहचान या अस्तित्व को ही चुनौती दी जा रही है। मताधिकार को सुनिश्चित करने और दुरुपयोग से बचाने के बीच एक संतुलनपूर्ण रास्ता निकालना आज की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक आवश्यकता है। यदि, यह प्रक्रिया भय की बजाय विश्वास का आधार बन सके, तो एसआरआई जैसे पुनरीक्षण न केवल तकनीकी सुधार बनेंगे, बल्कि लोकतंत्र के विस्तार का भी माध्यम बन सकते हैं।

    एसआईआर पर विपक्ष का आरोप संवेदनशील
    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleभारत-ब्रिटेन व्यापार समझौताः एक क्रांतिकारी कदम
    Next Article ब्लैकलिस्टेड सप्लायर को 16 करोड़ का टेंडर, यूसील प्रबंधन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

    Related Posts

    RSS कार्यालय पेट्रोल बम कांड: लोहरदगा में मुख्य आरोपी समेत दो के घर जांच एजेंसी का छापा

    June 19, 2026

    RSS कार्यालय पेट्रोल बम कांड: लोहरदगा में मुख्य आरोपी समेत दो के घर जांच एजेंसी का छापा

    June 19, 2026

    धनबाद चापापुर OCP की ब्लास्टिंग से धंसी सड़क, ग्रामीणों ने ठप कराया खनन कार्य

    June 19, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    RSS कार्यालय पेट्रोल बम कांड: लोहरदगा में मुख्य आरोपी समेत दो के घर जांच एजेंसी का छापा

    RSS कार्यालय पेट्रोल बम कांड: लोहरदगा में मुख्य आरोपी समेत दो के घर जांच एजेंसी का छापा

    धनबाद चापापुर OCP की ब्लास्टिंग से धंसी सड़क, ग्रामीणों ने ठप कराया खनन कार्य

    गिरिडीह रेलवे ट्रैक पर युवक की मौत, चार माह पहले हुई थी शादी

    टाटा स्टील क्वार्टर खाली कराने पहुंची टीम का विरोध, एएसआई पर अवैध कब्जे का आरोप

    छपरा जंक्शन से नई रेल सेवाओं की शुरुआत, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दिखाई हरी झंडी

    5 महीने से वेतन नहीं मिलने पर एनएचएम कर्मचारियों का सदर अस्पताल में धरना

    गिरिडीह नशामुक्त गिरिडीह का संकल्प: मीडिया, महिलाओं और युवाओं की भागीदारी से चलेगा जन-जागरूकता अभियान

    आपदा प्रबंधन को लेकर जमशेदपुर में विशेष प्रशिक्षण शुरू, एनडीआरएफ ने सिविल डिफेंस छात्रों को दिए रेस्क्यू के गुर

    विधायक पूर्णिमा साहू का प्रयास लाया रंग, 19 जून को बिरसानगर पीएम आवास योजना के लाभुकों को मिलेगा अपने घर का अधिकार, होगा गृह प्रवेश पूजन

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.